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बढ़े कोयले के दाम, बढ़ सकता है आपका बिजली बिल

जी-11 और जी-14 ग्रेड के कोयले की कीमत में 15-20 फीसदी तक की वृद्धि हो सकती है, इस वजह से बिजली की कीमतों में प्रति यूनिट 30 से 50 पैसे की बढ़ोतरी हो सकती है

FP Staff Updated On: Jan 09, 2018 06:53 PM IST

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बढ़े कोयले के दाम, बढ़ सकता है आपका बिजली बिल

सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) के निदेशक मंडल ने बिजली और गैर- बिजली दोनों तरह के उपभोक्ताओं के लिए गैर- कुकिंग कोयले के दाम तुरंत प्रभाव से बढ़ाने को मंजूरी दे दी. कोल इंडिया सूत्रों के अनुसार यह वृद्धि औसतन 10 प्रतिशत के करीब हो सकती है. लेकिन इंडियन कैप्टिव प्रोड्यूसर के अनुसार  जी-11 और जी-14 ग्रेड के कोयले की कीमत में 15-20 फीसदी तक की वृद्धि हो सकती है. इस वजह से बिजली की कीमतों में प्रति यूनिट 30 से 50 पैसे की बढ़ोतरी हो सकती है.

कंपनी ने एक नियामकीय सूचना में यह जानकारी दी है. कंपनी ने कहा कि दाम में इस वृद्धि से चालू वित्त वर्ष की शेष अवधि में उसे 1,956 करोड़ रुपए का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा. जबकि पूरे वर्ष के दौरान उसे 6,421 करोड़ रुपए का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा.

नियामकीय सूचना में कहा गया है कि गैर-कुकिंग कोयले की यह मूल्य वृद्धि कोल इंडिया की सभी अनुषंगियों में लागू होगी. इनमें एनईसी भी शामिल है. कंपनी ने कहा है कि उसकी यह मूल्य वृद्धि नियमित और गैर-नियमित दोनों तरह के क्षेत्रों के लिए होगी.

क्या दाम बढ़ाने की वजह?

कोयला उत्पादन क्षेत्र की इस कंपनी ने कहा कि उसकी बढ़ती लागत को देखते हुए उसे दाम बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ा. इसकी वजह से पिछली कुछ तिमाहियों के दौरान कंपनी का मुनाफा प्रभावित हो रहा था. इस घोषणा के बाद कंपनी का शेयर मूल्य आज शुरुआती कारोबार में करीब 4 प्रतिशत चढ़कर 298.40 रुपए पर पहुंच गया.

इससे पहले कंपनी ने मई 2016 में दाम बढ़ाए थे. तब कंपनी ने औसतन 6.3 प्रतिशत तक दाम बढ़ाए थे जिससे 2016-17 में उसे 3,234 करोड़ रुपए का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हुआ था.

कोल इंडिया ने इससे पहले कोयले की निकासी के लिए भी 50 रुपए प्रति टन का शुल्क लगाया था. इससे कंपनी को हर साल 2,500 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आय होगी. कोयला निकासी शुल्क से चालू वित्त वर्ष की शेष अवधि के दौरान कंपनी को 800 करोड़ रुपए का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा.

कोल इंडिया कर्मचारियों के वेतन संशोधन से कंपनी पर 5,600 करोड़ रुपए का सालाना बोझ बढ़ गया था.

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