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NCLAT ने कहा: हिस्सेदारी बेचने के लिए मिस्त्री परिवार पर दबाव नहीं डाले टाटा संस

मिस्त्री ने न्यायाधिकरण में टाटा संस को प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनाए जाने की प्रक्रिया रोकने के लिए याचिका दायर की है

Updated On: Aug 24, 2018 08:38 PM IST

Bhasha

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NCLAT ने कहा: हिस्सेदारी बेचने के लिए मिस्त्री परिवार पर दबाव नहीं डाले टाटा संस
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राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने शुक्रवार को टाटा संस के समूह के पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री के परिवार पर हिस्सेदारी बेचने के लिए दबाव नहीं डालने को कहा है. हालांकि, न्यायाधिकरण ने टाटा संस को पब्लिक लिमिटेड कंपनी से प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में परिवर्तित करने की प्रक्रिया को स्थगित करने से इनकार कर दिया.

मिस्त्री ने न्यायाधिकरण में टाटा संस को प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनाए जाने की प्रक्रिया रोकने के लिए याचिका दायर की है. एनसीएलएटी ने याचिका पर अंतरिम आदेश जारी करते हुए उसे सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया और मामले की सुनवाई 24 सितंबर को तय की है.

मिस्त्री के परिवार ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की मुंबई पीठ के उस फैसले को भी चुनौती दी है जिसमें न्यायाधिकरण ने मिस्त्री को टाटा संस के चेयरमैन पद से हटाए जाने के फैसले को सही ठहराया. साइरस मिस्त्री को अक्टूबर 2016 में अचानक टाटा संस के चेयरमैन पद से हटा दिया गया था.

मिस्त्री परिवावर ने इसके साथ ही टाटा संस को पब्लिक लिमिटेड कंपनी से प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनाए जाने को भी चुनौती दी है. मिस्त्री परिवार टाटा संस में टाटा ट्रस्ट के बाद सबसे बड़ा शेयरधारक है. टाटा संस के प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बन जाने के बाद शेयर धारक स्वतंत्र रूप से अपने हिस्सेदारी नहीं बेच सकता है. उसके संविधान के अनुच्छेद 75 के तहत निदेशक मंडल शेयर धारक को उसकी हिस्सेदारी बेचने के लिये दबाव बना सकता है.

मामला लंबित, मिस्त्री को शेयर बेचने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता

न्यायाधिकरण ने कहा, ‘इस बात को ध्यान में रखते हुए कि अपील लंबित है और इस दौरान यदि याचिकाकर्ता (मिस्त्री) को उसके शेयर बेचने के लिए बाध्य किया जाता है तो अपील का उद्देश्य ही प्रभावित हो जाएगा, क्योंकि वह कंपनी के सदस्य ही नही रह जाएंगे. ऐसे में हम प्रतिवादी (टाटा संस) को निर्देश देते हैं कि वह अपील के लंबित रहने तक आवेदक (मिस्त्री) जैसे अल्पांश शेयर धारकों के शेयर हस्तांतरण के लिए अनुच्छेद 75 का इस्तेमाल नहीं करे.’

चेयरपर्सन जस्टिस एसजे मुखोपाध्याय की अध्यक्षता वाली दो सदस्यी पीठ ने टाटा संस और अन्य से दस दिन के भीतर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है. मामले की अगले सुनवाई 24 सितंबर 2018 को तय की गई है.

टाटा संस का कहना है कि वह हमेशा से ही एक निजी कंपनी रही है लेकिन उसके आकार को देखते हुए एक पुराने कानूनी प्रावधान की वजह से उसे पब्लिक लिमिटेड कंपनी माना गया है. कुछ साल पहले कानून में बदलाव हुआ, जिसके तहत टाटा संस के शेयरधारकों को पिछले साल उसके कानूनी स्थिति में बदलाव को मंजूरी दी गई. इससे मिस्त्री की आपत्ति खारिज हो जाती है.

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