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जीएसटी 1 जुलाई से: आधी रात का शुभ मुहुर्त और भगवान भरोसे कारोबारी

जीएसटी लागू करने के लिए सरकार ने आधी रात का शुभ मुहुर्त तो चुना लेकिन आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर पर पर्याप्त काम नहीं किया

Pratima Sharma Pratima Sharma Updated On: Jun 29, 2017 01:00 PM IST

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जीएसटी 1 जुलाई से: आधी रात का शुभ मुहुर्त और भगवान भरोसे कारोबारी

सरकार 30 जून 2017 की आधी रात को जीएसटी लागू कर रही है. इसके बाद सरकार की टेंशन खत्म और कारोबारियों की टेंशन शुरू. वैसे सरकार का दावा है कि उसने कारोबारियों और आम लोगों की हितों के बारे में सोचा है. शायद यही वजह है कि सरकार ने जीएसटी लागू करने के लिए 30 जून 2017 की आधी रात का शुभ मुहुर्त मुकर्रर किया है.

सरकार और ज्योतिष

सरकार की इस टाइमिंग से ज्योतिषि भी पूरा इत्तेफाक रखते हैं. कई जाने माने ज्योतिषियों का कहना है कि उस दिन गज केसरी योग है. यह योग बेहद शुभ माना जाता है. अगर आप पाठकों को भी ज्योतिष की समझ है तो आपको बता दें कि उस दिन गुरु और चंद्र भी साथ-साथ हैं.

यानी ग्रह नक्षत्र को साथ लेकर सरकार देश को जीएसटी देने की तैयारी में है. लेकिन बात अगर सॉफ्टवेयर जैसी तकनीकी चीजों और ट्रायल रन की करें तो उस पर सरकार ने ज्यादा फोकस करना जरूरी नहीं समझा है.

तकनीक के बिना कैसे काम करेगा ज्योतिष?

मुमकिन है कि जेटली को ग्रहों का साथ मिल जाए और तकनीक पर बगैर मेहनत किए कामयाबी कदम चूम ले. काश! ऐसा होता, लेकिन जानकारों का कहना है कि यह मुमकिन नहीं है.

जीएसटी जैसे जटिल मुद्दों को समझने और समझाने के लिए कारोबारियों को वक्त की दरकार है. सीए और सीएस की फौज रखने वाले बड़े कारोबारी तो अपना काम चला लेंगे लेकिन छोटे कारोबारियों के हाथ पांव ठंडे पड़ रहे हैं.

जीएसटी लागू होने के बाद हर कारोबारी को हर महीने तीन और साल भर के लिए 1 बार टैक्स रिटर्न फाइल करना होगा. इस लिहाज से एक कारोबारी को सालभर में टोटल 37 बार रिटर्न फाइल करना होगा. छोटे कारोबारियों के पास इतना संसाधन नहीं है कि वे किसी एक शख्स को रिटर्न फाइल करने के लिए नियुक्त कर सकें.

क्या है कारोबारियों की शिकायत?

कारोबारियों की शिकायत है कि सरकार ने जीएसटी तैयार करने में इतने साल का वक्त लिया है लेकिन लागू करने के लिए बिल्कुल वक्त नहीं दिया है. जीएसटी के लिए जरूरी आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार ने कोई काम नहीं किया है.

ऐसे में सरकार की इस हड़बड़ी से जीएसटी के चलते होने वाले सुधारों की नींव हिल सकती है. कुल मिलाकर देखें तो राजनीतिक तौर पर खुद को सबसे आगे दिखाने के लिए सरकार यह कर सकती है. लेकिन इसका खामियाजा अर्थव्यवस्था को भुगतना पड़ सकता है.

क्या करें कारोबारी?

जीएसटी के लिए जिन जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत है उनमें इंटरनेट सबसे अहम है. देश के कोने-कोने में छोटे-बड़े व्यापारी हैं, लेकिन उनके पास इंटरनेट की पर्याप्त सुविधा नहीं है. देश में 24 घंटे इंटरनेट मुहैया कराना फिलहाल मुमकिन नहीं है. लेकिन फूल-प्रूफ सॉफ्टवेयर की गारंटी नहीं देना कारोबारियों के साथ धोखा है. बगैर सॉफ्टवेयर कारोबारियों के लिए जीएसटी लागू करना टेढ़ी खीर होगा.

सरकार ने एक तरफ आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर का पुख्ता इंतजाम नहीं किए हैं और दूसरी तरफ जीएसटी के नियमों का पालन न करने वालों पर भारी पेनाल्टी लगाने की भी तैयारी है. जीएसटी लागू होने के बाद गलत बिल या इनवॉयस जारी करना, इनवॉयस में छेड़छाड़ करना जीएसटी के नियमों के तहत अपराध माना जाएगा. जीएसटी मॉडल ड्राफ्ट में मिनिमन 10 हजार रुपए की पेनाल्‍टी से लेकर 5 साल जेल तक की सजा का प्रावधान है. जेल की सजा मुकदमा चलाए जाने और आरोप सिद्ध होने के बाद ही हो सकती है.

सॉफ्टवेयर की गारंटी के लिए देश भर में ट्रायल रन हो सकते थे लेकिन वह भी नहीं हुआ. वैसे यह अलग बात है कि सरकार 28 जून और 29 जून की रात संसद में जीएसटी का रिहर्सल कर रही है.

सरकार ने सालों की मेहनत के बाद जीएसटी तैयार किया और उसे 30 जून की शुभ घड़ी में लागू करके कारोबारियों को भगवान भरोसे छोड़ रही है.

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