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वित्त मंत्रालय ने 9500 'हाई रिस्क' फाइनेंस कंपनियों की सूची जारी की

एफआईयू-इंडिया ने अपनी वेबसाइट पर इस सूची को जारी किया है जिसमें एनबीएफसी के नामों का जिक्र किया गया है. इन एनबीएफसी को हाई रिस्क कैटेगरी में रखा गया है

Updated On: Feb 26, 2018 12:10 PM IST

FP Staff

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वित्त मंत्रालय ने 9500 'हाई रिस्क' फाइनेंस कंपनियों की सूची जारी की

वित्त मंत्रालय के अंदर आने वाले फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट (एफआईयू) ने लगभग 9,500 नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (एनबीएफसी) की सूची जारी की है जिन्हें हाई रिस्क फाइनेंसियल इंस्टीट्यूशन (उच्च जोखिम वित्तीय संस्थान) की कैटगरी में रखा है.

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के अनुसार एफआईयू-इंडिया ने अपनी वेबसाइट पर इस सूची को जारी किया है जिसमें एनबीएफसी के नामों का जिक्र किया गया है. इन एनबीएफसी को हाई रिस्क कैटेगरी में रखा है. साथ ही इन्हें 31 जनवरी तक प्रीवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) का अनुपालन नहीं करते हुए पाया गया गया है.

8 नवंबर, 2016 को देश भर में लागू नोटबंदी के बाद से एनबीएफसी और कई ग्रामीण और शहरी को-ऑपरेटिव बैंक इनकम टैक्स विभाग और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के जांच दायरे में हैं. इन पर आरोप है कि इन्होंने गैर-कानूनी तरीके से अघोषित आय वाले लोगों के पुराने नोटों को बदला है.

इनमें से अधिकतर एनबीएफसी और को-ऑपरेटिव बैंकों को कैश जमा राशि लेकर पुराने नोटों को बदलते हुए पाया गया है. इसके अलावा रिजर्व बैंक की तरफ से इस तरह से जमा लेने से रोक लगाने के बावजूद उनके बैक डेट (पुरानी तारीख) में फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) और चेक जारी करने का भी पता चला है.

पीएमएलए के तहत सभी एनबीएफसी के लिए वित्तीय संस्थानों में प्रिंसिपल अफसर की नियुक्ति जरूरी है, और 10 लाख रुपए या इससे ज्यादा के संदिग्ध कैश लेन-देन के बारे में एफआईयू को जानकारी देना अनिवार्य है. पीएमएलए के सेक्शन 12 के तहत हर रिपोर्टिंग संस्था को सभी लेनदेन का रिकॉर्ड रखना और अपने ग्राहकों के साथ-साथ लाभकारी मालिकों के पहचान का एफआईयू को वेरिफाई (सत्यापित) करना अनिवार्य है.

इन संस्थाओं को लेनदेन और ग्राहकों की पहचान का रिकॉर्ड 5 साल के लिए रखना अनिवार्य है.

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