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नई ई-पॉलिसीः ऐमजॉन और फ्लिपकार्ट को लग सकता है 50 अरब का झटका

दरअसल नई नीति में स्पष्ट कहा गया है कि कोई ई-कॉमर्स कंपनी उस वेंडर का सामान अपने प्लैटफॉर्म से नहीं बेच सकेगी जिसमें उस ई-कॉमर्स कंपनी या उसकी ग्रुप कंपनियों की हिस्सेदारी है

Updated On: Dec 29, 2018 03:10 PM IST

FP Staff

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नई ई-पॉलिसीः ऐमजॉन और फ्लिपकार्ट को लग सकता है 50 अरब का झटका

ई-कॉमर्स में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की नीति में बदलाव से ऐमजॉन और फ्लिपकार्ट जैसी बड़ी ऑनलाइन कंपनियों को बड़ा झटका लगने वाला है क्योंकि दोनों कंपनियों के पास 2 से 2.5 हजार करोड़ रुपए का सामान है. टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार इनके लिए चिंता का सबब यह है कि 1 फरवरी 2019 से पहले इस विशाल भंडार को कैसे खत्म किया जाए. दरअसल नई नीति में स्पष्ट कहा गया है कि कोई ई-कॉमर्स कंपनी उस वेंडर का सामान अपने प्लैटफॉर्म से नहीं बेच सकेगी जिसमें उस ई-कॉमर्स कंपनी या उसकी ग्रुप कंपनियों की हिस्सेदारी है.

ई-कॉमर्स कंपनियां फैशन, अक्सेसरीज और अपने टाइअप वाले ब्रैंड्स वाले दूसरी सॉफ्ट-लाइन कैटिगरीज के प्रॉडक्ट्स के तीन महीने के भंडार बनाया करती हैं. ऐमजॉन के लिए क्लाउडटेल और फ्लिपकार्ट के लिए रिटेलनेट का यही काम है. ये दोनों कंपनियां छोटे-बड़े ब्रैंड्स से प्रॉडक्ट्स खरीदती हैं, जिन्हें ई-कॉमर्स प्लैटफॉर्म्स पर ऑनलाइन बेचा जाता है. एक फैशन ब्रैंड के सीईओ ने पहचान गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि कच्चे-पक्के आकलन से पता चलता है कि ऐमजॉन-फ्लिपकार्ट के पास करीब-करीब 5 हजार करोड़ रुपए के भंडार पड़े हैं.

दरअसल, फैशन और सॉफ्ट लाइन कैटिगरीज दोनों कंपनियों के तीन बड़े व्यापरों में शामिल हैं. अभी बीते त्योहारी मौसम में इस सेगमेंट के सामानों की बिक्री 2500 से 2800 रुपए मूल्य की रही. इंडस्ट्री सूत्रों के मुताबिक बिक्री में हिस्सेदारी के मामले में क्रमशः फ्लिपकार्ट, मिंत्रा और ऐमजॉन पहले, दूसरे और तीसरे नंबर पर रही. अब इन कंपनियों के बड़े अधिकारी एक महीने के अंदर अपने भंडार खाली करने के विकल्पों पर विचार कर रहे हैं. सूत्रों ने बताया कि क्लाउडटेल और रिटेलनेट जैसे अल्फा सेलर्स अपने भंडार को लेकर विभिन्न ब्रैंड्स से बातचीत करने वाले हैं.

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