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बचत खातों में निवेश नहीं रहा फायदेमंद, बुजुर्गों को आर्थिक सुरक्षा दे सरकार

सरकार को चाहिए कि वह वरिष्ठ नागरिकों के लिए निवेश पर जोखिम कम करने की दिशा में कदम उठाए, उनके लिए बचत की आकर्षक योजनाएं लेकर आए

Updated On: Jan 06, 2018 02:30 PM IST

Milind Deora Milind Deora

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बचत खातों में निवेश नहीं रहा फायदेमंद, बुजुर्गों को आर्थिक सुरक्षा दे सरकार
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भारत में ब्याज दरों में लगातार कमी के रुझान हैं. किसी व्यक्ति को कितनी रकम अपने पास रखनी चाहिए और कितनी पब्लिक इक्विटी, डेट, रियल इस्टेट जैसी संपदाओं में, फिर प्राइवेट इक्विटी जैसे ज्यादा जोखिम वाले विकल्पों में निवेश करनी चाहिए, यह मुख्य रूप से दो चीजों पर निर्भर है. एक तो इस बात पर कि निवेश करने वाला महीने की अपनी कितनी आमदनी निवेश के मद में निकाल सकता है और दूसरे इस पर कि निवेशक की उम्र कितनी है.

मुझे लगता है, कम उम्र के निवेशकों को पब्लिक इक्विटिज में ज्यादा निवेश करना चाहिए क्योंकि अगर कोई कम उम्र में स्टॉक मार्केट में रकम लगाता है और उसे दस-पंद्रह सालों तक इस रकम की जरूरत नहीं पड़ती तो फिर निवेश की गई इस रकम पर जो रिटर्न्स उसे मिलेगा वह निवेश के बाकी सारे विकल्पों के हासिल से ज्यादा होगा. भारत जैसे देश में जहां कानून का राज है, आबादी के रुझान सकारात्मक हैं और ग्रोथ-रेट(वृद्धि दर) भी तुलनात्मक रुप से ज्यादा है—ऐसा होने की संभावना अधिक है.

बहरहाल, आपकी उम्र ज्यादा है तो फिर आप निवेश पर रिटर्न्स हासिल करने के लिए ज्यादा वक्त नहीं दे सकते. ऐसे में आपको इक्विटी से ज्यादा डेट पर निवेश करना चाहिए. डेट पर निवेश से मिलने वाले रिटर्न्स इक्विटी के हासिल से कहीं ज्यादा सुरक्षित होते हैं और कितना रिटर्न मिलेगा यह भी एक हद तक अनुमान लगाया जा सकता है.

फिक्स्ड डिपॉजिट पर नहीं हो रही कमाई

भारत में लंबे समय तक ब्याज दर ऊंची रही सो कम उम्र के लोगों के लिए भी डेट में निवेश करना एक आकर्षक विकल्प बना रहा. यह स्थिति जापान और अमेरिका से एकदम अलग है. जापान में ब्याज दर ऋणात्मक (निगेटिव) है जबकि अमेरिका में फेडरल फंड रेट (उधारी पर ब्याज दर) फिलहाल 1.5 प्रतिशत है. लेकिन भारत भी अब एक ऐसे मुकाम पर पहुंच चुका है जब ब्याज दरों में गिरावट आ रही है.

बेशक हालात आर्थिक वृद्धि, निवेश और रोजगार सृजन के अनुकूल हैं, सो किसी व्यक्ति या कंपनी के लिए ऐसे हालात में कर्ज लेना आकर्षक बना हुआ है लेकिन निवेश के विकल्प के तौर पर डेट अपना आकर्षण खोता जा रहा है. फिक्स्ड डिपॉजिट पर अभी रिटर्न 5.5 प्रतिशत से 7 प्रतिशत के बीच है और इस दर से मिलने वाले रिटर्न पर भी मुद्रास्फीति का ग्रहण मंडराते रहता है.

bankaccount

फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दर कम होने के कारण लोगों को अब इससे सालाना कमाई नहीं हो पा रही जबकि उनकी जमापूंजी मुद्रास्फीति के हिसाब से अपनी कीमत जरूर खो रही है. इस कारण निवेशक ज्यादा रिटर्न्स कमाने के लिए इक्विटी की तरफ मुड़ रहे हैं. इक्विटी मार्केट में तेजी इस वजह से नहीं कि अर्थव्यवस्था की बुनियादी चीजें बड़ी बेहतर स्थिति में हैं या फिर कंपनियों की कमाई तेजी से बढ़ी है बल्कि इक्विटी बाजार की उठान के पीछे नकदी की बहुतायत के कारण मांग में आयी तेजी है.

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दक्षिण मुंबई ब्रोकर (दलाल) समुदाय की आर्थिक गतिविधियों का मुख्य केंद्र है, भारत की ज्यादातर लिस्टेड कंपनियों के मुख्यालय यहीं हैं और ऐसी जगह का निवासी होने के नाते मैं तो यही कहूंगा कि आमदनी चाहे जितनी हो लेकिन इक्विटी मे निवेश कम उम्र के निवेशकों के लिए बहुत फायदेमंद है. मैं यह भी मानता हूं कि पेंशन फंड को पब्लिक इक्विटिज में निवेश के लिए ज्यादा से ज्यादा प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए. स्टॉक मार्केट और पब्लिक इक्विटिज में लंबी अवधि के खुदरा या संस्थागत निवेश जितने ज्यादा बढ़ेंगे, मार्केट उतना ही ज्यादा बढेगा और उसमें स्थिरता आयेगी. ऐसे में बिल्कुल मुंहमांगे अंदाज में रिटर्न्स मिलने की संभावना रहेगी.

गैलअप के एक सर्वेक्षण के मुताबिक अमेरिका में 50 फीसद से ज्यादा (कुल 52 प्रतिशत) नागरिक स्टॉक मार्केट में निवेश करते हैं. भारत में यह तस्वीर एकदम ही अलग है. बीएसई के डेटा के विश्लेषण के आधार पर यह तथ्य सामने आया है कि स्टॉक मार्केट में निवेश करने वाले की तादाद 7 प्रतिशत से 13 प्रतिशत के बीच रहती है. वैसे तो हर किस्म के निवेश में जोखिम रहता है लेकिन इक्विटी में निवेश करने का मतलब यह नहीं कि आप जुआ खेल रहे हैं. इक्विटी पर बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना है.

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वरिष्ठ नागरिकों के लिए निवेश पर जोखिम कम करे सरकार

सरकार को चाहिए कि वह कम उम्र के लोगों को म्युचुअल फंड के जरिए पब्लिक इक्विटी में निवेश के लिए बढ़ावा दे.जहां तक पेंशन की रकम का सवाल है, भारत में इसका महज 5 प्रतिशत हिस्सा स्टॉक मार्केट में लगता है जबकि कनाडा में पेंशन का ज्यादातर धन पब्लिक इक्विटी में निवेश किया जाता है. बहरहाल, वरिष्ठ नागरिकों के लिए मामला थोड़ा अलग है. फिलहाल वरिष्ठ नागरिकों को अपना निवेश पब्लिक इक्विटी में लगाने के लिए एक तरह से धकेला जा रहा है जबकि पब्लिक इक्विटी में निवेश एक हद तक जोखिम भरा है.

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सरकार को चाहिए कि वह वरिष्ठ नागरिकों के लिए निवेश पर जोखिम कम करने की दिशा में कदम उठाए, उनके लिए बचत की आकर्षक योजनाएं लेकर आए. साल 2004 में यूपीए सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष बचत योजना चलायी. देश भर में पोस्ट-ऑफिस तथा सरकारी बैंकों के मार्फत फराहम की जाने वाली इस योदना में जमापूंजी पर सालाना 9 फीसद की ब्याज दर थी. उस वक्त यह निवेश के समान विकल्पों में हासिल रिटर्न्स से ज्यादा था. बचत की इस योजना से वरिष्ठ नागरिकों के लिए बिना जोखिम के निवेश का रास्ता खुला और उन्हें इक्विटी में रकम लगाने की मजबूरी ना रही.

फिलहाल ब्याज दर कम है और ऐसे वक्त में वरिष्ठ नागरिकों के लिए गारंटीशुदा और निश्चित रिटर्न्स देने वाली ऐसी कोई बचत योजना नहीं जिसका तुलना 2004 के यूपीए वाली बचत योजना से की जा सके. दरअसल, वरिष्ठ नागरिकों के बचत की हिफाजत करना सरकार की नैतिक जिम्मेवारी बनती है. खैर, हम यह तो उम्मीद पाल ही सकते हैं कि फरवरी महीने में आ रहे बजट-प्रस्ताव में सरकार इस मसले पर खास ध्यान देगी.

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