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मिल्क और मर्सिडीज नहीं, पर इनपर तो लग सकता है एकसमान GST

पेपर, इलेक्ट्रिकल्स जैसे कई ऐसे सेगमेंट हैं जहां वस्तुओं में मामूली बदलाव होते ही टैक्स का बोझ बढ़ जाता है

Updated On: Jul 03, 2018 07:11 AM IST

Pratima Sharma Pratima Sharma
सीनियर न्यूज एडिटर, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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मिल्क और मर्सिडीज नहीं, पर इनपर तो लग सकता है एकसमान GST

जीएसटी के एकसाल पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह साफ शब्दों में कह दिया कि वे जीएसटी में सिंगल टैक्स नहीं रख सकते हैं. भारत में जीएसटी के 4 स्लैब हैं. ये हैं 5 फीसदी, 12 फीसदी, 18 फीसदी और 28 फीसदी. पिछले एक साल से कारोबारियों की लगातार यह मांग रही है कि एक जैसे उत्पादों पर एक ही टैक्स लगाया जाए. लेकिन पीएम ने यह मांग खारिज करते हुए यह दलील दी कि मिल्क और मर्सिडीज पर एक बराबर टैक्स नहीं लगा सकते हैं. बात भी सही है. दूध जहां आम आदमी की जरूरत है वहीं मर्सिडीज घोर लग्जरी. तो यह भी तय है कि इन दोनों पर एक समान टैक्स नहीं लगाया जा सकता. लेकिन पीएम ने जो उदाहरण दिया है वह अतिरेक है.

मिल्क और मर्सिडीज में कोई तुलना नहीं है. लेकिन ऐसे कई उत्पाद हैं जिनपर एकसमान जीएसटी लगाना मुमकिन है. अब पेपर के बिजनेस को ही लेते हैं. जब कोई सरकारी वेंडर लिफाफा, पोस्टकार्ड, ज्यूडिशियल, नॉन ज्यूडिशियल स्टैंप पेपर बेचता है तो उसपर कोई जीएसटी नहीं लगता है. रुपए, चेकबुक की छपाई के लिए रिजर्व बैंक को बेचे गए पेपर पर भी कोई जीएसटी नहीं चुकाना पड़ता.

आज विश्व ब्रेल दिवस है. लुई ब्रेल ने ब्रेल लिपि का आविष्कार किया था. उनका जन्म 4 जनवरी, 1809 को हुआ था. 4 जनवरी को उनकी याद में विश्व ब्रेल दिवस मनाया जाता है. (विकीपीडिया इमेज)

अखबार की छपाई के लिए जिस पेपर का इस्तेमाल होता है उस पर 5 फीसदी जीएसटी देना पड़ता है. पेपर के कुछ आइटम पर 12 फीसदी जीएसटी है. इसमें पैकिंग पेपर, अनकोटेड पेपर और पेपरबोर्ड, कार्टून, बॉक्स, पतंग, पेपर पल्प से बनने वाले ट्रे, ब्रेल पेपर, सिगरेट पेपर, कार्बन पेपर, लिफाफा, लेटर, प्लेन पोस्टकार्ड वगैरह शामिल हैं. पेपर के कुछ आइटम पर 28 फीसदी तक जीएसटी देना पड़ता है. इनमें वॉल पेपर और ऐसे ही वॉल कवरिंग पेपर आते हैं.

करोल बाग में शादी के कार्ड का बिजनेस करने वाले रघुवीर सहाय का कहना है, 'पेपर के अलग-अलग आइटम पर जीएसटी की रेट अलग है. अगर सरकार एक रेट रखे तो उन्हें कारोबार करने में आसानी होगी. कारोबारियों की यह भी शिकायत है कि मामूली बदलाव से ही उनपर टैक्स का बोझ काफी बढ़ जाता है.'

क्या है इलेक्ट्रोनिक्स का हाल?

अब बात करते हैं इलेक्ट्रिकल पार्ट्स और इलेक्ट्रोनिक्स सामानों की. इनपर भी अलग-अलग टैक्स लगता है. भागीरथी प्लेस के कमल खुराणा का कहना है, 'ये कैसे हो सकता है कि एक कैटेगरी में अलग-अलग टैक्स लगाया जाए. सरकार को इसमें कुछ बदलाव करना चाहिए ताकि हमें कुछ राहत मिले.' उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रिक मोटर और जेनरेटर, ट्रांसफर्मर्स, प्राइमरी बैटरीज, वैक्यूम क्लीनर पर 18 फीसदी जीएसटी लगता है. जबकि इलेक्ट्रिक एक्युमलेटर्स, डोमेस्टिक अप्लाएंसेज पर 28 फीसदी जीएसटी लगता है.

दिलचस्प है कि बाकी डोमेस्टिक अप्लाएंस पर 28 फीसदी जीएसटी है जबकि वैक्यूम क्लीनर पर 18 फीसदी. मामूली बदलाव से जीएसटी में 10 फीसदी का इजाफा हो जाता है. टेलीफोन और एलईडी लैंप पर 12 फीसदी जीएसटी है जबकि डिजाइनर लाइट्स पर 18 फीसदी टैक्स चुकाना पड़ता है. विंड मिल्स, सोलर लैंप, बायोगैस प्लांट पर सिर्फ 5 फीसदी ही टैक्स चुकाना पड़ता है.

जेम्स एंड ज्वैलरी सेक्टर का भी यही हाल है. इसमें बेस मेटल, चांदी, सोना, मोती पर 3 फीसदी टैक्स लगता है. जबकि बहुमूल्य पत्थर और सेमी प्रीसियस स्टोन पर सिर्फ 0.25 फीसदी ही जीएसटी देना पड़ता है. अगर कैपिटल गुड्स की बात करें तो वहां भी अलग-अलग टैक्स स्लैब की मुश्किल कारोबारियों को परेशान करती है. कैपिटल गुड्स के कुछ प्रोडक्ट्स पर 28 फीसदी और कुछ पर 18 फीसदी टैक्स लगता है.

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