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इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने पर नोटिस मिले, तो ऐसे दें जवाब

31 जुलाई को इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख है

FP Staff Updated On: Jul 31, 2017 02:28 PM IST

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इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने पर नोटिस मिले, तो ऐसे दें जवाब

आयकर कानून में कुछ धाराएं हैं जिनके तहत आपको टैक्स नोटिस मिल सकता है. अगर आपको नोटिस मिले तो संबंधित सेक्शन के मुताबिक ही इसका जवाब देना चाहिए.

बताते हैं कि किस सेक्शन में कैसा नोटिस मिलता है और उसका जवाब क्या हो सकता है...

सेक्शन 139 (9) 

टैक्स रिटर्न फाइल करने में गड़बड़ी हुई तो आपको इस सेक्शन के तहत नोटिस मिलेगा. गड़बड़ियों में ये बातें शामिल हो सकती हैं...

- अगर आपने गलत आईटीआर फॉर्म का इस्तेमाल किया.

- अगर अपने पूरा टैक्स नहीं भरा है.

- अगर आपने कटे हुए टैक्स पर रिफंड तो क्लेम किया, लेकिन संबंधित इनकम की जानकारी नहीं दी.

- अगर आईटीआर फॉर्म और पैन कार्ड में नाम एक जैसा नहीं है.

- अगर आपने टैक्स तो भर दिया, लेकिन इनकम की जानकारी नहीं दी.

नोटिस भेजने की सीमा- कोई नहीं

नोटिस का जवाब देने की समय सीमा- असेसिंग अफसर की ओर से सूचना जारी किए जाने की तारीख के पंद्रहवें दिन के अंदर. आप चाहें तो लोकल असेसिंग अफसर को आवेदन देकर कुछ और समय की मांग कर सकते हैं. अगर आपने जवाब नहीं दिया तो रिटर्न अमान्य हो जाएगा.

क्या करना चाहिए?

- इनकम टैक्स फाइलिंग साइट पर जाकर संबंधित आकलन वर्ष का सही आईटीआर फॉर्म डाउनलोड करें.

- सेक्शन 139 (9) के तहत मिले नोटिस के जवाब में, जहां ऑरिजिनल रिटर्न फाइलिंग में गलती हुई है का विकल्प चुनें.

- रेफरेंस और अकनॉलेजमेंट नंबर भरें और सुधार के साथ फॉर्म भरें.

- नोटिस यू/एस 139 (9) के जवाब में ई-फाइल पर क्लिक कर नोटिस में मिले पासवर्ड का इस्तेमाल कर फॉर्म अपलोड कर दें.

income-tax-return

सेक्शन 143 (1)

यह नोटिस से ज्यादा आपकी ओर से फाइल किए गए रिटर्न का आकलन होता है. इस सेक्शन के तहत आपको तीन तरह का नोटिस मिल सकता है...

1. यह सामान्य तौर पर आपकी ओर से फाइल किए गए रिटर्न का आखिरी आकलन हो सकता है क्योंकि टैक्स अफसर के आकलन से आपका आकलन मिल गया है.

2. यह रिफंड नोटिस की तरह हो सकता है जिसमें असेसिंग अफसर की गणना के मुताबिक आपने ज्यादा टैक्स भर दिया है.

3. यह एक डिमांड नोटिस हो सकता है जिसमें असेसिंग अफसर की गणना के मुताबिक आपने कम टैक्स भरा है.

नोटिस भेजने की समय सीमा

जिस वित्त वर्ष में आपने टैक्स रिटर्न फाइल किया है, उसके एक साल के अंदर.

जवाब देने की समय सीमा

अगर टैक्स बकाया है तो आपको 30 दिन के अंदर देना होगा.

क्या करें?

अगर आपकी ओर से फाइल रिटर्न में कोई गड़बड़ी नहीं है तो आपको कुछ भी करने की जरूरत नहीं है. अगर आप रिफंड के दावेदार हैं तो आपने रिटर्न में जिस बैंक अकाउंट का जिक्र किया है, उसमें पैसे आ जाएंगे. अगर ऐसा नहीं हुआ तो आप रिफंड की मांग दोबारा कर सकते हैं. अगर टैक्स बकाया है तो आपको 30 दिन के अंदर इसे चुकाना होगा.

सेक्शन 143 (1A)

एचएंडआर ब्लॉक, इंडिया के हेड टैक्स रिसर्च चेतन चंडक ने कहा, 'हालांकि यह प्रावधान पहले से था, लेकिन इसी साल इतनी बड़ी संख्या में टैक्स पेयर्स को कंप्यूटर जेनरेटेड नोटिस भेजे जा रहे हैं.' दरअसल, यह आपके उस प्रस्ताव पर सवाल-जवाब की प्रक्रिया मात्र है जिसमें आपने अलग-अलग नियमों तहत टैक्स छूट की मांग की है.

इस सेक्शन के तहत तब नोटिस मिल सकता है जब...

- आपकी ओर से फाइल रिटर्न में आय की जानकारी और फॉर्म 16 में दर्ज इनकम की रकम में अंतर हो.

- आपकी ओर से सेक्शन 80 C के तहत किए गए टैक्स छूट के दावे में अंतर हो. - चैप्टर VIA और फॉर्म 26 AS में अंतर हो.

नोटिस भेजने की समय सीमा

कोई नहीं

जवाब देने की समय सीमा

नोटिस जारी होने के 30 दिनों के अंदर

Income Tax Office

(फोटो: रॉयटर्स)

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फाइल किए गए रिटर्न में अगर आपकी कोई इनकम शामिल नहीं हुई तो यह नोटिस दिया जाएगा.

नोटिस भेजने की समय सीमा

छूटी हुई इनकम अगर 1 लाख या उससे कम है तो असेसमेंट इयर के 4 साल के अंदर. अगर 1 लाख से ज्यादा है तो 6 साल के अंदर तक नोटिस मिल सकता है.

जवाब देने की समय सीमा

अगर असेसिंग अफसर ने कोई समय सीमा दी है तो उसके अंदर, और नहीं दी गई तो नोटिस मिलने के 30 दिन के अंदर दोबारा रिटर्न भर दिया जाना चाहिए.

क्या करें?

असेसिंग अफसर के कहे मुताबिक संबंधित असेसमेंट इयर के रिटर्न फाइल कर दें.

सेक्शन 143 (2) 

रिटर्न की शुरुआती जांच के बाद दिया जाने वाला यह एक स्क्रूटनी असेसमेंट नोटिस है. चंडक के मुताबिक, 'यह तीन तरह का हो सकता है. पहले दोनों कंप्यूटर असिस्टेड स्क्रूटनी सेलेक्शन (CASS) में आते हैं, जबकि तीसरा मैन्यूअल स्क्रूटनी नोटिस है.'

उनके मुताबिक 2016-17 में असेसमेंट की अवधि 21 महीने थी जो अब घटकर 18 महीने रह गई. इसे और भी कम किए जाने की संभावना है.

- लिमिटेड परपज स्क्रूटनी: यह पूरी तरह से स्क्रूटनी नहीं है. इसमें कुछ ही बातों पर ध्यान दिया जाता है और केवल उन्हीं को वेरिफाई करना होता है.

- कम्पलीट स्क्रूटनी: यह एक डीटेल्ड स्क्रूटनी होती है. टैक्स रिटर्न में गड़बड़ी पाए जाने पर ऐसा किया जाता है.

- मैन्यूअल स्क्रूटनी: यह नोटिस भेजने का फैसला असेसमेंट अफसर करता है, लेकिन इसे इनकम टैक्स कमिश्नर से मंजूरी के बाद ही भेजा जा सकता है.

नोटिस भेजने की समय सीमा

जिस वित्त वर्ष में रिटर्न फाइल किया गया है उसके खत्म होने से 6 महीने पहले नोटिस का जवाब देना होता है.

Income tax

जवाब देने की समय सीमा

इसके बाद टैक्स पेयर को खुद या किसी प्रतिनिधि के जरिए तय समय सीमा में संबंधित अफसर के सामने पेश होना होता है.

क्या करें?

नोटिस मिलने पर एक भी हियरिंग को मिस न करें. अपने साथ इनकम और खर्च से जुड़े दस्तावेज लेकर जाएं. इस सेक्शन का उल्लंघन करने पर...

- अफसर अपने हिसाब से असेसमेंट कर टैक्स लायबिलिटी तय कर सकता है.

- सेक्शन 271 (1)(B) के तहत 10 हजार रुपए देने पड़ सकते हैं.

- 276 (D) के तहत 1 साल तक की सजा हो सकती है. इसके लिए जुर्माना भी देना पड़ सकता है.

सेक्शन 234 (F) 

आयकर कानून में शामिल किया जाने वाला यह एक नया सेक्शन है. इसके तहत असेसमेंट इयर की 31 जुलाई तक रिटर्न नहीं फाइल किए जाने पर फी या जुर्माना लग सकता है.

अशोक महेश्वरी ऐंड असोसिएट्स में पार्टनर, अमित महेश्वरी कहते हैं, 'अभी तक सैलरी पाने वाले टैक्स पेयर्स टैक्स भरने के बाद 31 जुलाई से पहले रिटर्न भरने को लेकर निश्चिंत हो जाते थे. लेकिन अब ऐसा करना अनिवार्य कर दिया गया है.' अभी तक असेसमेंट ऑफिसर रिटर्न न भरने पर 5,000 रुपये की पेनल्टी लगाता था.

2018-2019 के असेसमेंट इयर से 31 जुलाई के बाद और 31 दिसंबर से पहले रिटर्न फाइल करने पर 5 हजार रुपए और 31 दिसंबर के बाद फाइल करने पर 10 हजार रुपए की पेनल्टी लगेगी. हालांकि, 5 लाख से कम इनकम वाले लोगों के लिए अधिकतम पेनल्टी 1 हजार रुपए रखी गई है.

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