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नोटबंदी का एक सालः डिजिटल ट्रांजैक्शंस की नहीं बढ़ी रफ्तार

नोटबंदी के बाद सरकार ने कहा था कि इससे कैशलेस पेमेंट बढ़ेगा

FP Staff Updated On: Nov 08, 2017 07:37 PM IST

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नोटबंदी का एक सालः डिजिटल ट्रांजैक्शंस की नहीं बढ़ी रफ्तार

सरकार ने एक साल पहले जब नोटबंदी का फैसला किया तो यह कहा गया था कि इससे कैशलेश ट्रांजैक्शन बढ़ेगा. लेकिन आज हकीकत कुछ और है. नोटबंदी के एक साल बाद भी डिजिटल पेमेंट्स बढ़ाने के लिए सरकार पूरा जोर लगा रही है. मगर नोटबंदी के एक साल बाद भी डिजिटल पेमेंट्स रफ्तार नहीं पकड़ सके हैं. नोटबंदी के ठीक बाद शुरुआती दिनों में डिजिटल पेमेंट्स में उछाल आया था. हालांकि, बाद में डिजिटल ट्रांजेक्शंस में गिरावट देखने को मिली है. इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट सिस्टम के जरिए होने वाले ट्रांजेक्शंस मार्च 2017 में 149 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गए थे. जबकि नवंबर 2016 में 94 लाख करोड़ रुपए के डिजिटल पेमेंट्स हुए थे.

डिजिटल लेनदेन घटा

नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) से मिले आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2017 में डिजिटल बिजनेस घटकर 107 लाख करोड़ रुपए के स्तर पर पहुंच गया था, जबकि अगस्त 2017 में यह 109 लाख करोड़ रुपए के लेवल पर रहा. डिजिटल पेमेंट्स का आंकड़ा सितंबर 2017 में 124 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचा, मगर इस साल अक्टूबर (29 अक्टूबर तक) में यह घटकर 99.28 लाख करोड़ रुपए पर आ गया है.

PoS मशीन बढ़ाने के बाद भी घटा डिजिटल पेमेंट्स

डिजिटल पेमेंट्स में यह गिरावट ऐसे समय आई है, जबकि देशभर में मर्चेंट स्टेबलिशमेंट्स में प्वाइंट ऑफ सेल (PoS) मशीन की संख्या दोगुनी हुई है. इसके अलावा, वॉल्यूम में भी गिरावट देखने को मिली है. दिसंबर 2016 में जहां वॉल्यूम 95.75 करोड़ के हाई पर पहुंच गया था. वहीं, अक्टूबर 2017 में यह घटकर 86.39 करोड़ पर आ गया. HDFC बैंक ने एक रिपोर्ट में कहा है, 'यह बात देखने में आई है कि कुछ छोटे मर्चेंट्स कैश की ओर लौट रहे हैं. लिक्विडिटी की स्थिति में सुधार आने के साथ ही ओवरऑल रिटेल इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट्स के लिए ट्रांजेक्शन वॉल्यूम्स में मामूली गिरावट देखने को मिली है. जहां मोबाइल वॉलेट की बात है तो शुरुआती तेजी के बाद इसकी रफ्तार भी सुस्त हुई है.'

मोबाइल वॉलेट्स के वॉल्यूम और वैल्यू में गिरावट

शुरुआती तेजी के बाद मोबाइल वॉलेट्स से होने वाले ट्रांजेक्शंस के वॉल्यूम और वैल्यू में भी गिरावट आई है. रिजर्व बैंक के मुताबिक, अक्टूबर 2016 में मोबाइल वॉलेट्स के ट्रांजेक्शंस का वॉल्यूम और वैल्यू क्रमशः 9.95 करोड़ और 3,385 करोड़ रुपए था, जो कि मार्च 2017 में बढ़कर 26.16 करोड़ और 8,353 करोड़ रुपए पहुंच गया था. हालांकि, अगस्त 2017 तक मोबाइल वॉलेट्स से होने वाले ट्रांजेक्शंस का वॉल्यूम और वैल्यू घटकर 22.54 करोड़ और 7,262 करोड़ रुपए रह गई है. नोटबंदी के बाद पेटीएम, फ्रीचार्ज और मोबिक्विक जैसी M-Wallet फर्मों ने कैब ऑपरेटर्स, वेजिटेबल वेंडर्स और किराना स्टोर्स को जोड़कर बड़ा एक्सपैंशन किया था.

डिजिटाइजेशन पर बैंकों का पूरा जोर

बैंकों का कहना है कि उनका पूरा जोर डिजिटाइजेशन पर है. SBI के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा, 'बैंक में हम डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन कर रहे हैं और हम बैंकों को फ्यूचर के लिए तैयार कर रहे हैं.' SBI को PoS टर्मिनल्स की संख्या में तेज उछाल देखने को मिला है. SBI के मुताबिक, सितंबर 2016 में जहां इनकी संख्या 3.6 लाख थी. वहीं, सितंबर 2017 में इनकी संख्या बढ़कर 6.42 लाख हो गई. जबकि ट्रांजेक्शंस की संख्या 7.05 लाख से बढ़कर 20.92 लाख हो गई. जबकि ट्रांजेक्शंस की वैल्यू 18,067 करोड़ से बढ़कर 47,825 करोड़ रुपए हो गई. मौजूदा समय में मार्केट में डेबिट कार्ड्स की संख्या 80 करोड़ और क्रेडिट कार्ड की संख्या 30 करोड़ से ज्यादा है. आज भारत के ज्यादातर घरों की पहुंच डिजिटल पेमेंट्स तक है, लेकिन यह डिजिटल ट्रांजेक्शंस में तब्दील नहीं हुआ है.

(न्यूज 18 से साभार)

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