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अर्थव्यवस्था का मुद्दा अचानक राजनीति के केंद्र में क्यों आ गया है ?

अर्थव्यवस्था में मंदी अचानक राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गई है जिसकी चर्चा गुजरात चुनाव के दौरान भी होती रहेगी

Amitesh Amitesh Updated On: Oct 26, 2017 04:48 PM IST

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अर्थव्यवस्था का मुद्दा अचानक राजनीति के केंद्र में क्यों आ गया है ?

गुजरात विधानसभा चुनाव की तारीख के ऐलान के अगले ही दिन कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अर्थव्यवस्था के मुद्दे पर सरकार को फिर से घेरा. राहुल ने अपने ट्वीट के जरिए कहा कि देश की अर्थव्यवस्था तो इस वक्त आईसीयू में है. राहुल ने इसका कारण सरकार की तरफ से उठाए गए दो कदमों नोटबंदी और जीसटी को बताया. राहुल ने तंज कसते हुए कहा कि आप कहते हैं कि आप किसी से कम नहीं, मगर आपकी दवा में दम नहीं.

वित्त मंत्री अरुण जेटली को निशाने पर लेते हुए राहुल गांधी के इस ट्वीट से साफ है कि कांग्रेस अर्थव्यवस्था की मंदी को इस वक्त बड़े हथियार के तौर पर इस्तेमाल करना चाहती है.

केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद तीन साल तक सरकार की तरफ से हर गलती को कांग्रेस की पिछली सरकार की नाकामियों से जोड़कर बच निकलने की कोशिश होती रही थी. लेकिन, अब सरकार के तीन साल पूरे हो जाने के बाद नोटबंदी और जीएसटी लागू होने के बाद अर्थव्यवस्था पर पड़े विपरीत असर को कांग्रेस भुनाने में लगी है.

कांग्रेस को लग रहा है कि यह पहला मौका है जब सरकार बैकफुट पर है. यही वजह है कि कांग्रेस ने लगातार गुजरात से लेकर हिमाचल तक अर्थव्यवस्था और जीएसटी के मुद्दे को उठाकर सरकार को कठघरे में खड़ा करने में लगी है. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल  गांधी की तरफ से जीएसटी पर वार कर सरकार की आर्थिक नीति को निशाने पर लिया जा रहा है.

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सरकार के लोग भी इस बात को मान रहे हैं कि फिलहाल अर्थव्यवस्था में मंदी है. भले ही यह तात्कालिक ही क्यों ना हो. सरकार की तरफ से इस बात का भरोसा बार-बार दिया जा रहा है कि जीएसटी से परेशान लोगों को राहत जल्द मिलेगी.

वित्त मंत्री अरुण जेटली की तरफ से हर मंच से बार-बार सफाई दी जा रही है. दावा इस बात का किया जा रहा है कि नोटबंदी और जीएसटी दोनों के बारे में विपक्ष भ्रम फैला रहा है. अब प्रधानमंत्री भी इस मुद्दे पर विपक्ष के हमले की धार को कुंद करने की कोशिश कर रहे हैं.

India's Finance and Defence Minister Arun Jaitley attends a two-day meeting of the Goods and Services Tax (GST) Council in Srinagar

दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीएसटी की तारीफ करते हुए इसे व्यापार को नया आयाम और नई संस्कृति देने वाला कदम बताया. मोदी ने जीएसटी को ग्राहकों के लिए भी फायदेमंद बताया.

मोदी की तरफ से कोशिश यही है कि जीएसटी को लेकर लोगों को जागरूक किया जाए. जीएसटी पर विपक्ष की तरफ से किए जा रहे आरोपों को भ्रामक प्रचार बताकर इसे आम आदमी और आम व्यापारी दोनों के हक में दूरदर्शी कदम बताने की कोशिश है. जीएसटी को भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए बड़े हथियार के तौर पर पेश करने की कवायद तो सरकार की तरफ से पहले भी होती रही है.

अब जबकि गुजरात में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है, तो बीजेपी गुजरात के व्यापारी समुदाय में जीएसटी के चलते हुई परेशानी पर मरहम लगाने की नीति पर चल रही है. सरकार के नुमाइंदे से लेकर बीजेपी के नेताओं तक सबकी तरफ से जीएसटी को तात्कालिक परेशानी के तौर पर ही पेश किया जा रहा है.

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गुजरात के व्यापरियों को चुनाव के ऐलान के कुछ दिन पहले सरकार की तरफ से राहत देने की कोशिश भी की गई है. लेकिन, जीएसटी के चलते अर्थव्यवस्था में सुस्ती और व्यापारियों की परेशानियों को बीजेपी सभी दलों की सामूहिक जवाबदेही के तहत लाने में लगी है.

बीजेपी को लगता है कि कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दलों की सहमति से ही जीएसटी बिल पारित हुआ है, तो फिर जीएसटी से परेशानी की अकेले जवाबदेही सरकार की कैसे हो सकती है. लेकिन, अर्थव्यवस्था में मंदी अचानक राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गई है जिसकी चर्चा गुजरात चुनाव के दौरान भी होती रहेगी.

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