S M L

नेशनल पेंशन योजना: उम्रसीमा 60 वर्ष से बढ़ाकर की गई 65 वर्ष

योजना में उम्रसीमा बढ़ाए जाने का विकल्प है और उम्रसीमा बढ़ाकर 70 वर्ष तक करने की योजना है

FP Staff Updated On: Sep 11, 2017 07:28 PM IST

0
नेशनल पेंशन योजना: उम्रसीमा 60 वर्ष से बढ़ाकर की गई 65 वर्ष

राष्ट्रीय पेंशन योजना के तहत लाभ पाने वालों के लिए खुशखबरी है. अब 60 साल की बजाए 65 साल वाले लोग भी शामिल हो सकते हैं. यानी एनपीएस में अभी 18 से 60 वर्ष के उम्र के लोग शामिल हो सकते हैं. बोर्ड ने उम्रसीमा बढ़ाकर 65 वर्ष तक करने को मंजूरी दे दी है.

पीएफआरडीए ने सोमवार, 11 सितंबर को राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) में जुड़ने की ऊपरी आयु सीमा को मौजूदा 60 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष करने की घोषणा की.

पीएफआरडीए के अध्यक्ष हेमंत कांट्रेक्टर ने कहा कि पीएफआरडीए ने पहले ही इस बदलाव को हरी झंडी दे दी है और जल्द ही इस संबंध में अधिसूचना जारी की जाएगी.

उन्होंने कहा कि इस योजना में उम्रसीमा बढ़ाए जाने का विकल्प है और उम्रसीमा बढ़ाकर 70 वर्ष तक करने की योजना है.

पेंशन में रिफॉर्म करने के पीछे तर्क देते हुए उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य पोर्टेबिलिटी को बढ़ाना या एनपीएस में वृद्धावस्था फंड को ट्रांसफर कर इसे ज्यादा आकर्षक और ग्राहकों के लिए आसान बनाना है.

कांट्रेक्टर ने कहा, 'हमारा उद्देश्य ऐसे सेक्टर के लिए पेंशन योजना शुरू करना है जहां यह उपलब्ध नहीं है. केवल 15 से 16 प्रतिशत कर्मचारियों को पेंशन का लाभ मिल रहा है.'

भारत में लगभग 85 प्रतिशत कर्मचारी असंगठित और अनियमित क्षेत्रों में काम करते हैं.

एनपीएस के फायदे के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि यह आज विश्व की सबसे कम लागत की पेंशन योजना है. लागत बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि लगातार 25 से 30 वर्षों तक एक प्रतिशत के भी फर्क से कम से कम 15 से 16 प्रतिशत का फर्क पैदा हो सकता है.

क्या है राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) 

राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) भारत सरकार की ओर से की गई एक पेंशन-योजना है. शुरुआत में यह सरकार में भर्ती होने वाले नए व्‍यक्तियों (सशस्‍त्र सेना बलों के अलावा) के लिए तय की गई थी.

बाद में इसे स्‍वैच्छिक आधार पर असंगठित क्षेत्र के कामगारों सहित देश के सभी नागरिकों को दी जाने लगी है. इस योजना के सहारे सरकार ने स्वयं को पेंशन की जिम्मेदारी से मुक्त करने की कोशिश की है.

सरकार की भूमिका केवल शुरुआती दौर में बराबर के अंशदाता के रूप में है. कर्मचारी और सरकार के अंशदान से जमा हुए राशी निश्चित वित्तिय संस्थानों को मिलती है. जिसका वे दिए गए निर्देशों के तहत प्रबंधन करते हैं.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
SACRED GAMES: Anurag Kashyap और Nawazuddin Siddiqui से खास बातचीत

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi