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जानिए कैसे खरीद सकते हैं सस्ता घर?

यह तरीका बैंकों द्वारा हजारों फ्लैट्स या घरों की हर साल की जाने वाली नीलामी में हिस्‍सा लेकर अपने लिए एक अदद घर सुनिश्चित करने का है

FP Staff Updated On: Sep 29, 2017 05:36 PM IST

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जानिए कैसे खरीद सकते हैं सस्ता घर?

अपने घर का सपना भला कौन नहीं देखता. लेकिन इस सपने को सच करने में अधिकांश लोगों के पसीने छूट जाते हैं. हालांकि अगर आप थोड़ा स्‍मार्ट तरीका अपनाएं तो आपको यह घर 35 फीसदी तक कम में मिल सकता है. यह तरीका बैंकों द्वारा हजारों फ्लैट्स या घरों की हर साल की जाने वाली नीलामी में हिस्‍सा लेकर अपने लिए एक अदद घर सुनिश्चित करने का है. बैंकों द्वारा घरों की नीलामी चलती रहती है. नीलामी मामलों के एक्‍सपर्ट और वकील अमित मिश्रा के अनुसार, इस मामले में सबसे जरूरी नीलामी की तारीख और इसकी पूरी प्रक्रिया समझने की है.

अखबारों में आता है पब्लिक नोटिस

अगर कोई कस्‍टमर लगातार 3 महीनों तक बैंक को ईएमआई नहीं देता है तो बैंक उसे एनपीए मान लेता है. इसके बाद जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए बैंक उसकी नीलामी करने की तरफ बढ़ता है. लेकिन इससे पहले उसे कुछ और चीजें करनी पड़ती है, जैसे- नीलामी से 30 दिन पहले उस जगह के प्रमुख अखबारों में इश्‍तेहार. नीलामी प्रक्रिया में हिस्‍सा लेने के लिए सबसे जरूरी होता है इन इश्‍तेहारों यानी पब्लिक नोटिस को समय पर पढ़ना और समझना.

पब्लिक नोटिस में होती हैं सभी चीजें

अमित मिश्रा के अनुसार, इस नोटिस को पढ़ और समझ कर आप आसानी से नीलामी प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं. इसके बाद आपको किसी गाइड या दिशानिर्देशक की जरूरत नहीं रह जाती है. इसमें नीलामी की जगह, तारीख, रकम समेत सभी जानकारियां होती हैं. बैंकों द्वारा की जाने वाली नीलामी की जानकारी के लिए आपको इनकी वेबसाइटें भी देखनी चाहिए. नीलामी प्रक्रिया में ब्‍लैकमनी बिल्‍कुल नहीं चलती है. इसमें सारा कुछ व्‍हाइट में ही होता है.

20 फीसदी तक राशि करनी पड़ती है जमा

नीलामी से अमूमन एक सप्‍ताह पहले बोली लगाने के इच्‍छुक लोगों को एक डीडी जमा करनी पड़ती है, जो सामान्‍य तौर पर कुल अनुमानित कीमत का 15-20 फीसदी होती है. इस रकम को अर्नेस्‍ट मनी कहा जाता है. यह रकम इसलिए ली जाती है, ताकि गंभीर लोग ही बिडिंग प्रोसेस में हिस्‍सा लें. अगर बोली जीतने के बाद कोई प्रॉपर्टी लेने से मुकर जाता है तो यह रकम जब्‍त की जा सकती है.

25 फीसदी रकम तुरंत देनी होती है सबसे अधिक बोली लगाने वाले को ही वह प्रॉपर्टी मिलती है. बोली जीतने के बाद 25 फीसदी रकम आपको तुरंत देनी पड़ती है और बाकी 75 फीसदी रकम के लिए अमूमन 15 दिन या उससे थोड़ा अधिक समय दिया जा सकता है.

दो तरह से होती है नीलामी

फिजिकल यानी किसी जगह पर नीलामी के साथ ही इन दिनों ई-नीलामी भी खूब होने लगी है. फिजिकल नीलामी बैंकों को महंगी पड़ती है, क्‍योंकि इसमें कई अधिकारियों और अन्‍य कर्मियों को शामिल होना पड़ता है. इसमें समय और संसाधन दोनों अधिक लगते हैं. दूसरी तरफ ई-ऑक्‍सनिंग आसान होती है. 10 लाख तक की प्रॉपर्टी की नीलामी डिस्ट्रिक्‍ट कोर्ट में भी हो सकती है.

क्‍यों आती है नीलामी की नौबत

बुरे दिनों में होम लोन आपकी लायबिलिटी भी बन जाता है. आज असुरक्षित जॉब मार्केट और खराब हो रही जीवन शैली के कारण नौकरी छूटने से लेकर स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं के शिकार होने का खतरा भी मंडराने लगा है. जीवनयापन, बच्‍चों की पढ़ाई और बेटी की शादी के बढ़ते खर्च के कारण भी यह मुसीबत आती है. वैसे भविष्‍य की अपनी इनकम का अधिक आकलन करने और जरूरतों को कम करके देखने से भी यह समस्‍या पैदा होती है.

समय पर ईएमआई नहीं चुकाने के ये होते हैं असर

आपको सबसे पहले यह जान लेना चाहिए कि बैंक किसी भी सूरत में आपका लोन माफ नहीं करेगा. हां अगर आप लगातार 3 महीने तक लोन डिफॉल्‍ट करते हैं तो बैंक आपकी प्रॉपर्टी जब्‍त कर सकता है. पहली बार ईएमआई डिफॉल्‍ट करने पर बैंक उसकी फिक्र नहीं करता है, लेकिन दूसरी बार होने पर वह आपको अलर्ट करता है और तीसरी बार डिफॉल्‍ट करने पर बैंक इस लोन को एनपीए मानने लगता है. इसके बाद वह रिकवरी के उपाय करने लगता है. तीन महीने के बाद वह कानूनी नोटिस भेज सकता है. इसके बाद बैंक प्रॉपर्टी की वैल्‍यू तय करके इसकी नीलामी करने की प्रक्रिया शुरू कर देता है. नीलामी की तारीख सामान्‍य तौर पर नोटिस के एक महीने बाद रखी जाती है.

(न्यूज़18 के लिए उमानाथ सिंह की रिपोर्ट)

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