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जेम्स एंड ज्वैलरी में मनी लॉन्ड्रिंग पर नजर रखने के लिए बना जीएसटी रेगुलेटर

डीजीजीएसटीआई ग्राहकों के लेनदन की निगरानी करके ब्लैक मनी पर रोक लगाएगा

Updated On: Aug 27, 2017 06:15 PM IST

Bhasha

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जेम्स एंड ज्वैलरी में मनी लॉन्ड्रिंग पर नजर रखने के लिए बना जीएसटी रेगुलेटर

जीएसटी की इंटेलीजेंस इकाई को जेम्स एवं ज्वैलरी का रेगुलेटर बनाया गया है. इसका काम ज्वैलरी के जरिए होने वाली मनी लॉन्ड्रिंग को रोकना है.

एक अधिसूचना के मुताबिक, फाइनेंस मिनिस्ट्री ने पिछले हफ्ते मनी लॉन्ड्रिंग (रिकॉर्ड रखरखाव नियम) 2005 में संशोधन कर दिया है. जीएसटी इंटेलीजेंस के डायरेक्टोरेट जनरल (डीजीजीएसटीआई) को जेम्स एंड ज्वैलरी का रेगुलेटर नियुक्त किया है. प्रीवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग (पीएमएलए) के तहत रेगुलेटर गाइडलाइंस जारी करेगा. इसके जरिए ही लेनदेन में ग्राहकों को पहचान की जाएगी.

क्या होगा रेगुलेटर का काम?

रेगुलेटर ग्राहकों के प्रकार, कारोबारी संबंध, प्रकृति और लेनदेन की वैल्यू के हिसाब से ग्राहकों की पहचान के लिए उपाय सुझाएगा. पीएमएलए के तहत प्रत्येक इकाई को 10 लाख रुपए से अधिक के लेनदेन, पांच लाख रुपए से ज्यादा के सभी सीमापार ऑनलाइन ट्रांसफर और 50 लाख रुपए से अधिक की अचल संपत्तियों की खरीद फरोख्त के लेनदेन का रिकार्ड रखना अनिवार्य है.

रेगुलेटर के मुताबिक मनी लांड्रिंग और आतंकवाद के फंडिंग पर अंकुश के लिए ग्राहकों की जांच पड़ताल अनिवार्य है. पीएमएलए के तहत रेगुलेटर को ऐसी अथॉरिटी के तौर पर परिभाषित किया गया है जिसके पास रिपोर्ट करने वाली इकाइयों को लाइसेंस देने, अधिकृत करने, पंजीकरण, नियमन और निगरानी करने का अधिकार है.

विशेषज्ञों का कहना है कि इसके तहत डीजीसीएसटीआई को बिक्रीकर अधिकारियों की तरह दुकानों पर जाकर यह जांच करने का अधिकार मिल जाएगा कि कहीं मनी लांड्रिंग तो नहीं हो रही.

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