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बगैर सोचे-समझे पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों में नहीं कर सकते बदलाव: धर्मेंद्र प्रधान

समय आ गया है कि जीएसटी परिषद पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाने पर विचार करे

Bhasha Updated On: Sep 13, 2017 11:09 PM IST

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बगैर सोचे-समझे पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों में नहीं कर सकते बदलाव: धर्मेंद्र प्रधान

पेट्रोल की कीमतों में हाल में हुई बढ़ोतरी के बाद बीते तीन साल में ये सबसे महंगा हो गया है. पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि पेट्रोल के दामों को बिना सोचे समझे यूं ही बदल नहीं सकते. हालांकि उन्होंने कहा कि सुधार जारी रहेगा.

बुधवार को पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पेट्रोल और डीजल के दाम की दैनिक आधार पर समीक्षा करने से रोकने के लिए सरकार के हस्तक्षेप से इनकार किया. उन्होंने कहा कि ईंधन के दाम में बिना सोच-विचार किए बदलाव नहीं किया जा सकता. पेट्रोलियम मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब ईंधन के दाम में जुलाई के बाद से 7.3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी होने से सवाल उठ रहे हैं.

संवाददाताओं ने प्रधान से पूछा था कि क्या मूल्य वृद्धि को देखते हुए सरकार की दैनिक आधार पर कीमत में बदलाव की प्रक्रिया रोकने की योजना है, जिससे उन्होंने इनकार कर दिया. केंद्रीय मंत्री ने तीन जुलाई से कीमतों में बढ़ोतरी के प्रभाव को हल्का करने के लिए टैक्स कटौती को लेकर भी कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई. उन्होंने कहा कि सरकार को ढांचागत सुविधा और सामाजिक बुनियादी ढांचे के बड़े पैमाने पर वित्त पोषण की जरूरत है.

कीमतों में वृद्धि को लेकर आलोचना को प्रधान ने गलत बताया. उन्होंने कहा कि 16 जून को दैनिक आधार पर कीमत समीक्षा के बाद एक पखवाड़े तक कीमतों में आई कमी की अनदेखी की गई. और केवल अस्थायी तौर पर बढ़ने वाले दामों की प्रवृत्ति को जोर-शोर से उठाया जा रहा है.

प्रधान का कहना है कि पहले दरों को हर पखवाड़े बदला जाता था लेकिन 16 जून से इसे दैनिक आधार पर बदला जा रहा है. दैनिक आधार पर समीक्षा में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम में अगर कोई कटौती होती है तो उसका तुरंत लाभ ग्राहकों को मिलता है. इससे कीमतों में एक बार में अचानक से वृद्धि के बजाए कम मात्रा में बढ़ोतरी होती है.

देश अपनी जरूरतों का 80 फीसदी आयात (इंपोर्ट) से पूरा करता है. इसीलिए 2002 से घरेलू ईंधन की दरों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव से जोड़ा गया है.

उपभोक्ताओं के साथ विकास जरूरतों के बीच संतुलन रखना है 

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि अमेरिका में चक्रवात जैसे कारणों से वैश्विक कीमतों में वृद्धि आई है और इसमें कीमत के संकेत पहले से दिख रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘इस चक्रवात के कारण अमेरिकी की कुल रिफाइनरी क्षमता 13 फीसदी प्रभावित हुई है.’ यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार इस वृद्धि के प्रभाव को कम करने के लिए उत्पाद शुल्क में कटौती करेगा, उन्होंने कहा, ‘इस बारे में वित्त मंत्रालय को निर्णय करना है लेकिन एक चीज बिल्कुल साफ है, हमें उपभोक्ताओं की आकांक्षाओं के साथ विकास जरूरतों के बीच संतुलन रखना है.’

आपको बता दें कि सरकार ने नवंबर 2014 और जनवरी 2016 के दौरान नौ बार पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क बढ़ाया. वैश्विक स्तर पर ईंधन के दाम में नरमी को देखते हुए उत्पाद शुल्क बढ़ाए गए. कुल मिलाकर इस दौरान पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क में 11.77 रुपये प्रति लीटर तथा डीजल पर 13.47 रुपये की वृद्धि की गई. शुल्क वृद्धि से सरकार का 2016-17 में उत्पाद शुल्क संग्रह बढ़कर 2,42,000 करोड़ रुपए हो गया.

प्रधान ने कहा कि उत्पाद शुल्क संग्रह में से 42 फीसदी राज्य सरकारों को बुनियादी ढांचा और कल्याणकारी कार्यक्रमों के लिए ट्रांसफर किए गए. उन्होंने कहा, ‘समय आ गया है कि जीएसटी परिषद पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाने पर विचार करे.’

सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के प्रमुखों के साथ बैठक के बाद उन्होंने कहा, ‘सरकार का तेल कंपनियों के रोजाना के कामकाज से कोई लेना-देना नहीं है. केवल कुशलता ऐसा क्षेत्र है जहां सरकार तेल कंपनियों की दक्षता में सुधार के लिए हस्तक्षेप करेगी.’

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