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मेहुल चोकसी के एंटीगा की नागरिकता खरीदने के बाद, अमीर भारतीयों में विदेशी नागरिकता खरीदने की होड़

ब्रिटेन स्थित कुछ कंपनियां जो विदेशी नागरिकता संबंधी व्यवस्थाएं कराती है, उन्होंने दावा किया कि बीते एक सालों में भारतीयों की तरफ से विदेशी नागरिकता संबंधित जानकारी लेने वालों की संख्या तकरीबन दोगुनी से अधिक हो गई हैं

Updated On: Dec 09, 2018 02:11 PM IST

FP Staff

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मेहुल चोकसी के एंटीगा की नागरिकता खरीदने के बाद, अमीर भारतीयों में विदेशी नागरिकता खरीदने की होड़

विदेशी नागरिकता खरीदने में अमीर रूसी और चीनी लोग हाल के वर्षों में सबसे आगे रहे हैं, लेकिन जब से पंजाब नेशनल बैंक घोटाले में शामिल आरोपी अरबपति आभूषण कारोबारी मेहुल चोकसी ने कैरेबियाई देश एंटीगा की नागरिकता खरीदी है, तब से अमीर भारतीयों की दूसरे देशों की नागरिकता खरीदने में रुचि बढ़ गई है. यह लोग इन्वेस्टमेंट के साथ नागरिकता के ऑफर देने वाले स्कीमों पर ज्यादा ध्यान देने लगे हैं.

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर अनुसार ब्रिटेन स्थित कुछ कंपनियां जो विदेशी नागरिकता संबंधी व्यवस्थाएं कराती है, उन्होंने दावा किया कि बीते एक सालों में भारतीयों की तरफ से विदेशी नागरिकता संबंधित जानकारी लेने वालों की संख्या तकरीबन दोगुनी से अधिक हो गई है. विदेशी नागरिकता संबंधित सुझाव के साथ ही रेजिडेंस-बाइ-इन्वेस्टमेंट प्रोग्राम चलाने वाली जर्सी स्थित कंपनी 'हेनली ऐंड पार्टनर्स' के मुताबिक हाल के वर्षों में ऐसी जानकारी लेने वाले भारतीयों के मामलों में 320 फीसदी इजाफा हुआ है.

लेकिन भारतीय विदेशी नागरिकता लेने में इतनी दिलचस्पी क्यों दिखा रहे हैं? इस पर हेनली ऐंड पार्टनर्स का मानना है कि जिस तरह चीन या रूस के लोग अच्छी लाइफस्टाइल,शिक्षा, ट्रांसपोर्ट, स्वच्छ हवा और हेल्थकेयर के लिए विदेशी नागरिकता लेते हैं, उसी तरह भारतीय भी इन चीजों के लिए विदेश का रुख करना चाहते हैं.

पंजाब नेशनल बैंक का घोटाला इसी साल फरवरी में सामने आया था

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भारतीयों को नहीं है दोहरी नागरिकता रखने की अनुमति

कई भारतीयों के लिए दूसरी नागरिकता प्लान बी के जैसी है. इनमें से 80-90 फीसदी क्लाइंट अपना मूल घर नहीं छोड़ते लेकिन उनके पास दूसरी नागरिकता या दूसरा रेजिडेंस तैयार रहता है. जैसे कि अगर आप आपको पुर्तगाल का गोल्डन वीजा चाहिए तो इसके लिए आपको साल में महज सात दिन वहां बिताने होंगे. लेकिन मुश्किल यह भी है कि भारतीयों को दोहरी नागरिकता रखने की अनुमति नहीं है. ऐसे में भारतीयों को दोहरी नागरिकता रखने की अनुमति नहीं है, इसलिए कई भारतीय रेजिडेंस-बाइ-इन्वेस्टमेंट का रास्ता चुनते हैं.

ग्लोबल वेल्थ माइग्रेशन रिव्यू के अनुसार 2017 में 7000 अमीर भारतीय देश छोड़कर चले गए. हालांकि अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा इनकी पहली पसंद होती है, लेकिन 30-40 ऐसे देश भी हैं जहां भारतीय जो भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए अपने दरवाजे खोलते हैं. चोकसी के एंटीगा जाने के बाद भारतीयों के बीच इन देशों की मांग बढ़ गई है.

वीदर्स ग्लोबल अडवाइजर्स के सीईओ रियाज जाफरी ने बताया है कि दूसरे देश के अमीर नागरिकों की तरह भारतीय नागरिक भी निजी,आर्थिक, राजनैतिक और कमर्शियल रिस्क से निपटने की कोशिश कर रहे हैं. पुराने समय में आप अपनी संपत्ति छिपा सकते थे, लेकिन अब यह करना मुश्किल हो गया है. इसके लिए अब ऐसी जगहों की तलाश हो रही है जहां कानून-व्यवस्था स्थिर हो और वित्तीय व्यवस्था बेहतर. जाफरी के अनुसार सेकंड पासपोर्ट राजनीति प्रेरित टैक्स कार्रवाइयों से भी बचाता है.

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