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15वां वित्त आयोग: टर्म्स ऑफ रेफरेंस पर फिजूल का विवाद

पंद्रहवें वित्त आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस में एक और विशेष सन्दर्भ-‘जनसंख्या वृद्धि के रिप्लेसमेंट दर की तरफ बढ़ने की दिशा में की गई कोशिश और प्रगति’-को जोड़ा गया है

Arun Jaitley Updated On: Apr 10, 2018 11:05 PM IST

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15वां वित्त आयोग: टर्म्स ऑफ रेफरेंस पर फिजूल का विवाद

15वें वित्त आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस (संदर्भ की शर्तों) को लेकर यह फिजूल विवाद पैदा करने की कोशिश की जा रही है कि देश के किसी खास हिस्से के प्रति भेदभाव किया गया है. ऐसी बातें सच्चाई से बहुत दूर है.

केंद्रीय राजस्व का हिस्सा राज्यों में बंटता है ताकि राज्यों में अगर लोगों को एक मानक न्यूनतम जीवन-स्तर बनाए रखने लायक सुविधा देने में सरकारों को धन की कमी का सामना करना पड़ रहा हो तो केंद्रीय राजस्व से मिली राशि से वे इस कमी को पूरा कर सकें.

केंद्रीय राजस्व का राज्यों के बीच बंटवारा वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर होता है. इसके लिए जरूरी है कि राज्यों की जरूरतों का ठीक-ठीक आकलन हो और उनके बीच राजस्व का बंटवारा बराबरी के आधार पर किया जाए. वित्त आयोग राज्यों की जरूरतों के ठीक-ठीक आकलन के लिए उचित कसौटियों का इस्तेमाल करता है.

जहां तक किसी राज्य के लोगों की जरूरतों के संख्यात्मक आकलन का सवाल है- इसके लिए किसी राज्य की जनसंख्या से जुड़े आंकड़े बेहतर कसौटी का काम करते हैं. एक और कसौटी है ‘इनकम डिस्टेंस’ (इसमें किसी राज्य के सकल घरेलू उत्पाद की सबसे ज्यादा सकल घरेलू उत्पाद वाले राज्य से तुलना की जाती है) की.

इसके सहारे किसी राज्य के लोगों की तुलनात्मक गरीबी का बेहतर आकलन होता है और राज्य विशेष के लोगों की जरूरतों को गुणात्मक अर्थ में जाना जा सकता है. इन दो कसौटियों के आधार पर ज्यादा आबादी और ज्यादा गरीबी वाले राज्यों को अधिकाधिक संसाधनों का आवंटन होता है क्योंकि उन्हें अपने निवासियों को शिक्षा, स्वास्थ्य तथा अन्य सेवाएं प्रदान करने के लिए अतिरिक्त धन की जरुरत होती है और बहुत संभव है ये ज्यादा गरीब राज्य अपने संसाधनों के बूते वह अतिरिक्त धन ना जुटा पाएं.

चौदहवें वित्त आयोग में 2011 की जनगणना के आंकड़े के इस्तेमाल का कोई विशेष निर्देश नहीं है. फिर भी, राज्यों की जरूरतों के वास्तविक आकलन के लिए 14वें वित्त आयोग ने 2011 की जनगणना के आंकड़ों का सही इस्तेमाल किया और देखा कि साल 1971 के बाद से जनसंख्या के धरातल पर क्या बदलाव आये हैं. आयोग ने 2011 की जनगणना को 10 फीसद का वेटेज(मूल्यभार) दिया. चौदहवें वित्त आयोग ने केंद्रीय राजस्व से राज्यों को 42 फीसद का आबंटन किया था जो पहले के किसी भी वक्त में हुए आबंटन से ज्यादा है.

पंद्रहवें वित्त आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस में एक और विशेष सन्दर्भ- ‘जनसंख्या वृद्धि के रिप्लेसमेंट दर की तरफ बढ़ने की दिशा में की गई कोशिश और प्रगति’-- को जोड़ा गया है. जिन राज्यों ने जनगणना की बढ़वार पर काबू रखने के मामले में बेहतर प्रदर्शन किया है उनका टर्म्स ऑफ रेफरेंस में जोड़े गये इस विशेष संदर्भ के जरिए ख्याल रखा गया है. टर्म्स ऑफ रेफरेंस में शामिल इस विशेष संदर्भ के जरिए पंद्रहवें वित्त आयोग को आबादी की बढ़वार के मामले में रिप्लेसमेंट लेवल को हासिल करने वाले राज्यों को प्रोत्साहित करने का मौका मिलेगा. साथ ही, अगर 15वां वित्त आयोग चाहे तो वह संसाधनों के आबंटन में जनसंख्या की वृद्धि पर काबू पाने की दिशा में हुई प्रगति के लिए उचित वेटेज(मूल्यभार) तय कर सकेगा.

पंद्रहवें वित्त आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस में नवीनतम जनसंख्या से जाहिर होती ‘जरूरतों’ तथा ‘जनसंख्या की बढ़वार पर काबू करने की दिशा में हुई प्रगति’ के बीच ठीक-ठीक संतुलन बैठाया गया है. पंद्रहवें वित्त आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस में ऐसा कोई अंदरूनी पक्षपात या निर्देश नहीं है जिसके बारे में यह कहा जा सके कि उसके जरिए जनसंख्या की बढ़वार पर काबू करने के लिहाज से बेहतर प्रगति करने वाले राज्यों के साथ भेदभाव किया गया है.

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