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रघुराम राजन ने ऐसा क्या किया था कि दो साल बाद भी राजीव कुमार उन्हें नहीं भूले

रघुराम राजन को आरबीआई गवर्नर का पद छोड़े दो साल होने वाले हैं फिर भी राजीव कुमार क्यों उन्हें गलत ठहरा रहे हैं

Updated On: Sep 05, 2018 09:48 AM IST

Pratima Sharma Pratima Sharma
सीनियर न्यूज एडिटर, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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रघुराम राजन ने ऐसा क्या किया था कि दो साल बाद भी राजीव कुमार उन्हें नहीं भूले
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रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने 4 सितंबर 2016 में अपना पद छोड़ा था. इसके दो महीने बाद 8 नवंबर को 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी का ऐलान किया था. दो साल बाद जब भारतीय अर्थव्यवस्था पर नोटबंदी के असर को लेकर सवाल उठने लगे तो बचाव में रघुराम राजन की नीतियों को गलत ठहराना कहां तक जायज है?

अपने कार्यकाल के दौरान भी रघुराम राजन को बीजेपी की तरफ से विरोध का सामना करना पड़ा था. बीजेपी के सांसद सुब्रह्मण्यन स्वामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दो बार लेटर लिखकर राजन का कार्यकाल पूरा होने से पहले हटाने की मांग करते रहे. स्वामी का आरोप था कि राजन ने इंटरेस्ट रेट बहुत ज्यादा बढ़ा दिया था. इतना ही नहीं, उन्होंने तब यह भी कहा कि राजन ने शिकागो यूनिवर्सिटी के ईमेल एड्रेस के जरिए 'कुछ अहम वित्तीय जानकारियां' लीक की हैं. भारत के गवर्नर बनने से पहले राजन शिकागो यूनिवर्सिटी में पढ़ाया करते थे.

रघुराम राजन पर क्यों भड़के हैं राजीव कुमार

नोटबंदी के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था में लगातार गिरावट आई है. ऐसे में नोटबंदी के असर को लेकर जब जवाब मांगा गया तो नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने साफ शब्दों में कह दिया है कि भारतीय अर्थव्यस्था की जो हालत बिगड़ी है, उसकी वजह नोटबंदी नहीं बल्कि, रघुराम राजन की नीतियां हैं. उन्होंने कहा कि 2015-16 की मार्च तिमाही से ही अर्थव्यवस्था की ग्रोथ में गिरावट आने लगी थी. कुमार ने यह भी कहा कि 2014 में जब एनडीए सरकार में आई तब एनपीए 4 लाख करोड़ रुपए था. यह 2017 के मध्य तक बढ़कर 10.5 लाख करोड़ हो गया. कुमार ने कहा कि राजन ने बैंकों को यह हिदायत दी थी कि वो इंडस्ट्री को लोन ना दे. इसका नतीजा यह हुआ कि इंडस्ट्री का पहिया थमने से अर्थव्यवस्था धीमी हो गई.

दिलचस्प है कि राजीव कुमार ने जो कहा है वह बीजेपी नेता मुरली मनोहर जोशी की अगुवाई वाली संसदीय समिति से बिल्कुल अलग है. एनपीए से जुड़े मामलों की जांच करते हुए समिति ने राजन की तारीफ की थी. समिति ने कहा था कि राजन ने जो पहल किए हैं वह एनपीए से निपटने में बेहद कारगर है. तब समिति ने एनपीए से निपटने के लिए राजन से मदद भी मांगी थी.

अब नोटबंदी के दो साल बाद ऐसा क्या हुआ कि राजीव कुमार को अचानक रघुराम राजन की याद आ गई. उन्होंने एनडीटीवी से बातचीत में भी यह कहा है कि अर्थव्यवस्था की खस्ता हालत के लिए नोटबंदी जिम्मेदार नहीं है. इसकी वजह बैंकों का बढ़ता एनपीए है. और जैसा कि ऊपर बताया गया है कि राजीव कुमार की नजर में बढ़ते एनपीए के लिए पूरी तरह जिम्मेदार रघुराम राजन हैं.

कुमार ने बताया है कि 2016 की मार्च तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था की ग्रोथ 9.2 फीसदी थी. 2016 की ही तीसरी तिमाही में यह 6.8 फीसदी पर आ गया था. इसके बाद 2017 की पहली तिमाही में यह गिरकर 5.6 फीसदी पर आ गया. लगातार 6 तिमाही तक जीडीपी में गिरावट आई है.

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