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एफडी पर गुपचुप ब्याज कमाने वालों पर बढ़ेगी आईटी की सख्ती

एफडी पर 5 लाख रुपए से ज्यादा ब्याज कमाने और टैक्स न चुकाने वालों पर रहेगी नजर

Updated On: Aug 28, 2017 04:11 PM IST

FP Staff

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एफडी पर गुपचुप ब्याज कमाने वालों पर बढ़ेगी आईटी की सख्ती

कई लोग ऐसे हैं जो अपने पैसों को निवेश करने की जगह फिक्स डिपॉजिट करना पसंद करते हैं. खासकर रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले पैसों को लोग फिक्स्ड कर देते हैं. इन एफडी पर लोगों को बहुत अधिक ब्याज मिलता है. लेकिन लोग अलग-अलग तरीकों से मिल रहे इन ब्याजों पर इनकम टैक्स नहीं देते हैं.

वे या तो रिटर्न नहीं दाखिल करते हैं या इसकी जानकारी नहीं देते हैं. इनकम टैक्स के अफसरों के रडार पर अब ये हजारों लोग हैं. पांच लाख रुपए या उससे अधिक ब्याज लेने वाले लोगों पर फिलहाल इनकम टैक्स फोकस कर रहा है.

जांच के दायरे में आएंगे कई वरिष्ठ नागरिक

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के अनुसार सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स के वरिष्ठ अफसरों के अनुसार, इस जांच के दायरे में कई वरिष्ठ नागरिक भी आएंगे, जो या तो कर योग्य आय में ब्याज को नहीं दिखाते हैं या टैक्स रिटर्न फाइल ही नहीं करते हैं.

यह कदम सरकार द्वारा टैक्स के बेस को बढ़ाने के प्रयास के तहत उठाया जा रहा है. इसमें उन पेशेवरों पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है, जो कैश में अपनी कमाई करते हैं और आलीशान जीवन शैली के बावजूद भी अपनी सही आय का खुलासा नहीं करते.

विभाग कई एजेंसियों से मिलने वाले कई आंकड़ों के जरिए उन करदाताओं की पहचान करेगा, जिनकी ब्याज से होने वाली आय उनके सालाना खातों में दिखती नहीं है या वे जानबूझकर उनका खुलासा नहीं करते हैं.

इन व्यक्तियों को पकड़ना मुश्किल है और एक सर्वे के अनुसार कुछ खास समय में डॉक्टर और अन्य प्रोफेशनल्स काफी कैश जमा कर लेते हैं. उदाहरण के लिए, अक्सर इस साल आई टी के छापों के दौरान यह देखा गया कि इस बारिश के मौसम में डॉक्टरों ने डेंगू या चिकनगुनिया के पीड़ित रोगियों से फीस के रूप में काफी मात्रा में कैश जमा किया है.

इसके विपरीत ब्याज से होने वाली आय को अधिक टिकाऊ स्रोत माना जाता है. टैक्स विभाग के अधिकारी एफडी पर टीडीएस काटने वाले बैंकों से उपलब्ध जानकारी को हासिल कर रहे हैं. सूत्रों ने बताया कि कई मामलों में 10 फीसद कर का भुगतान बैंक द्वारा स्वतः कटने वाले टीडीएस के रूप में हो जाता है, जबकि ऐसे कई व्यक्ति 30 फीसद के ब्रैकेट में आते हैं और फिर भी टैक्स का भुगतान नहीं करते हैं.

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