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नाबार्ड के फंड से किसानों का दिल जीत पाएगी सरकार!

राज्यसभा में नाबार्ड संशोधन 2017 बिल पास होने के बाद सरकार को अब इसकी पूंजी 5000 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 30,000 करोड़ रुपए कर सकती है, जिससे उसे किसानों का गुस्सा शांत करने में मदद मिलेगी

Updated On: Jan 03, 2018 04:09 PM IST

Pratima Sharma Pratima Sharma
सीनियर न्यूज एडिटर, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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नाबार्ड के फंड से किसानों का दिल जीत पाएगी सरकार!
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राज्यसभा में नाबार्ड संशोधन बिल 2017 पास हो गया. इसके साथ ही सरकार को एक ऐसा हथियार मिल गया, जिससे वह किसानों से किया गया अपना वादा पूरा कर सकती है. गुजरात चुनाव के नतीजों से यह साफ था कि ग्रामीण इलाकों में बीजेपी की पकड़ कमजोर हो रही है. 2018 में मध्यप्रदेश और राजस्थान सहित कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. ऐसे में सरकार किसी भी सूरत में किसानों की नाराजगी मोल नहीं लेना चाहती है. नाबार्ड के संशोधन से केंद्र सरकार अपनी कई योजनाओं को लागू कर सकती है और किसानों को उसका फायदा पहुंचा सकती है.

बजट के लिहाज से क्यों अहम है नाबार्ड बिल?

नाबार्ड बिल संशोधन पास होने के साथ ही केंद्र सरकार को इसकी पूंजी बढ़ाने का अधिकार मिल गया. यानी आरबीआई से मशविरा करने सरकार नाबार्ड की पूंजी 5000 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 30,000 करोड़ रुपए कर सकती है. यह केंद्र के लिए राहत भरा कदम है.

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केंद्र सरकार ने 2022 तक किसानों की आमदनी बढ़ाकर दोगुना करने का जो वादा किया है, उसे पूरा करना अब आसान हो सकता है. नाबार्ड का कैपिटल 30,000 करोड़ रुपए होने से सरकार के पास गांवों और ग्रामीण इलाकों में इंडस्ट्रियल डिवेलपमेंट पर खर्च करने के लिए ज्यादा रकम होगी.

नाबार्ड के दायरे में अब कुटीर उद्योग के साथ एमएसएमई (माइक्रो स्मॉल एंड मीडियम इंडस्ट्री) भी हैं. गांव में जिन किसान परिवार के बच्चे अब खेती छोड़कर सरकार से रोजगार की मांग कर रहे हैं. उन्हें शांत रखने के लिए भी नाबार्ड का फंड काम आएगा. गांवों में कुटीर उद्योगों के साथ एमएसएमई को बढ़ावा देकर सरकार उन्हें स्कील इंडिया से जोड़ने की कोशिश करेगी. सरकार इससे जुड़े उपायों का ऐलान इस साल के बजट में कर सकती है. बजट 1 फरवरी 2018 को पेश होने वाला है.

क्यों अहम है नाबार्ड संशोधन बिल 2017?

राज्यसभा में मंगलवार को यह बिल ध्वनि मत से पारित हो गया. नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डिवेलपमेंट (नाबार्ड संशोधन बिल 2017) लोकसभा में 7 अगस्त 2017 को ही पास हो चुका है. नाबार्ड खास तौर पर कृषि और ग्रामीण इलाकों में इंडस्ट्रियल डिवेलपमेंट के लिए लोन मुहैया कराता है.

खत्म हो गया हितों का टकराव?

नाबार्ड में केंद्र सरकार की  99.6 फीसदी हिस्सेदारी है. बाकी की 0.4 फीसदी हिस्सेदारी आरबीआई के पास है. यानी अभी तक अारबीआई इसका रेगुलेटर भी था और शेयर होल्डर भी. लिहाजा आरबीआई की हिस्सेदारी को लेकर हितों के टकराव की दलील लगातार दी जा रही थी.

हालांकि अब यह बिल संशोधित होने के बाद आरबीआई की पूरी हिस्सेदारी केंद्र सरकार के पास आ जाएगी. इस तरह नाबार्ड पूरी तरह सरकार के अधिन आ जाएगा. माना जा रहा है कि इस साल बजट में फाइनेंस मिनिस्टर आरबीआई की हिस्सेदारी केंद्र सरकार के पास आने का ऐलान कर सकते हैं.

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