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3 बैंकों का विलय क्या अपने साथ चुनौतियां भी ला रहा है!

बैंक ऑफ बड़ौदा तेजी से आगे बढ़ रहा था क्योंकि सरकार ने तीन साल पहले कई हाई प्रोफाइल लोगों को इस बात का जिम्मा दिया था कि कुछ भी करके इस बैंक का कायाकल्प करें

Updated On: Sep 18, 2018 09:13 PM IST

FP Staff

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3 बैंकों का विलय क्या अपने साथ चुनौतियां भी ला रहा है!

सरकार ने ऐलान किया है कि देश के तीन बड़े बैंकों का विलय होगा. यह तीन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, देना बैंक और विजया बैंक होंगे. इसके साथ ही देश का सबसे बड़ा बैंक अस्तित्व में आएगा. इस मामले पर वित्त मंत्री अरुण जेटली का कहना है कि विलय होने से बैंकिंग व्यवस्था मजबूत होगी और उनकी कर्ज देने की क्षमता भी बढ़ जाएगी. यह निर्णय बैंकों की कर्ज देने की ताकत और आर्थिक वृद्धियों को गति देने के सरकार के प्रयासों का हिस्सा है. भले ही सरकार कह रही हो कि ऐसा करने से कई समस्याओं का समाधान हो जाएगा लेकिन इस राह में चुनौतियां भी कम नहीं हैं.

बैंक ऑफ बड़ौदा तेजी से आगे बढ़ रहा था क्योंकि सरकार ने तीन साल पहले कई हाई प्रोफाइल लोगों को इस बात का जिम्मा दिया था कि कुछ भी करके इस बैंक का कायाकल्प करें. लेकिन अचानक आए विलय के फैसले से उन लोगों की मेहनत पर कुछ असर जरूर पड़ेगा जो इन बीते सालों में इस बैंक के विकास के लिए मेहनत कर रहे थे.

जेटली का कहना है कि तीन बैंकों के विलय होने से देश का सबसे बड़ा बैंक अस्तित्व में आएगा. वहीं अगर आंकड़ों की बात करें तो यह बैंक एसबीआई के बाद दूसरा सबसे बड़ा बैंक होगा. जिसका बहीखाता 10 लाख करोड़ रुपए का होगा. जबकि मार्च 2017 में एसबीआई की बैलेंस सीट 10 लाख करोड़ रुपए की थी. इसका मतलब है कि इस बड़े बैंक के आने से सबसे बड़ी चुनौती बड़े आकार की बैंकिंग व्यवस्था को संभालना होगा.

तीनों बैंकों के विलय होने से एक ही शहर में कई ब्रांच होने की स्थिति भी सामने आ सकती है, बैंक ऑफ बड़ौदा की ब्रांच लगभग हर जगह मिल ही जाती हैं लेकिन बाकी दोनों बैंक इतनी आसानी से थोड़ी ही दूरी पर उपलब्ध नहीं होते. तो एक चुनौती यह है कि बैंक ब्रांचों का दोहराव हो सकता है. देना बैंक की हालत पहले से ही बहुत अच्छी नहीं है, गिरता हुआ लाभ उसकी सबसे बड़ी चुनौती है.

तीनों बैंकों के साथ आने से उनके टेक्नालॉजी सिस्टम पर भी असर पड़ेगा. क्योंकि तीनों ही बैंकों को मिलाने पर इंटीग्रेशन की समस्या का सामना करना पड़ सकता है. कई महीनों की मेहनत के बाद बैंक ऑफ बड़ौदा में 'फिनाकल 10' का प्रयोग होने लगा था लेकिन तीनों बैंकों को इसी बैंकिंग सिस्टम में समेटना बड़ी चुनौती होगी.

विलय के बाद सबसे बड़ी समस्या कर्मचारियों के निर्धारण की होगी. तीनों ही बैंक में सीनियर पदों पर काफी लोग हैं. इसके अलावा बाहर से भी कई प्रोफेशनल्स की नियुक्ति की गई है. तीनों बैंकों के लिए एक अलग सिस्टम विकसित किया जा सकता है और इस सिस्टम में पुराने लोगों को ढालना एक बड़ी चुनौती है.

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