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वित्तीय उलझनों में फंसा फोर्टिस-रेलिगेयर घराना, कर्ज के जंजाल में फंसी कंपनियां

द संडे मॉर्निंग हेराल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, 1990 में सिंह भाइयों के पिता की मौत के बाद ढिल्लों इनके सरोगेट पिता बन गए. इस घटना के बाद सिंह भाइयों और ढिल्लों के बीच वित्तीय उलझनें बढ़ने लगीं

Updated On: Aug 17, 2018 05:05 PM IST

FP Staff

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वित्तीय उलझनों में फंसा फोर्टिस-रेलिगेयर घराना, कर्ज के जंजाल में फंसी कंपनियां

गुरिंदर सिंह ढिल्लों का नाम सुना होगा आपने. ये राधा स्वामी सत्संग ब्यास से जुड़े हैं. इस आध्यात्मिक संस्था से देश-दुनिया के 40 लाख सदस्यों के जुड़े होने का दावा किया जाता है. अध्यात्म की दुनिया में ढिल्लों का नाम तो है ही, बिजनेस की दुनिया में भी इनका नाम प्रमुखता से लिया जाता है. फर्क यह है कि पहले जहां इनके बिजनेस के फलने-फूलने की खबरें थीं, तो अब इसकी नाकामी की सुर्खियां बन रही हैं.

इसी परिवार से मालविंदर सिंह और शिविंदर सिंह भी आते हैं जिनका हेल्थ सेक्टर में बहुत बड़ा कारोबार है. ब्लूमबर्ग न्यूज एनालिसिस के हवाले से द संडे मॉर्निंग हेराल्ड की एक खबर बताती है कि इन दोनों भाइयों ने ढिल्लों परिवार को लगभग 25 अरब रुपए का कर्ज दिया. रिपोर्ट में बताया गया है कि कभी अरबों का बिजनेस करने वाला घराना आज किन मुश्किलों में फंस गया है.

हालत यह है कि दोनों भाइयों की कंपनियों के शेयर कर्जदारों के हाथ में चले गए हैं. कंपनियों से 23 अरब रुपए गायब होने के एक मामले की छानबीन का शिकंजा कसता जा रहा है. इतना ही नहीं, दोनों भाइयों पर 2008 में रेनबैक्सी लेबोरेटरीज की बिक्री से जुड़ा 500 मिलियन डॉलर के घपले का आरोप भी लगा है. हालांकि दोनों भाई किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से इनकार करते हैं.

द संडे मॉर्निंग हेराल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, 1990 में सिंह भाइयों के पिता की मौत के बाद ढिल्लों इनके सरोगेट पिता बन गए. इस घटना के बाद सिंह भाइयों और ढिल्लों के बीच वित्तीय उलझनें बढ़ने लगीं. सिंह भाइयों की कंपनी से शेल कंपनियों के तहत ढिल्लों को कर्ज दिए जाने लगे. हालांकि ढिल्लों पर भी अबतक किसी प्रकार के आरोप नहीं लगे हैं.

आध्यात्मिक संस्था राधा स्वामी ब्यास के सभी सदस्यों का कहना है कि संस्था का अपना वित्तीय प्रबंध है और उसे किसी कंपनी से कोई लेना-देना नहीं.

रिपोर्ट के मुताबिक, सिंह भाइयों की कंपनी की नाकामी के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की विदेशी निवेश की नीतियों में बरती जाने वाली पारदर्शिता है. ये दोनों भाई दो मशहूर कंपनियों के संचालक हैं-अस्पताल चलाने वाली कंपनी फोर्टिस हेल्थकेयर और वित्तीय फर्म रेलिगेयर इंटरप्राइजेज. रेनबैक्सी बिक्री के बाद मिली रकम से दोनों भाई अपनी दोनों कंपनियों को आगे बढ़ाना चाहते थे लेकिन आगे परेशानियां आती गईं और कंपनियों के बिजनेस ठहर गए.

दोनों भाई यह बात मानते हैं कि ढिल्लों से उनके वित्तीय संबंध हैं और ढिल्लों की कंपनियों से जुड़ी परेशानियां निपटाने के लिए दोनों पक्षों में बात चल रही है.

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