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नोटबंदी नहीं रघुराम राजन की वजह से गिरी थी विकास दर: राजीव कुमार

विकास दर के नीचे गिरने के पीछे राजन की बैंकिंग नीतियां जिम्मेदार हैं, विकास दर के घटने का मुख्य कारण बैंकिंग सेक्टर में एनपीए का बढ़ना है

Updated On: Sep 03, 2018 03:37 PM IST

FP Staff

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नोटबंदी नहीं रघुराम राजन की वजह से गिरी थी विकास दर: राजीव कुमार

नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने साफ साफ कहा कि विकास दर के नीचे गिरने के पीछे नोटबंदी का कोई हाथ नहीं है. उन्होंने कहा कि पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नोटबंदी को लेकर कई बातें कही हैं. उन लोगों ने नोटबंदी पर झूठा आरोप लगाते हुए कहा है कि विकास दर नीचे होने की मुख्य वजह यही है. हालांकि ऐसा बिल्कुल नहीं है. इस तरह के बड़े लोगों को ऐसी बातें नहीं करनी चाहिए.

राजीव कुमार ने कहा कि इस समय विकास दर का नीचे गिरना सामान्य है. पिछले छह तिमाही से ऐसा हो रहा है और इसके पीछे नोटबंदी का कोई हाथ नहीं है. विकास दर के नीचे गिरने का ट्रेंड चल रहा है और इसमें नोटबंदी का कोई रोल नहीं है. उन्होंने बताया कि साल 2015-16 में विकास दर ने 9.2 प्रतिशत की ऊंचाई हासिल की थी. विकास दर का नीचे गिरना सिर्फ एक ट्रेंड के चलते है और इसका मोदी सरकार के इस बड़े फैसले से कोई लेना-देना नहीं है. इसका कोई सबूत नहीं है कि विकास दर के नीचे गिरने के पीछे नोटबंदी जिम्मेदार है.

कोई भी व्यक्ति इस बात को नहीं साबित कर सकता. अगर किसी में हिम्मत है तो साबित कर के दिखाए कि विकास दर के घटने और नोटबंदी में कोई डायरेक्ट लिंक है. वहीं राजीव कुमार ने आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन पर आरोप लगाते हुए कहा कि विकास दर के नीचे गिरने के पीछे राजन की बैंकिंग नीतियां जिम्मेदार हैं. उन्होंने बताया कि विकास दर के घटने का मुख्य कारण बैंकिंग सेक्टर में एनपीए का बढ़ना है.

जब मोदी सरकार सत्ता में आई थी तो ये आंकड़ा 4 लाख करोड़ के आसपास था जो 2017 तक साढ़े 10 लाख करोड़ तक पहुंच गया है. रघुराम राजन ने एनपीए की पहचान के लिए नई प्रणाली बनाई थी और यह लगातार बढ़ता रहा. राजीव कुमार ने कहा कि एनपीए बढ़ने की वजह से बैंकिंग सेक्टर ने इंडस्ट्री को उधार देना बंद कर दिया था. मध्यम और लघु उद्योगों का क्रेडिट ग्रोथ नेगेटिव में चला गया. सिर्फ इतना ही नहीं लार्ज स्केल इंडस्ट्री लिए भी यह 1 से 2.5 फीसदी तक गिर गया. भारतीय अर्थव्यवस्था के इतिहास में क्रेडिट में आई यह सबसे बड़ी गिरावट थी.

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