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कर्नाटक चुनाव के नतीजों का शेयर बाजार पर क्या पड़ेगा असर?

कर्नाटक में त्रिशंकु विधानसभा आती है तो शेयर बाजार में अनिश्चितता आ सकती है. अगर कर्नाटक में बीजेपी जीतती है तो इससे केंद्र में सरकार के रूप में उसकी वापसी की उम्मीदें बनेंगी जिससे बाजार में तेजी आ सकती है

FP Staff Updated On: May 12, 2018 09:35 PM IST

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कर्नाटक चुनाव के नतीजों का शेयर बाजार पर क्या पड़ेगा असर?

शेयर बाजार की नजर अब कर्नाटक चुनाव के नतीजों पर टिकी है. कर्नाटक में वोटिंग के बाद आने वाले एक्जिट पोल का असर सोमवार को शेयर बाजार पर होगा. कर्नाटक चुनाव के नतीजे मंगलवार को आएंगे. एक्सपर्ट्स की राय अलग-अलग है. हालांकि, चुनाव के इन नतीजों का असर अगले साल होने वाले लोकसभा के चुनाव पर भी होगा. आइए जानते हैं कर्नाटक चुनाव को लेकर क्या सोचते है शेयर बाजार के बड़े जानकार...

सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर आलोक जोशी और सीनियर एडिटर नीरज वाजपेई का मानना है कि कर्नाटक के चौंकाने वाले नतीजे आ सकते हैं. दरअसल कर्नाटक चुनाव में जबरदस्त ध्रुवीकरण हुआ है, ऐसे में किसी एक पार्टी को पूर्ण बहुमत मिलने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है. कर्नाटक में कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है. कांग्रेस, बीजेपी और जेडीएस मुकाबले में हैं. गौरतलब है कि कर्नाटक के नतीजे 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए काफी अहम हैं.

सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर आलोक जोशी और सीनियर एडिटर नीरज वाजपेई का मानना है कि कि कर्नाटक के चौंकाने वाले नतीजे आ सकते हैं. दरअसल कर्नाटक चुनाव में जबरदस्त ध्रुवीकरण हुआ है, ऐसे में किसी एक पार्टी को पूर्ण बहुमत मिलने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है. कर्नाटक में कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है. कांग्रेस, बीजेपी और जेडीएस मुकाबले में हैं. गौरतलब है कि कर्नाटक के नतीजे 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए काफी अहम हैं.

सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर आलोक जोशी और सीनियर एडिटर नीरज वाजपेई का मानना है कि कि कर्नाटक के चौंकाने वाले नतीजे आ सकते हैं. दरअसल कर्नाटक चुनाव में जबरदस्त ध्रुवीकरण हुआ है, ऐसे में किसी एक पार्टी को पूर्ण बहुमत मिलने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है. कर्नाटक में कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है. कांग्रेस, बीजेपी और जेडीएस मुकाबले में हैं. गौरतलब है कि कर्नाटक के नतीजे 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए काफी अहम हैं.

कर्नाटक चुनाव में भ्रष्टाचार, कन्नड़ अस्मिता और लिंगायत-वीरशैव अहम मुद्दे रहे. कर्नाटक के वर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया इस बार 2 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं. कांग्रेस से सिद्धारमैया सीएम पद के दावेदार हैं, जबकि बीजेपी से येदुरप्पा सीएम पद के दावेदार हैं. कर्नाटक चुनाव में भ्रष्टाचार, कन्नड़ अस्मिता और लिंगायत-वीरशैव अहम मुद्दे रहे. कर्नाटक के वर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया इस बार 2 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं. कांग्रेस से सिद्धारमैया सीएम पद के दावेदार हैं, जबकि बीजेपी से येदुरप्पा सीएम पद के दावेदार हैं.

कर्नाटक चुनाव में भ्रष्टाचार, कन्नड़ अस्मिता और लिंगायत-वीरशैव अहम मुद्दे रहे. कर्नाटक के वर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया इस बार 2 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं. कांग्रेस से सिद्धारमैया सीएम पद के दावेदार हैं, जबकि बीजेपी से येदुरप्पा सीएम पद के दावेदार हैं.

शेयर बाजार के एक्सपर्ट्स इस चुनाव के नतीजे पर बारीक नजर रखे हुए हैं. उनका मानना है कि यह अगले साल के लोक सभा चुनाव के हिसाब से जनता के मूड को परखने वाले नतीजे हो सकते हैं. अर्थव्यवस्था के हिसाब से कर्नाटक देश का चौथा सबसे बड़ा राज्य है. यहां साक्षरता दर 75 फीसदी है. देश की कुल बायो टेक कंपनियों का 28 फीसदी कर्नाटक में है. देश से सामान एवं सेवाओं के कुल निर्यात में इस राज्य की हिस्सेदारी 12.7 फीसदी है. यह देश में स्टार्ट अप का जन्म स्थान भी कहा जाता है. शेयर बाजार के एक्सपर्ट्स इस चुनाव के नतीजे पर बारीक नजर रखे हुए हैं. उनका मानना है कि यह अगले साल के लोक सभा चुनाव के हिसाब से जनता के मूड को परखने वाले नतीजे हो सकते हैं.

अर्थव्यवस्था के हिसाब से कर्नाटक देश का चौथा सबसे बड़ा राज्य है. यहां साक्षरता दर 75 फीसदी है. देश की कुल बायो टेक कंपनियों का 28 फीसदी कर्नाटक में है. देश से सामान एवं सेवाओं के कुल निर्यात में इस राज्य की हिस्सेदारी 12.7 फीसदी है. यह देश में स्टार्ट अप का जन्म स्थान भी कहा जाता है. शेयर बाजार के एक्सपर्ट्स इस चुनाव के नतीजे पर बारीक नजर रखे हुए हैं. उनका मानना है कि यह अगले साल के लोक सभा चुनाव के हिसाब से जनता के मूड को परखने वाले नतीजे हो सकते हैं. अर्थव्यवस्था के हिसाब से कर्नाटक देश का चौथा सबसे बड़ा राज्य है. यहां साक्षरता दर 75 फीसदी है. देश की कुल बायो टेक कंपनियों का 28 फीसदी कर्नाटक में है. देश से सामान एवं सेवाओं के कुल निर्यात में इस राज्य की हिस्सेदारी 12.7 फीसदी है. यह देश में स्टार्ट अप का जन्म स्थान भी कहा जाता है.

कोटक म्यूचुअल फंड के पंकज टिबरवाल कहते है कि पिछले कुछ महीने से बाजार राज्यों के विधानसभा चुनाव को नजरंदाज कर रहा था. अब हमारे सामने ताबड़तोड़ कई चुनाव हैं. कर्नाटक के बाद राजस्थान, मध्य प्रदेश और छतीसगढ़ के बाद देश में लोक सभा चुनाव भी होने वाले हैं. बीजेपी के चुनाव हारने की स्थिति में शेयर बाजार गिरावट दिखा सकते है. कोटक म्यूचुअल फंड के पंकज टिबरवाल कहते है कि पिछले कुछ महीने से बाजार राज्यों के विधानसभा चुनाव को नजरंदाज कर रहा था. अब हमारे सामने ताबड़तोड़ कई चुनाव हैं. कर्नाटक के बाद राजस्थान, मध्य प्रदेश और छतीसगढ़ के बाद देश में लोक सभा चुनाव भी होने वाले हैं. बीजेपी के चुनाव हारने की स्थिति में शेयर बाजार गिरावट दिखा सकते है.

कोटक म्यूचुअल फंड के पंकज टिबरवाल कहते है कि पिछले कुछ महीने से बाजार राज्यों के विधानसभा चुनाव को नजरंदाज कर रहा था. अब हमारे सामने ताबड़तोड़ कई चुनाव हैं. कर्नाटक के बाद राजस्थान, मध्य प्रदेश और छतीसगढ़ के बाद देश में लोक सभा चुनाव भी होने वाले हैं. बीजेपी के चुनाव हारने की स्थिति में शेयर बाजार गिरावट दिखा सकते है.

अगर कर्नाटक में त्रिशंकु विधानसभा आती है तो शेयर बाजार में अनिश्चितता आ सकती है. अगर कर्नाटक में बीजेपी जीतती है तो इससे केंद्र में सरकार के रूप में उसकी वापसी की उम्मीदें बनेंगी जिससे बाजार में तेजी आ सकती है. CIMB सिक्योरिटीज के एमडी एवं कंट्री हेड देवेश कुमार ने कहा, जब साल 2004 में वाजपेयी जी की सरकार चुनाव हारी थी तो बाजार में बहुत जल्द रिकवरी हुई थी. शेयर बाजार वास्तव में राजनीतिक बदलाव के असर को देखकर प्रतिक्रिया व्यक्त करता है.

अगर कर्नाटक में त्रिशंकु विधानसभा आती है तो शेयर बाजार में अनिश्चितता आ सकती है. अगर कर्नाटक में बीजेपी जीतती है तो इससे केंद्र में सरकार के रूप में उसकी वापसी की उम्मीदें बनेंगी जिससे बाजार में तेजी आ सकती है. CIMB सिक्योरिटीज के एमडी एवं कंट्री हेड देवेश कुमार ने कहा, जब साल 2004 में वाजपेयी जी की सरकार चुनाव हारी थी तो बाजार में बहुत जल्द रिकवरी हुई थी. शेयर बाजार वास्तव में राजनीतिक बदलाव के असर को देखकर प्रतिक्रिया व्यक्त करता है.

अगर कर्नाटक में त्रिशंकु विधानसभा आती है तो शेयर बाजार में अनिश्चितता आ सकती है. अगर कर्नाटक में बीजेपी जीतती है तो इससे केंद्र में सरकार के रूप में उसकी वापसी की उम्मीदें बनेंगी जिससे बाजार में तेजी आ सकती है. CIMB सिक्योरिटीज के एमडी एवं कंट्री हेड देवेश कुमार ने कहा, जब साल 2004 में वाजपेयी जी की सरकार चुनाव हारी थी तो बाजार में बहुत जल्द रिकवरी हुई थी. शेयर बाजार वास्तव में राजनीतिक बदलाव के असर को देखकर प्रतिक्रिया व्यक्त करता है.

उनका मानना है कि कर्नाटक के नतीजे आम चुनाव के नतीजों का छोटा रूप हो सकते हैं. यह GST, नोटबंदी या बैंकिंग क्षेत्र पर सरकार के कामकाज पर लोगों की प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा सकता है. उनका मानना है कि कर्नाटक के नतीजे आम चुनाव के नतीजों का छोटा रूप हो सकते हैं. यह GST, नोटबंदी या बैंकिंग क्षेत्र पर सरकार के कामकाज पर लोगों की प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा सकता है.

उनका मानना है कि कर्नाटक के नतीजे आम चुनाव के नतीजों का छोटा रूप हो सकते हैं. यह GST, नोटबंदी या बैंकिंग क्षेत्र पर सरकार के कामकाज पर लोगों की प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा सकता है.

एंजेल ब्रोकिंग के मयूरेश जोशी ने कहा, नए ट्रिगर के आने तक बाजार एक निश्चित दायरे में ही रह सकता है.कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के संजीव प्रसाद ने कहा, '15 मई को आने वाले नतीजे पर बाजार प्रतिक्रिया देगा. इस समय हालात ठीक नहीं लग रहे हैं.मार्च के GST के आंकड़े बेहतरीन रहे हैं, इस हिसाब से बाजार में कुछ स्थिरता रह सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनियों की बढ़िया कमाई और बेहतर कारोबार ही लंबी अवधि में शेयर बाजार को प्रभावित करते हैं.

एंजेल ब्रोकिंग के मयूरेश जोशी ने कहा, नए ट्रिगर के आने तक बाजार एक निश्चित दायरे में ही रह सकता है.कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के संजीव प्रसाद ने कहा, '15 मई को आने वाले नतीजे पर बाजार प्रतिक्रिया देगा. इस समय हालात ठीक नहीं लग रहे हैं.मार्च के GST के आंकड़े बेहतरीन रहे हैं, इस हिसाब से बाजार में कुछ स्थिरता रह सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनियों की बढ़िया कमाई और बेहतर कारोबार ही लंबी अवधि में शेयर बाजार को प्रभावित करते हैं.

एंजेल ब्रोकिंग के मयूरेश जोशी ने कहा, नए ट्रिगर के आने तक बाजार एक निश्चित दायरे में ही रह सकता है.कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के संजीव प्रसाद ने कहा, '15 मई को आने वाले नतीजे पर बाजार प्रतिक्रिया देगा. इस समय हालात ठीक नहीं लग रहे हैं.मार्च के GST के आंकड़े बेहतरीन रहे हैं, इस हिसाब से बाजार में कुछ स्थिरता रह सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनियों की बढ़िया कमाई और बेहतर कारोबार ही लंबी अवधि में शेयर बाजार को प्रभावित करते हैं.

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