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होमोसेक्सुअल कर्मचारियों के पार्टनर्स को हेल्थ केयर देगा ये बैंक

बैंक की यह नई नीति नए वित्त वर्ष यानी 1 अप्रैल से लागू होगी. इस मेडिकल कवर पर आने वाले खर्च बैंक अपने मुनाफे और घाटे वाले अकाउंट से भरेगा

Updated On: Mar 27, 2018 02:47 PM IST

FP Staff

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होमोसेक्सुअल कर्मचारियों के पार्टनर्स को हेल्थ केयर देगा ये बैंक

रॉयल बैंक ऑफ स्कॉटलैंड (आरबीएस) ने अपने भारत स्थित इकाइयों में कर्मचारियों के सेम सेक्स पार्टनर को भी मेडिकल कवर (स्वास्थ्य बीमा) देने का निर्णय लिया है.

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के अनुसार बैंक की यह नई नीति नए वित्त वर्ष यानी 1 अप्रैल से लागू होगी. इस मेडिकल कवर पर आने वाले खर्च को बैंक अपने मुनाफे और घाटे वाले अकाउंट से भरेगा.

सेम सेक्स पार्टनर का मतलब है कि यदि कोई कर्मचारी गे या लेस्ब‍ियन है तो वह अपनी कंपनी द्वारा दिए जाने वाले मेडिकल केयर के लाभकर्ता के रूप में अपने पार्टनर को भी शामिल कर सकता है. माना जा रहा है कि बैंक के इस कदम का फायदा एलजीबीटी समुदाय जिसके तहत लेस्बियन, गे, बाइसेक्सुअल और ट्रांसजेंडर आते हैं उन्हें भी मिलेगा.

देश में अभी सभी कार्यालयों में केवल अपोजिट सेक्स के लोगों को मेडिकल इंश्योरेंस दिया जाता है. इसमें कर्मचारी की पत्नी या पति, उसके बच्चे, माता-पिता शामिल हैं.

आरबीएस अपने कर्मचारियों को यह सुविधा देने वाला देश का पहला बैंक होगा. इस लिहाज से बैंक के इस कदम को साहसिक कहा जा सकता है. क्योंकि भारत में समलैंगिकता को आईपीसी की धारा 377 के तहत अपराध माना जाता है. हालांकि उसके लिए इस परिस्थिति में इस नियम को लागू करवाना चुनौतीपूर्ण होगा.

देश का कानून और संविधान सेम सेक्स की शादियों को मान्यता या मंजूरी नहीं देता है. वर्ष 2013 में सुप्रीम कोर्ट के दिए निर्देश में पति-पत्नी के लाभों को अपोजिट सेक्स तक ही सीमित कर दिया गया था.

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