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चार साल के निचले स्तर पर रहेगा GDP, 6.5 फीसदी रहने का अनुमान

अगले वित्त वर्ष में वृद्धि दर गिर कर साढ़े 6 फीसदी रहने का अनुमान है. जीवीए में भी गिरावट की आशंका. नोटबंदी और जीएसटी को इसका कारण माना जा रहा है

FP Staff Updated On: Jan 06, 2018 02:15 PM IST

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चार साल के निचले स्तर पर रहेगा GDP, 6.5 फीसदी रहने का अनुमान

वित्त वर्ष 2017-18 में देश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) चार साल के निचले स्तर पर गिरकर 6.5 फीसदी रहने का अनुमान है. शुक्रवार को केंद्रीय सांख्यिकी विभाग (सीएसओ) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष में जीडीपी 7.1 फीसदी से नीचे रहा. गिरावट का कारण कृषि और निर्माण क्षेत्रों के आउटपुट में आई मंदी को माना गया है.

ग्रॉस वैल्यू ऐडेड (जीवीए) के पूर्वानुमान में भी गिरावट की आशंका जताई गई है. 2017-18 में इसके 6.1 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है, जबिक पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 6.6 फीसदी था.

इन गिरावटों के लिए मंदी को जिम्मेदार माना जा रहा है. निर्माण क्षेत्र की मंदी ने सबसे ज्यादा घाटा पहुंचाया है. इसके पीछे जीएसटी को ठीक से अमल में नहीं लाना भी एक कारण है.

हालांकि सीएसओ के आंकड़े में एक अच्छी बात यह है कि इसमें कुल निश्चित पूंजी निर्माण और निजी उपभोग खर्च को स्थिर रखा गया है. निश्चित पूंजी निर्माण को निवेश के लिए अहम माना जाता है.

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, रिजर्व बैंक ने 2017-18 के लिए  जीवीए के जिस आंकड़े का अनुमान लगाया था, उससे नीचे रहने का पूर्वानुमान चिंता की बात है. जीडीपी का हाल भी कुछ ऐसा ही है. पिछले बजट में सरकार ने इसके 11.75 फीसदी रहने का अनुमान जाहिर किया. जबकि यह 9.5 फीसदी दर्ज किया गया.

सीएसओ ने जीडीपी तय करने का नया तरीका अपनाया है. इसके तहत सब्सिडी को हटाते हुए बुनियादी कीमतों पर उत्पाद करों को जीवीए के साथ जोड़ा जाता है. जो आंकड़ा निकलकर आता है उसे असल जीडीपी माना जाता है.

एक तरफ उद्योगपति कुल निश्चित पूंजी निर्माण को लेकर खुश हैं क्योंकि उन्हें निवेश बढ़ने की संभावना दिख रही है, तो दूसरी ओर अर्थशास्त्री इस ओर इशारा कर रहे हैं कि नोटबंदी और जीएसटी ने आर्थिकी के मंच पर काम खराब कर दिया है.

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