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बतौर सीएम नरेंद्र मोदी के एक दशक पहले के फैसले का नतीजा है गुजरात का यह जापानी टाउनशिप

एक दशक पहले गुजरात के सीएम के रूप में यह मोदी की नीति ही थी, जिसने राज्य में जापानी निवेशकों के लिए एक समर्पित केंद्र के विचार को जमीन पर उतारा

Debobrat Ghose Debobrat Ghose Updated On: Jul 27, 2018 07:49 PM IST

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बतौर सीएम नरेंद्र मोदी के एक दशक पहले के फैसले का नतीजा है गुजरात का यह जापानी टाउनशिप

जापान के साथ अपने लंबे द्विपक्षीय संबंधों और दोस्ती की बदौलत, गुजरात सरकार अहमदाबाद के पास एक विशेष जापानी औद्योगिक शहर (इंडस्ट्रियल टाउनशिप) बना रही है. यह राज्य को एक विशाल ऑटोमोबाइल केंद्र बनाने की दिशा में किए जा रहे काम को आगे ले जाता है.

भारत के पहले हेरिटेज सिटी अहमदाबाद से 25 किमी दूर स्थित खोराज को जापानी निवेशकों और कर्मचारियों के लिए अपनी तरह का पहला टाउनशिप के रूप में विकसित किया जा रहा है.

इससे पहले, गुजरात सरकार ने अहमदाबाद से 90 किमी दूर विठ्ठलपुर के पास मंडल औद्योगिक क्षेत्र में जापानी सहायक इकाइयों के लिए एक समर्पित औद्योगिक क्षेत्र स्थापित की थी. यह ऑटोमोबाइल क्षेत्र से संबंधित था. चाहे यह खोराज का टाउनशिप हो या मंडल का औद्योगिक क्षेत्र, यह सब एक दशक पहले मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए शुरू हुआ था. तब उन्होंने किसी खास देश के लिए औद्योगिक क्षेत्र बनाने का सपना देखा था और उसे मूर्त रूप देने का काम शुरू किया था.

यह काम गुजरात को एक पसंदीदा ऑटोमोबाइल उद्योग गंतव्य बनाने को ले कर मोदी के विजन की वजह से संभव हो सका. यह मोदी की नीति ही थी, जिसने राज्य में जापानी निवेशकों के लिए एक समर्पित केंद्र के विचार को जमीन पर उतारा.

नैनो के बाद

पहला ठोस कदम 2008 में लिया गया था. गुजरात सरकार ने पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम की हिंसा के बाद, अहमदाबाद के पास साणंद औद्योगिक क्षेत्र में टाटा मोटर्स की एक लाख रुपए वाली कार परियोजना (नैनो) को जमीन दी थी. साणंद में टाटा को जिस कीमत पर जमीन दी गई, उसकी आलोचनाएं भी हुई. फिर भी, टाटा को राज्य सरकार से मिले प्रोत्साहनों से गुजरात लगातार अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ता गया. इसके बाद मारुति सुजुकी ने वहां जाने का फैसला किया और साणंद में अपनी कार निर्माण इकाई की स्थापना की.

इसके बाद की बाकी बातें इतिहास है. आज गुजरात में टाटा मोटर्स के अलावा, सुजुकी मोटर्स गुजरात (एसएमजी), होंडा मोटर कॉर्प, फोर्ड, शंघाई ऑटोमोबाइल इंडस्ट्रीज कंपनी-जनरल मोटर्स (एसएआईसी-जीएम) और जापानी ऑटोमोबाइल सहायक कंपनियों की एक विशाल संख्या मौजूद है. टाटा टियागो, जिंदल साउथ वेस्ट (जेएसडब्ल्यू) आदि जैसी कई कंपनियां पाइपलाइन में हैं, जो अगली पीढ़ी के इलेक्ट्रिक वाहनों का निर्माण करने के लिए तैयार हैं.

एक जापानी निवेशक किसी भी राज्य या देश में तभी निवेश करता है, जब उसे वहां भरोसा हो, वहां की नीति में पारदर्शिता और स्पष्टता हो, सरकार का दृष्टिकोण सकारात्मक हो, कार्य मानक उच्च हो, बिजनेस एथिक्स (व्यापार नैतिकता) हो और समयबद्ध मंजूरी मिल जाए. गुजरात ने पिछले कुछ वर्षों में यह सब प्रदान किया है.

गुजरात औद्योगिक विकास निगम (जीआईडीसी) के चेयरमैन बलवंतसिंह सी राजपूत ने गांधीनगर में फ़र्स्टपोस्ट से बात करते हुए कहा, 'भरोसा वह सबसे बड़ा कारक है, जो गुजरात में जापानी निवेश का सुचारू प्रवाह सुनिश्चित करता है. मोदीजी ने मुख्यमंत्री रहते हुए इस भरोसे को बनाए रखने के लिए काफी मेहनत की और यह सुनिश्चित किया कि सरकारी विभाग निर्बाध रूप से काम कर सके, खास कर उद्योग विभाग.'

वर्तमान में साणंद-विठलपुर-बेचारजी में 150 जापानी रह रहे हैं, जो जापानी यूनिट्स में काम करते हैं.

उन्होंने कहा, 'अब जापानी निवेशकों को और अधिक सुविधा देने के लिए, हम खोराज में सभी प्रकार की सुविधाओं के साथ एक औद्योगिक टाउनशिप बनाने जा रहे हैं.'

गुजरात में एक विशेष जापानी टाउनशिप बनाने के काम तक पहुंचने में लगभग दो दशक लगे.

गुजरात औद्योगिक विकास निगम (जीआईडीसी) के चेयरमैन बलवंतसिंह सी राजपूत (तस्वीर: देवव्रत घोष)

गुजरात औद्योगिक विकास निगम (जीआईडीसी) के चेयरमैन बलवंतसिंह सी राजपूत (तस्वीर: देवव्रत घोष)

गुजरात की रणनीतिक पहल

2017 से पहले - भारत-जापान फ्रेंडली एक्सचेंज वर्ष जिसने आगे द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत किया, गुजरात सरकार ने अपने रणनीतिक उपायों से राज्य में घरेलू और जापानी निवेश प्रवाह सुनिश्चित किया.

-2001 में कच्छ जिले के भुज में आए भूकंप के बाद राज्य सरकार ने संकट को एक अवसर में बदल दिया. इसने उद्योगों को टैक्स हॉलीडे और अन्य प्रोत्साहन प्रदान किए.

-दाहेज सेज में ब्राउनफील्ड पेट्रोलियम, केमिकल और पेट्रो-केमिकल स्पेशल इनवेस्टमेंट रीजन (पीसीपीआर) का निर्माण. इसने 2009 से 4000 करोड़ रुपए का निर्यात किया.

-कांडला, मुंद्रा, हजीरा जैसे प्रमुख 45 बंदरगाहों का निर्माण.

-पोर्टफोलियो का विविधीकरण.

-किसानों से जमीन खरीद्ने के एवज में उन्हें आकर्षक मुआवजा दिया गया. इसमें मुआवजा राशि के अलावा, 750 दिनों की मजदूरी और उनसे कुल खरीदी गई भूमि का 1 फीसदी कमर्शियल जमीन दिया गया.

-मास्टर प्लान और विनियमों का सख्त अनुपालन.

जीआईडीसी के उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक डी थारा ने फ़र्स्टपोस्ट से कहा, 'राज्य में निवेश लाने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने एक बड़ा निर्णय लिया था. विविधीकरण रणनीति के तहत, गुजरात ने खुद को रासायनिक और फार्मास्यूटिकल गंतव्य के बजाए एक ऑटोमोबाइल केंद्र के रूप में विस्तारित किया.'

उन्होंने कहा, 'विविधीकरण रणनीति के तहत, जीआईडीसी ने साणंद, मंडल, भागपुरा में क्षेत्र और देश विशिष्ट औद्योगिक केन्द्र बनाए. अब जापानी कंपनियों को अधिक से अधिक लुभाने के लिए खोराज में जापानी निवेशकों के लिए समर्पित औद्योगिक टाउनशिप का निर्माण किया जा रहा है. औद्योगिक इकाइयों के अलावा, इसमें आवास और अन्य सुविधाएं भी होंगी.'

मांडल बंदरगाह के पास निर्माणाधीन एक जापानी यूनिट

मांडल औद्योगिक क्षेत्र में निर्माणाधीन एक जापानी यूनिट

कैसा होगा जापानी टाउनशिप?

-नया देश-विशिष्ट जापानी औद्योगिक टाउनशिप खोराज में बनेगा, जो साणंद से 5 किमी और अहमदाबाद से लगभग 25 किमी दूर है.

-शहरी आधारभूत संरचना से लैस यह टाउनशिप 700 हेक्टेयर (1500 एकड़) जमीन बनाया जाएगा, जो जीआईडीसी की जमीन है.

-औद्योगिक इकाइयों के अलावा, आवास, शॉपिंग आर्केड, स्कूल, अस्पताल, बैंक और एटीएम मनोरंजन सुविधाएं भी होंगी.

-वास्तुकला और शहर की योजना जापानी आवश्यकताओं के अनुसार होगी.

-जीआईडीसी ने क्षेत्र में सड़क निर्माण शुरू कर दिया है.

-आठ जापानी कंपनियों ने टाउनशिप में इकाइयों की स्थापना के लिए रुचि दिखाई है.

-एक बार काम पूरा होने के बाद, यह टाउनशिप 15000 से 20000 प्रत्यक्ष रोजगार और इसका पांच गुना अप्रत्यक्ष रोजगार देगा.

-टाउनशिप के भीतर एक औद्योगिक पार्क विकसित करने में सहयोग देने के लिए राज्य सरकार जापान सरकार के साथ बातचीत कर रही है. जापान इस परियोजना में टोयोटा तुषो जैसे औद्योगिक पार्क डेवलपर्स को शामिल करने की योजना बना रहा है.

थारा ने कहा, 'जीआईडीसी उन्हें जमीन देगी. वे बदले में इसे विकसित करेंगे और कंपनियों को देंगे. यह प्लग-एंड-प्ले आधार पर होगा.'

देश का विशिष्ट इंडस्ट्रियल एस्टेट

औद्योगिक विकास में तेजी लाने और निवेशकों के लिए सिंगल प्वायंट कॉन्टेक्ट के लिए राज्य सरकार की एक संस्था है इंडस्ट्रियल एक्स्टेंशन ब्यूरो (इंडेक्सट बी). इसके आंकड़ों के मुताबिक, गुजरात को अप्रैल 2000 से मार्च 2018 के बीच 18.7 बिलियन डॉलर का विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) प्राप्त हुआ है. कुल एफडीआई में से सिर्फ पिछले पांच वर्षों में ही 10 बिलियन डॉलर मिला है.

इस साल 5 जुलाई को अहमदाबाद में जेट्रो (जापान एक्सटर्नल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन) बिजनेस सपोर्ट सेंटर के उद्घाटन के अवसर पर मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने कहा था कि राज्य 2020 तक जापानी फर्मों से 3 बिलियन डॉलर का निवेश हासिल करने का लक्ष्य रखता है और इन कंपनियों को भी प्रधानमंत्री मोदी के 'मेक इन इंडिया' अवधारणा का एहसास होगा. इस अवसर पर, 15 जापानी कंपनियों ने गुजरात के साथ इंट्रेस्ट ऑफ इंवेस्टमेंट एमओयू पर हस्ताक्षर किए. यह सेंटर भारत और जापान के बीच बेहतर संबंधों को बढ़ावा देने और बेहतर निवेश सुनिश्चित करने के लिए स्थापित किया गया है.

राज्य में जापानी निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी और बढ़ते निवेश को ध्यान में रखते हुए, जीआईडीसी ने मंडल में 120 हेक्टेयर में फैले इंडस्ट्रियल एस्टेट का निर्माण किया है. यह मंडल-बेचारजी स्पेशल इंवेस्टमेंट रिजन का एक हिस्सा है. मोदी मानते थे कि राज्य में एक स्पेशल इंवेस्टमेंट रिजन होना चाहिए और यह उनके इसी विजन का नतीजा है.

मंडल में 13 जापानी कंपनियां हैं, जो ऑपरेशनल हैं या निर्माणाधीन हैं. इसके बाद, अगला गंतव्य भागपुरा है, जहां 17 वेंडर्स मारुति सुजुकी की सहायक के रूप में काम कर रहे हैं.

टोयोटा तुषो इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के महाप्रबंधक काजूतुत्सू किनोशिता

टोयोटा तुषो इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के महाप्रबंधक काजूतुत्सू किनोशिता

टोयोटा तुषो इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के महाप्रबंधक काजूतुत्सू किनोशिता ने कहा, 'गुजरात सरकार की देश-विशिष्ट ऑटोमोटिव औद्योगिक क्लस्टर बनाने की पहल उत्साहजनक रही है. जापान के लिए सरकार का दृष्टिकोण बहुत ही सहायक है और पिछले कुछ वर्षों में निर्मित भरोसे ने जापानी कंपनियों को अपनी इकाइयां यहां स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया है.'

मांडल में टेक्नोट्रेन्ड्स ऑटोपार्क प्राइवेट लिमिटेड एक ऐसी ही कंपनी है, जो 70 एकड़ जमीन पर स्थित है. यह अपनी किरायेदार कंपनियों को प्लग-एंड-प्ले आधार पर सुविधाएं प्रदान करती है.

टेक्नोट्रेन्ड्स ऑटोपार्क प्राइवेट लिमिटेड के प्रमुख (ऑपरेशंस), जतिन बी पटेल ने कहा, 'हमारे पास पांच ग्राहक हैं, जिन्हें हम भूमि, बिजली, पानी, सरकारी मंजूरी, रखरखाव जैसी सारी सुविधाएं प्रदान कर रहे हैं. हमारे पास दो मॉडल हैं - 'रेडी-टू-बिल्ड' और 'रेडी-टू-सूट'. इनमें से किसी के भी आधार पर, हमने उनके लिए विनिर्माण इकाइयां स्थापित करते हैं. इसके अलावा, हम कौशल प्रशिक्षण भी प्रदान करते हैं.

टीएस टेक (मांडल) प्राइवेट लिमिटेड

टीएस टेक (मांडल) प्राइवेट लिमिटेड

मांडल और भागपुरा में स्थित ये छोटी जापानी कंपनियां सुजुकी मोटर्स गुजरात, होंडा मोटर कॉर्प आदि के लिए सहायक इकाइयों के रूप में काम करती हैं. उत्पादन आमतौर पर पूर्ण क्षमता के साथ आवश्यकता आधारित होता है. टीएस टेक (मांडल) प्राइवेट लिमिटेड के सलाहकार फूमिहिरो निशिओका ने कहा, 'टीएस टेक और होंडा मोटर कॉर्प समझौते के तहत, हम प्रति दिन 4850 दोपहिया सीटों का उत्पादन करते हैं और उन्हें इसका सौ फीसदी आपूर्ति करते हैं. हमारा विस्तार होंडा पर निर्भर करता है. जापान में हमारी भागीदारी सुजुकी और अन्य कंपनियों के साथ हैं.'

रोकीमिंडा, मुंजाल किरीउ, एमए एक्सट्रुज़न आदि कुछ अन्य सहायक कंपनियां हैं, जो मंडल में विनिर्माण कर रही हैं.

गुजरात में 80 से अधिक जापानी कंपनियां पहले से ही विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रही हैं. जैसे, फैब्रिकेशन, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल आदि. पाइपलाइन में 20 और कंपनियां हैं. ऐसे में, जब सितंबर 2017 में जापान के प्रधानमंत्री शिन्जो आबे भारत आए थे, तभी जापानी टाउनशिप के विचार ने आकार लेना शुरू किया.

गुजरात के मुख्यमंत्री के सचिव अश्विनी कुमार ने कहा, 'व्यापार और उद्योग गुजराती खून में हैं. हम एक सहजीवी संबंध में यकीन रखते है. यही गुजरात सरकार पर निवेशकों के विश्वास का कारण है. हम उन्हें स्पष्ट रूप से हमारी नीतियों, विनियमों, सुरक्षा और पर्यावरण मानदंडों के बारे में बता देते हैं. हम सुनिश्चित करते हैं कि निवेशकों को यहां काम करने के लिए एक आरामदायक माहौल और क्षेत्र मिले.'

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