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पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़े: पहले की तरह क्यों नहीं मचा हो-हल्ला!

पेट्रोल की कीमतों में हर दिन उतार-चढ़ाव के कारण आम आदमी के नजर में नहीं आ पाई यह बढ़ोतरी

Pratima Sharma Pratima Sharma Updated On: Aug 29, 2017 10:20 AM IST

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पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़े: पहले की तरह क्यों नहीं मचा हो-हल्ला!

पेट्रोल और डीजल कितने रुपए लीटर है? क्या आपने ध्यान दिया कि पेट्रोल की कीमत 69 रुपए प्रति लीटर पहुंच चुकी है. लेकिन इस बार कोई हो-हल्ला नहीं मच रहा है. न तो विपक्ष की तरफ से न ही आम आदमी की तरफ से. आखिर ऐसा क्या हुआ कि पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों की तरफ लोगों का ध्यान नहीं जा रहा है. ऐसा नहीं है कि लोगों को अपनी जेब की फिक्र नहीं है. इस अनदेखी की वजह यह है कि लोगों को कीमत में बढ़ोतरी का अहसास एक झटके में नहीं हुआ.

1 जुलाई से अब तक पेट्रोल की कीमतों में 5.64 रुपए प्रति लीटर और डीजल के दाम में 3.72 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो चुकी है. याद कीजिए! पहले जब भी 2 रुपए या इससे ज्यादा की बढ़ोतरी होती थी तो लोग सड़कों पर उतर जाते थे. लेकिन सरकार की एक ट्रिक ने लोगों का ध्यान इस तरफ आने ही नहीं दिया. यह ट्रिक है हर दिन कीमतों में उतार चढ़ाव. हर दिन दाम घटने बढ़ने के कारण लोगों के दिमाग पर यह झटका वैसे नहीं होता जैसा एकबारगी कीमत बढ़ने पर होता है.

हर दिन बदलने लगी कीमत

इस साल 15 जून से पहले सरकारी तेल कंपनियां हर 15 दिन भी कीमतों में बदलाव करती थीं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की घटती बढ़ती कीमतों के साथ चलने के लिए सरकार ने घरेलू बाजार में भी हर दिन दाम बदलने का फैसला किया.

पहले हर 15 दिन में पेट्रोल और डीजल के दाम घटते बढ़ते थे. जिसका असर आम आदमी ज्यादा प्रभावी होता था. लेकिन हर दिन दाम घटने बढ़ने से कीमतों में बढ़ोतरी का असर कम होने लगा है.

एक पंथ दो काज?

किसी भी चीज का झटका जब अचानक होता है उसका असर भी गहरा होता है. केंद्र सरकार इस बात को बेहतर ढंग से समझ रही है. यही वजह है कि सरकार ने एलपीजी गैस सिलिंडर के दाम भी हर महीने बढ़ाने का फैसला किया है. सरकार पेट्रोल और डीजल की कीमतों की तरह ही एलपीजी पर से भी सब्सिडी खत्म करके पूरी तरह बाजार के हवाले कर देना चाहती है. सरकार के एक पंथ दो काज की यह रणनीति पूरी तरह कामयाब है. एकबारगी दाम बढ़ाने के बजाय हर महीने चरणबद्ध ढंग से कीमत बढ़ाने से सरकार को आम आदमी के विरोध का भी सामना नहीं करना पड़ता और सरकारी खजाना भी भरता है.

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