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जेपी इंफ्रा के फ्लैट खरीददारों की याचिका पर 24 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई

जेपी इंफ्रा के खिलाफ दिवाला कानून और ऋण शोधन अक्षमता कानून प्रक्रिया चल रही है.

Updated On: Aug 23, 2017 02:13 PM IST

Bhasha

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जेपी इंफ्रा के फ्लैट खरीददारों की याचिका पर 24 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई

जेपी इंफ्राटेक में अपने सपनों का घर बुक करने वाले तमाम परेशान खरीददारों की याचिका पर कल सुनवाई करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को हामी भर दी.

इस समय दिवाला कानून (Insolvency Act) और ऋण शोधन अक्षमता कानून (Debt Reduction Incompetence Law) के तहत जेपी इंफ्राटेक के खिलाफ प्रक्रिया चल रही है.

इस कानून के तहत कोर्ट कंपनी को सहूलियत देती है कि कंपनी अपने हिसाब से वक्त लेकर लोन चुका दे. इसमें लोन को रिस्ट्रक्चर किया जाता है. इन्सॉल्वेंसी एक्ट कंपनी को आपराधिक मामलों से बचाने के लिए ही बनाया गया है. अगर कोई कंपनी खुद को दिवालिया घोषित कर देती है, तो कोई ग्राहक उसपर आपराधिक मुकदमा नहीं दर्ज कर सकता और उसे कंपनी में लगाए हुए अपने पैसे भी नहीं मिल सकते.

जेपी इंफ्राटेक के दिवालिया घोषित होने के बाद से ही ग्रुप के कस्टमर्स ने विरोध प्रदर्शन करना शुरू कर दिया है. उन्हें डर है कि अब उन्हें अपने पैसे वापस नहीं मिलेंगे. इसलिए ही सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई करने के लिए तैयार हुआ है.

24 खरीददारों ने दायर की है याचिका

चीफ जस्टिस जगदीश सिंह खेहर और जज धनन्जय वाई. चन्द्रचूड़ की बेंच ने कहा कि वह फ्लैट खरीददारों की याचिका पर सुनवाई करेगी. खरीददारों ने आरोप लगाया है कि ‘बिना गारंटी वाले देनदार’ होने के कारण उन्हें ना घर मिलेगा और ना ही मेहनत से अर्जित किया गया धन वापस मिलेगा.

बेंच के समक्ष 24 फ्लैट खरीददारों की ओर से सीनियर वकील अजीत सिन्हा ने कहा, ‘करीब 32,000 खरीददारों ने जेपी इंफ्राटेक की 27 अलग-अलग आवासीय परियोजनाओं में फ्लैट बुक किए थे और अब वे मंझधार में हैं क्योंकि फर्म के खिलाफ दिवाला कानून के तहत कार्रवाई शुरू हो गई है.’

उन्होंने कहा कि दिवाला कानून के तहत प्रक्रिया शुरू होने के बाद गारंटी वाले देनदारों के वित्तीय हितों को पहले सुरक्षित किया जाएगा, जबकि बिना गारंटी वाले देनदार होने के कारण फ्लैटों के खरीददारों को कुछ नहीं मिलेगा.

नए दिवाला कानून के प्रावधानों का हवाला देते हुए सिन्हा ने कहा कि दिवाला कानून के तहत प्रक्रिया लंबित होने के कारण फ्लैट खरीददारों के पक्ष में दिए गए उपभोक्ता अदालतों और सदर अदालतों के फैसलों को लागू नहीं किया जा सकेगा. उन्होंने दलील दी कि फ्लैट खरीददारों के हितों की रक्षा जरूरी है.

फ्लैट खरीददार चित्रा शर्मा और 23 अन्य लोगों ने बतौर खरीददार अपने अधिकारों की रक्षा के लिए यह याचिका दायर की है.

राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (National company law tribunal) ने 10 अगस्त को जेपी इंफ्राटेक को दिवालिया घोषित करने के लिए आईडीबीआई बैंक की याचिका विचारार्थ स्वीकार किए जाने के बाद सैकड़ों खरीददार मंझधार में हैं.

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