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मास्टरकार्ड विदेशी सर्वर का डेटा डिलीट करेगा लेकिन क्या है मुश्किल?

मास्टरकार्ड को आशंका है कि पुराने डेटा डिलीट करने से ट्रांजैक्शन संबंधी विवाद हो सकते हैं

Updated On: Dec 16, 2018 05:30 PM IST

FP Staff

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मास्टरकार्ड विदेशी सर्वर का डेटा डिलीट करेगा लेकिन क्या है मुश्किल?

विदेश के सर्वर में भारतीयों का डाटा सेव करने को लेकर लंबे समय से बहस चली आ रही है. माना जा रहा है कि इससे डाटा सिक्योरिटी का खतरा है. क्रेडिट कार्ड कंपनियों को लंबे समय से कहा जा रहा है कि विदेश सर्वर में स्टोर भारतीय नागरिकों की डिटेल को डिलीट करें. अब इस मामले में ग्लोबल कार्ड पेमेंट कंपनी 'मास्टरकार्ड' ने RBI से कहा है कि वह इन डाटा को डिलीट करना शुरू करने वाली है.

क्या है मुश्किल?

मास्टरकार्ड का कहना है कि वह डाटा डिलीट तो कर देगी लेकिन इससे कार्ड की सिक्योरिटी घटेगी. मास्टरकार्ड इंडिया के डिवीजन अध्यक्ष (साउथ एशिया) पोरुश सिंह ने कहा, 'कंपनी 200 देशों में काम कती है, लेकिन भारत के सिवा और दूसरे किसी देश ने ग्लोबल सर्वर से डेटा डिलीट करने के लिए नहीं कहा.'

RBI ने अप्रैल में एक नया कानून बनाया था. इसे 16 अक्टूबर से ही लागू कर दिया गया. आरबीआई के नए कानून के अनुसार पेमेंट कंपनियों को भारत में होने वाले सभी ट्रांजैक्शन खासकर कंप्यूटर के जरिए होने वाले सभी लेनदेन की जानकारी भारत के ही किसी सर्वर में स्टोर करनी थी. इस पर मास्टरकार्ड ने कहा है कि उसने 6 अक्टूबर से ही भारतीयों से लेन-देन के डेटा पुणे के टेक्नोलॉजी सेंटर में स्टोर करना शुरू कर दिया था.

डेटा डिलीट करने पर क्या होगा?

मास्टरकार्ड ने कहा कि हमने अपने प्रस्ताव में कहा है कि हम इसे हर जगह से (डेटा) हटा देंगे, चाहे वह कार्ड नंबर हो या लेनदेन की डिटेल. डेटा केवल भारत में ही स्टोर किया जाएगा.

मास्टरकार्ड ने कहा, डाटा डिलीट करने के कई साइड इफेक्ट्स हैं. इसके बारे में हमने RBI से चर्चा की है. मास्टरकार्ड को आशंका है कि पुराने डेटा डिलीट करने से ट्रांजैक्शन संबंधी विवाद हो सकते हैं क्योंकि पीछे का कोई ब्योरा नहीं है.

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