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अप्रत्यक्ष करदाताओं की संख्या में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी : आर्थिक समीक्षा

17 लाख ऐसे कारोबारियों ने रजिस्ट्रेशन कराया है जिनका कारोबार जीएसटी की तय सीमा से कम है

FP Staff Updated On: Jan 29, 2018 03:26 PM IST

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अप्रत्यक्ष करदाताओं की संख्या में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी : आर्थिक समीक्षा

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को कहा कि जीएसटी के शुरुआती विश्लेषण बताते हैं कि अप्रत्यक्ष करदाताओं की संख्या में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है. कर के लिए खुद ही रजिस्ट्रेशन कराने वालों की संख्या बढ़ी है.

फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली ने सोमवार को संसद में 2017-18 की आर्थिक समीक्षा पेश की. इसमें कहा गया है कि देश के निर्यात में महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु और तेलंगाना की 70 प्रतिशत तक हिस्सेदारी है.

खास तौर से जो छोटे व्यापारी हैं और जो बड़े कारखानों से खरीदारी करते हैं वे खुद टैक्स जमा कराना चाहते हैं. इसमें कहा गया है कि दिसंबर 2017 तक 98 लाख जीएसटी रजिस्ट्रेशन हुए हैं.

17 लाख कारोबारियों का रजिस्ट्रेशन

जीएसटी के कई लाभों में से एक यह भी है कि इसमें खुद रजिस्टर किया जा सकता है. यह बात इससे साफ हो जाती है कि 17 लाख ऐसे कारोबारियों ने रजिस्ट्रेशन कराया है जिनका कारोबार जीएसटी की तय लिमिट से कम है. उनके लिए रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी नहीं है तो भी वह रजिस्ट्रेशन कराते हैं. कुल 7.10 करोड़ गैर-कृषि उद्योग-धंधों में से लगभग 13 प्रतिशत जीएसटी में रजिस्टर हैं.

महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, तमिलनाडु, गुजरात ऐसे राज्य हैं जिनमें जीएसटी के तहत रजिस्ट्रेशन कराने वालों की संख्या सबसे अधिक है. उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में जीएसटी के तहत रजिस्ट्रेशन कराने वालों की संख्या बढ़ी है.

मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि जीएसटी कर आधार (निर्यात को छोड़कर) 65 से 70 लाख करोड़ रुपए है. यह पहले के दो अनुमानों के काफी हद तक मेल खाता है. इस बार कुल टैक्स वसूली में जीएसटी का हिस्सा 15.6 प्रतिशत रहा.

जीएसटी से मिले प्रत्यक्ष आंकड़े

जीएसटी के आंकड़ों से राज्यों के बीच व्यापार की कई अहम जानकारियां मिली हैं. भारत के इतिहास में पहली बार हुआ है जब माल और सेवाओं के अंतरराष्ट्रीय निर्यातों की राज्यवार जानकारी हासिल हो पाई है. पांच राज्य-महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु और तेलंगाना इसमें भारत के कुल निर्यातों में 70 फीसद के भागीदार हैं.

पिछले साल की आर्थिक समीक्षा में अनुमान लगाया गया था कि भारत का आंतरिक व्यापार जीडीपी का 30 से 50 प्रतिशत के बीच था, जोकि अन्य देशों की तुलना में अधिक है. जीएसटी आंकड़े बताते हैं कि भारत का माल और सेवाओं में (गैर-जीएसटी माल और सेवाओं को छोड़कर) आंतरिक व्यापार वास्तव में जीडीपी का लगभग 60 प्रतिशत है.

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