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ICICI बैंक, चंदा कोचर और वेणुगोपाल धूत: क्या है पूरा खेल?

चंदा कोचर के पति दीपक कोचर और वीडियोकॉन के मालिक वेणुगोपाल धूत के बीच क्या है रिश्ता.. पढ़िए पूरी कहानी

FP Staff Updated On: Mar 29, 2018 06:05 PM IST

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ICICI बैंक, चंदा कोचर और वेणुगोपाल धूत: क्या है पूरा खेल?

आईसीआईसीआई बैंक पर एक दाग लग गया है. मामला है कि चंदा कोचर ने अपनी हैसियत का फायदा उठाकर वेणगोपाल धूत की कंपनी को लोन बांटा है. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, दिसंबर 2008 में वेणुगोपाल धूत ने दीपक कोचर के साथ एक कंपनी शुरू की. दीपक कोचर कोई और नहीं बल्कि आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर हैं. चंदा कोचर को 2009 में यह पद दिया गया था. उनकी लीडरशिप में बैंक ने 2001, 2003, 2004 और 2005 में ‘बेस्ट रिटेल बैंक ऑफ इंडिया’ अवॉर्ड जीता.

किसने किसको फायदा पहुंचाया?

2008 में धूत ने चंदा कोचर के पति दीपक कोचर और उनके दो रिश्तेदारों के साथ मिलकर एक ‘नूपावर’ कंपनी बनाई. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, धूत ने अपनी एक कंपनी सुप्रीम एनर्जी से नूपावर को 64 करोड़ रुपए का लोन दिया. बाद में धूत ने सुप्रीम एनर्जी का मालिकाना हक सिर्फ 9 लाख रुपए में एक ट्रस्ट ‘पिनेकल एनर्जी ट्रस्ट’ को दे दिया. दिलचस्प है कि ‘पिनेकल एनर्जी ट्रस्ट’ के चेयरमैन दीपक कोचर ही थे.

इसमें हितों केक टकराव का मुद्दा साफ नजर आ रहा है. यह बात तब और पक्की हो जा रही है जब वीडियोकॉन को आईसीआईसीआई बैंक से 3,250 करोड़ रुपए का लोन मिलने के छह महीने के भीतर ही सुप्रीम एनर्जी का ट्रांसफर हो गया. टोटल 3,250 करोड़ रुपए के लोन में से 2,810 रुपए का लोन अब भी नहीं चुकाया गया है. 2017 में लोन की इस रकम को एनपीए में डाल दिया गया. जांच एजेंसियां अब इस पूरे मामले की जांच कर रही हैं.

समझें पूरा खेल

दिसंबर 2008 में दीपक कोचर और वेणगोपाल धूत ने नूपावर रिन्यूएबल प्राइवेट लिमिटेड (NRPL) शुरू किया. इस कंपनी 50 फीसदी हिस्सेदारी धूत. उनके परिवार के सदस्यों और एसोसिएट्स के पास थी. बाकी की 50 फीसदी हिस्सेदारी दीपक कोचर, दीपक कोचर के पिता की कंपनी पैसेफिक कैपिटल और चंदा कोचर के भाई की पत्नी के नाम थी.

जनवरी 2009 में धूत ने नूपावर के डायरेक्टर पद से इस्तीफा दे दिया. पद से इस्तीफा देते हुए धूत ने अपने सारे 24,999 शेयर सिर्फ 2.5 लाख रुपए में ट्रांसफर कर दिया.

मार्च 2010 में नूपावर को धूत की कंपनी सुप्रीम एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड से 64 करोड़ रुपए का लोन मिला. यह लोन कंवर्टिबल डिबेंचर के तौर पर मिला था. सुप्रीम में धूत की 99.9 फीसदी हिस्सेदारी थी. यानी इस रकम के बदले सुप्रीम एनर्जी को नूपावर में हिस्सेदारी मिली.

धूत ने नूपावर में अपनी हिस्सेदारी कोचर को दे दी. उसके बाद कोचर और उनके रिश्तेदारों की कंपनी पैसेफिक कैपिटल ने नूपावर की अपनी हिस्सेदारी सुप्रीम एनर्जी को ट्रांसफर कर दी. लिहाजा मार्च 2010 के अंत तक नूपावर की 94.99 फीसदी हिस्सेदारी सुप्रीम एनर्जी के पास आ गई.

नवंबर 2010 में धूत ने सुप्रीम एनर्जी में अपनी पूरी हिस्सेदारी अपने सहयोगी महेश चंद्र पुंगलिया को ट्रांसफर कर दिया.

29 सितंबर 2012 से लेकर 29 अप्रैल 2013 तक पुंगलिया ने अपनी पूरी हिस्सेदारी एक ट्रस्ट पिनाकेल एनर्जी को ट्रांसफर कर दिया. दीपक कोचर इस ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी हैं. पुंगलिया ने सुप्रीम एनर्जी में अपनी पूरी हिस्सेदारी पिनाकेल एनर्जी को सिर्फ 9 लाख रुपए में ट्रांसफर कर दिया.

सुप्रीम एनर्जी ने नूपावर को 64 करोड़ रुपए का लोन दिया और तीन साल के भीतर पिनाकेल एनर्जी में शामिल हो गई.

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