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जेपी इंफ्रा होम बायर्स को फैसले से मिली 'सुप्रीम' राहत

फैसले से आम आदमी के सपनों को फिर से पंख लगेंगे जिसकी बिल्डरों और सरकार की नीतियों ने घर खरीदने का सपना तोड़ दिया था

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Sep 04, 2017 05:19 PM IST

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जेपी इंफ्रा होम बायर्स को फैसले से मिली 'सुप्रीम' राहत

जेपी इंफ्रा में फंसे 32 हजार से अधिक निवेशकों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्‍यूनल (एनसीएलटी) में कंपनी के खिलाफ चल रही दिवालिया संबंधी कार्रवाई पर रोक लगा दिया है.

जेपी इंफ्राटेक को एनसीएलटी ने पिछले 10 अगस्त को दिवालिया घोषित कर दिया था. जेपी इंफ्रा के दिवालिया होने से फ्लैट खरीदने वाले सैकड़ों लोग बीच मझधार में फंस गए थे.

सुप्रीम कोर्ट का फैसला घर खरीदारों के लिए राहत भरा

इस मुद्दे पर फ़र्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए सुप्रीम कोर्ट की वकील कमलेश जैन कहती हैं, ‘इस फैसले से घर खरीदने वालों के लिए राहत की बात है. यह फैसला उन दूसरे बिल्डरों पर भी लागू होंगे जिनपर एनसीएलटी की गाज गिरने वाली थी. इस फैसले के बाद इन्सॉल्वेंसी प्रक्रिया शुरू होने से पहले घर खरीददारों की स्थिति साफ हो जाएगी.’

कमलेश जैन आगे कहती हैं, ‘अगर सुप्रीम कोर्ट दिवालिया वाले फैसले को बरकरार रखती तो फ्लैट खरीददार बिल्डर्स से पैसा नहीं ले सकते थे. सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद अब खरीददार अपने मकानों पर कब्जा कर सकते हैं. सरकार भी कई तरह के प्रावधान कर निवेशकों को उनका हक दिला सकती है. जिन निवेशकों का पेमेंट पूरा हो गया है और मकान भी बन कर तैयार हो गया हौ, वैसे खरीददारों को अब फ्लैट मिलने शुरू हो जाएंगे. जिनका थोड़ा-बहुत पैसा बाकी भी होगा उनका भी सेटलमेंट कर के मकान देने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी. जिन लोगों के पैसे बिल्डरों के पास है और मकान अभी नहीं बने हैं उनका भी कुछ न कुछ किया जाएगा.’

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हम आपको बता दें कि एनसीएलटी ने आईडीबीआई बैंक के 500 करोड़ रुपए से अधिक लोन नहीं चुकाने पर कंपनी को डिफॉल्‍टर घोषित किया था.

पूरे दिल्ली-एनसीआर में जेपी बिल्डर्स के लगभग 32 हजार फ्लैट हैं. 32 हजार निवेशकों के पैसे इस फैसले के बाद फंस गए थे. जेपी इंफ्राटेक के जेपी ग्रुप ने गोल्फ कोर्स बनाकर कंस्ट्रक्शन के क्षेत्र में अपनी धाक जमाई थी. मायावती के यूपी के मुख्यमंत्री रहते इस कंपनी ने नोएडा से लेकर आगरा तक अपनी धमक दिखाई थी.

फैसले के बाद आम आदमी के सपनों को फिर से पंख लगेंगे

फ़र्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए नेफोमा अध्यक्ष अन्नू खान कहते हैं, ‘सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद उन आम आदमी के सपनों को फिर से पंख लगेंगे जिसकी बिल्डरों और सरकार की नीतियों ने घर खरीदने का सपना तहस-नहस कर दिया था. हम उन दूसरे बिल्डरों के यहां निवेश करने वाले निवेशकों से भी अपील करते हैं कि वे जल्दी से कोर्ट जाएं. कोर्ट जाने से ही उनको न्याय मिलेगा.’

आपको बता दें कि नोएडा से लेकर आगरा तक यमुना एक्सप्रेस और स्पोर्टस सिटी में करोड़ों खपाने के बाद भी जेपी को जब रिटर्न नहीं मिला तो कंपनी के बुरे दिन शुरू हो गए. यमुना एक्सप्रेस-वे ने जेपी की माली स्थिति को बिगाड़ कर रख दी.

जेपी को दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया शुरू करने के बाद घर खरीदारों की उलझन तब और बढ़ गई, जब‍ आईबीबीआई ने पहले से उपलब्‍ध फॉर्म के अलावा क्‍लेम के लिए एक और फॉर्म जारी कर दिया.

नोएडा के सेक्‍टर 128 में कंपनी द्वारा बनाए जा रहे विश टाउन में ही सिर्फ 32 हजार अपार्टमेंट्स हैं. इसके अलावा भी कई सारे प्रोजेक्‍ट्स में कई हजार बायर्स फंसे हुए हैं. कुल बायर्स की संख्‍या 40 हजार से भी अधिक बताई जा रही है.

एनसीएलटी ने जेपी इन्‍फ्राटेक के लिए एक इन्‍सॉल्‍वेंसी प्रोफेशनल की नियुक्ति कर दी थी. ट्रिब्‍यूनल ने जेपी के प्रोजेक्‍ट में फ्लैट बुक कराने वाले हजारों बायर्स को अपने फ्लैट या प्‍लॉट का क्‍लेम करने के लिए 2 सप्‍ताह का समय दिया.

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जेपी ग्रुप पर लगभग 8365 करोड़ रुपए का कर्ज है

बिल्डर के जाल में फंसे खरीदारों की मांग है कि सरकार अब सीधे मामले में दखल देकर या तो उन्हें घर दिलवाए या फिर पैसे वापस करवाए. जेपी ग्रुप पर इस समय लगभग 8 हजार 365 करोड़ रुपए का कर्ज है. जिसमें सबसे ज्यादा कर्ज आईडीबीआई बैंक का है.

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला घर खरीदारों के आग्रह पर आया है. याचिका देने वाले होम बायर्स ने कोर्ट से कहा था कि जेपी के प्रोजेक्‍ट में जिन 32 हजार लोगों को फ्लैट्स का पजेशन नहीं मिला है, वे इन्‍सॉल्‍वेंसी ऑर्डर से बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं.

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