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चालू वित्त वर्ष में बढ़ सकता है बजट घाटा, आगामी वर्षों में सुधरेगा: मूडीज

समय के साथ कर दायरा बढ़ाने के प्रयास और सरकारी खर्च की दक्षता में सुधार से घाटे को धीरे-धीरे कम करने में मदद मिलेगी

Bhasha Updated On: Nov 19, 2017 06:27 PM IST

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चालू वित्त वर्ष में बढ़ सकता है बजट घाटा, आगामी वर्षों में सुधरेगा: मूडीज

कम कर और ऊंचे सार्वजनिक खर्च की वजह से वित्त वर्ष 2017-18 में बजट घाटा बढ़ सकता है. अमेरिकी रेटिंग एजेंसी मूडीज ने यह अनुमान लगाया है. मूडीज का कहना है कि कर दायरा बढ़ने और खर्च में दक्षता से आगे चलकर इसे कम करने में मदद मिलेगी.

मूडीज इन्वेस्टर सर्विस के उपाध्यक्ष (सॉवरेन जोखिम समूह) विलियम फॉस्टर ने पीटीआई भाषा को दिए इंटरव्यू में कहा कि एजेंसी का मानना है कि राजकोषीय मजबूती को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता कायम है. लगातार बढ़ोतरी से लोन के बोझ को कम करने में मदद मिलेगी. मूडीज ने पिछले हफ्ते भारत की सॉवरेन रेटिंग 13 साल में पहली बार बढ़ाई है. मूडीज ने कहा कि आर्थिक और संस्थागत सुधारों की वजह से भारत की तरक्की की संभावनाएं सुधरी हैं.

फॉस्टर ने कहा कि रेटिंग उन्नयन से पता चलता है कि आर्थिक और संस्थागत सुधारों से भारत की बढ़ोतरी की संभावनाएं बढ़ेंगी. इससे सरकार के लोन का वित्तीय आधार स्थिर हो सकेगा. इससे मध्यम अवधि में सरकार के सामान्य कर्ज के बोझ में धीरे-धीरे कमी आएगी.

भारत का ऋण से जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) अनुपात 68.6 फीसदी है. सरकार द्वारा नियुक्त एक समिति ने 2023 तक इसे 60 फीसदी पर लाने की सिफारिश की है.

फॉस्टर ने कहा, ‘हमारा अनुमान है कि सरकार का बजट घाटा इस वित्त वर्ष में जीडीपी के 6.5 फीसदी पर रहेगा. यह इससे पिछले दो वित्त वर्षों के समान है. बजट योजना की तुलना में सरकार का राजस्व कम रहने और सरकार का खर्च कुछ अधिक रहने से बजट घाटा लक्ष्य से अधिक रह सकता है.’

उन्होंने कहा, ‘समय के साथ कर दायरा बढ़ाने के प्रयास और सरकारी खर्च की दक्षता में सुधार से घाटे को धीरे-धीरे कम करने में मदद मिलेगी’. सामान्य बजट घाटे का तात्पर्य केंद्र और राज्यों द्वारा किए जाने वाले खर्च और राजस्व का अंतर होता है.

उन्होंने कहा कि यदि बैंकिंग प्रणाली की सेहत में उल्लेखनीय गिरावट आती है तो रेटिंग के नीचे की ओर आने का दबाव पड़ सकता है.

केंद्र सरकार ने बजट 2017-18 में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 3.2 फीसदी रहने का लक्ष्य रखा है. अगले वित्त वर्ष में इसे तीन फीसदी पर लाने का लक्ष्य है.

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