S M L

फॉर्म 16 के बगैर ऐसे इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करें

अगर आपके पास फॉर्म 16 नहीं है तो कुछ कैलकुलेशन करके आप खुद ही अपने टैक्सेबल इनकम का पता लगा सकते हैं और आईटीआर फाइल कर सकते हैं

Updated On: May 29, 2018 08:25 AM IST

Pratima Sharma Pratima Sharma
सीनियर न्यूज एडिटर, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

0
फॉर्म 16 के बगैर ऐसे इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करें

इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के लिए आपको फॉर्म 16 की जरूरत होती है. लेकिन अगर आपके पास फॉर्म 16 ना हो तो आप कैसे रिटर्न फाइल करेंगे? अगर आप भी इस मुश्किल में हैं तो आपका काम आसान हो सकता है. आपके पास अगर फॉर्म 16 नहीं है तो भी आप इनकम टैक्स रिटर्न फाइल कर सकते हैं.

क्या है फॉर्म 16?

फॉर्म 16 टीडीएस सर्टिफिकेट होता है, जिसमें टैक्सेबल इनकम और टीडीएस की जानकारी होती है. अगर आपके पास फॉर्म 16 नहीं है तो आप खुद टैक्सेबल इनकम कैलकुलेट करके आईटीआर फाइल कर सकते हैं.

टैक्सेबल इनकम कैलकुलेट करें

सबसे पहले एक फाइनेंशियल ईयर की सैलरी स्लिप से नेट सैलरी जोड़ लें. अगर एक फाइनेंशियल ईयर में आप एक या दो नौकरी बदलते हैं तो वे सभी पेस्लिप से टैक्सेबल इनकम जोड़ लें.

कैसे जानें कितना टैक्स चुकाना है?

एक फाइनेंशियल ईयर में कंपनी ने कितना टीडीएस काटा, यह सैलरी स्लिप से कैलकुलेट कर लें. आप टैक्स की इस रकम को फॉर्म 26AS से मिला सकते हैं. अगर सैलरी स्लिप के हिसाब से जोड़ा गया टैक्स फॉर्म 26AS से नहीं मिलता है तो आप इस बात का जानकारी अपनी कंपनी को दे सकते हैं. कंपनी 26AS फॉर्म में बदलाव कर सकती है.

किराए पर हैं तो HRA मिस ना करें

कई कंपनियां सैलरी में ही हाउस रेंट अलाउंस भी शामिल करती हैं. एचआरए डिडक्शन क्लेम करने के लिए एडवांस में रेंट रसीद जमा करना चाहिए. अगर आप ऐसा नहीं करेंगे तो एचआरए डिडक्शन का फायदा नहीं मिलेगा.

अपने डिडक्शन का हिसाब रखें

टैक्सेबल इनकम जानने के लिए यह जरूरी है कि आप अपने टैक्स बचाने वाले इनवेस्टमेंट का हिसाब रखें. मसलन, 80C के तहत लाइफ इंश्योरेंस, एंप्लॉयी प्रोविडेंट फंड, पब्लिक प्रोविडेंट फंड जैसे निवेश आते हैं. 80C के तहत अभी 1.50 लाख लाख रुपए के निवेश पर टैक्स छूट मिलती है. वहीं, 80D के तहत मेडिकल इंश्योरेंस के प्रीमियम, 80E के तहत एजुकेशन लोन के ब्याज पर छूट मिलती है.

आमदनी का कोई और जरिया?

नौकरी के अलावा अगर आपकी आमदनी का कोई और जरिया है तो उसे टैक्सेबल इनकम में शामिल करना ना भूलें. किराए या एफडी से होने वाली आमदनी आपके टैक्सेबल इनकम में शामिल होगी.

टैक्स रिटर्न फाइल करें

टैक्स डिडक्शन का हिसाब लगाकर उसे टैक्सेबल इनकम से घटा लें. अब जो इनकम बची उस हिसाब से आप इनकम टैक्स रिटर्न फाइल कर सकते हैं.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
Jab We Sat: ग्राउंड '0' से Rahul Kanwar की रिपोर्ट

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi