S M L

आर्थिक सर्वेक्षण 2017-18: जिन दिक्कतों का जिक्र हुआ, वो कैसे दूर होंगी

आर्थिक सर्वे का फोकस मुख्य रूप से जीएसटी और कृषि पर रहा

Alok Puranik Alok Puranik Updated On: Jan 29, 2018 08:29 PM IST

0
आर्थिक सर्वेक्षण 2017-18: जिन दिक्कतों का जिक्र हुआ, वो कैसे दूर होंगी

स्टॉक बाजार की जोखिम उठाने की क्षमताओं पर अगर यकीन किया जाए, तो आर्थिक सर्वेक्षण 2017-18 चिंताजनक तस्वीर पेश नहीं करता. आर्थिक  सर्वेक्षण आने के बाद कई घंटे बाद बंद हुए मुंबई शेयर बाजार के सूचकांक सेंसेक्स में 232.81 अंकों की तेजी आई है. यह अलग बात है कि इसी स्टॉक बाजार की चाल पर आर्थिक सर्वक्षण में खासी चिताएं पेश की गई हैं.

बजट की तमाम खबरों के लिए यहां क्लिक करें 

आर्थिक सर्वेक्षण ने अपनी तरफ से दस बातें खास रखी हैं.  इनमें से अधिकांश बातें पहले से पता थीं. आर्थिक सर्वेक्षण में उन्हीं बातों को दस्तावेजबद्ध तरीके से रखा है. ये 10 बातें ये हैं.

-डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्सपेयर्स की तादाद में इजाफा. यानी नोटबंदी और जीएसटी के परिणाम बेहतरीन आ रहे हैं.

-अर्थव्यवस्था में संगठित क्षेत्र यानी ठीक-ठाक रोजगार अच्छा-खासा है. यानी रोजगारविहीन विकास का आरोप व्यर्थ है.

-राज्यों की संपन्नता का ताल्लुक उनके कारोबारी खुलेपन से है. यानी वो कितने खुलेपन के साथ दूसरे देशों के साथ कारोबार करते हैं और कितने खुलेपन के साथ देश के दूसरे राज्यों के साथ रोजगार करते हैं. अपने विकास का  दारोमदार राज्य सरकारों पर भी है. सारी जिम्मेदारी केंद्र की नहीं है.

-भारत के निर्यात ढांचा सिर्फ कुछ कंपनियों पर ही केंद्रित नहीं है. दूसरे देशों में जहां कुछ कंपनियों की ही निर्यात में हिस्सेदारी है, वहीं भारत में ऐसा नहीं है. यहां छोटी और मझोली कंपनियों को ज्यादा प्रोत्साहन देकर उनकी भूमिका को और मजबूत किया जा सकता है.

कपड़ा उद्योग को निर्यात से जुड़ी जो रियायतें दी गईं, उनका सकारात्मक परिणाम आया. यानी निर्यात बढ़ाने के लिए उद्योगों पर फोकस पैकेज आ सकते हैं, उनकी जरुरत है. उनके परिणाम सकारात्मक रहे हैं.

-भारतीय अभिभावक तब तक बच्चे पैदा करते रहते हैं जब तक बेटा ना हो जाए. इस ज्ञान के लिए आर्थिक सर्वेक्षण की कोई जरूरत नहीं थी. यह बात तो औसत भारतीय परिवार में कोई भी दादीजी बता सकती हैं.

-कोर्ट कचहरी में कारोबारियों का बहुत वक्त बरबाद होता है. इससे टैक्स से जुड़े मामले अटकते हैं. यानी आर्थिक मसलों से जुड़ी न्याय प्रक्रिया में सुधार की जरूरत है.

-विकास में तेजी के लिए बज निवेश बढ़ाना ज्यादा जरूरी है. बचत बढ़ाने के बजाय, यानी फोकस होना चाहिए कि किस तरह से औद्योगिक निवेश बढ़े. निवेश के लिए जरुरी संसाधन मौजूद हैं.

-स्थानीय सरकारों और राज्य सरकारों के प्रत्यक्ष कर संसाधन कम हैं, यानी राज्य सरकारों और स्थानीय प्रशासनिक निकायों को अपने कर स्त्रोतों का विकास करना चाहिए.

-मौसम में बहुत ज्यादा बदलाव का असर कृषि उत्पादन पर पड़ा है.  खेती को एक और विकट समस्या से निपटने के लिए तैयार हो जाना चाहिए-वह है मौसम में आ रहे बदलाव.

उम्मीद कायम रहे 

उम्मीद है कि 2017-18 में देश की आर्थिक विकास दर 6.75 प्रतिशत होगी.  पहले कयास थे कि यह 6.50 प्रतिशत से ऊपर नहीं जाएगी. आनेवाले सालों में उम्मीद और मजबूत होती दिखती है. सर्वेक्षण के मुताबिक 2018-19 में यह बढ़कर 7 से 7.5 प्रतिशत तक हो जाएगी. यानी भविष्य बेहतर है इस साल के मुकाबले.

BUDGET BUZZ_hindi

2017-18 में कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्रों में क्रमश: 2.1 प्रतिशत, 4.4 प्रतिशत और 8.3 प्रतिशत दर की वृद्धि होने की उम्‍मीद है. खेती में सबसे कम विकास यानी 2.1 प्रतिशत और फिर उद्योगों में ज्यादा यानी 4.4 प्रतिशत विकास और सबसे ज्यादा सेवा क्षेत्रों में यानी 8.3 प्रतिशत विकास दर है. इससे साफ होता है कि मेक इन इंडिया के नारों के बावजूद उद्योग जगत पांच प्रतिशत का आंकड़ा भी विकास में पार नहीं कर पा रहा है.

समूची अर्थव्यवस्था को पांच प्रतिशत से ज्यादा ग्रोथ देने में सर्विस सेक्टर का अहम योगदान है. सर्विस सेक्टर का विकास ठीक है लेकिन इनमें उस तरह का रोजगार मिलता है, जिसमें कुछ खास स्किल की जरूरत नहीं होती है. जबकि औद्योगिक जगत में कई मामलों में अशिक्षितों को भी रोजगार मिल जाता है. आनेवाले सालों में सर्विस सेक्टर दारोमदार रहेगा, यह तो तय है.

संसाधनों की दिक्कत नहीं

कुल मिलाकर यह साफ होता है कि अर्थव्यवस्था में संसाधनों की दिक्कत नहीं है. बैंकों के अलावा जिन स्रोतों से कारोबारों को संसाधन मिल सकते थे, उनसे संसाधन जुटाए गए हैं. आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक अप्रैल-दिसंबर 2016 के मुकाबले अप्रैल-दिसंबर 2017 की अवधि में बॉन्डों के जरिए और नॉन बैंकिंग वित्तीय संस्थानों से जुटाए गए संसाधनों में 43 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है.

आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़ों के मुताबिक 2016-17 के बारह महीनों में नए इश्यू से कुल 1,02,946 करोड़ रुपए जुटाए गए थे. जबकि चालू साल यानी 2017-18 के आठ महीनों में ही इस मद से 1,52,919 करोड़ रुपए जुटा लिये गये हैं. यानी फंड की समस्या नहीं है. जिसके पास प्रोजेक्ट है, आइडिया है, उसे अर्थव्यवस्था में फंडिंग मिल रही है. चाहे वह नॉन बैंकिंग लोन से मिल रही हो या नए शेयरों के इश्यू से मिल रही हो. संसाधनों की कमी से बड़े उद्योग बाधित नहीं हो रहे हैं. बहुत तेजी से ऊपर चढ़ते शेयर बाजारों से संकेत मिलता है कि बाजार में अच्छी कंपनियों के बहुत से शेयर खपाए जा सकते हैं.

छोटे उद्योगों की मुश्किल

आर्थिक सर्वेक्षण बताता है कि लघु उद्योगों को अपने कारोबार के विस्तार के पर्याप्त पूंजी मिलने में दिक्कतें पेश आ रही हैं. बैंकों द्वारा दिए कर्जों के बारे में उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि नवंबर 2017 तक जितना कर्ज दिया गया है, उसमें करीब 83 प्रतिशत बड़े कारोबारों को ही गया है. सिर्फ 17 प्रतिशत छोटे कारोबारियों को गया है. जाहिर बैंक बड़े प्लांट, बड़े ब्रांड को कर्ज देने में सुरक्षित महसूस करते हैं हालांकि गारंटी वहां भी नहीं है.

किंगफिशर विजय माल्या का बहुत बड़ा ब्रांड था. विजय माल्या बैंकों के दस हजार करोड़ रुपए लेकर उड़ गए. पर बैकिंग व्यवस्था में छोटे उद्यमों के प्रति सकारात्मक भाव नहीं है. हालांकि आर्थिक सर्वेक्षण का दावा है कि दिसंबर 2017 तक प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत 10.01 करोड़ लोगों को कर्ज दिए जा चुके हैं इनमें से 7.6 करोड़ कर्ज महिलाओं को दिए गये हैं. मुद्रा योजना आंकड़ों के आईने में बहुत कामयाब योजना लग रही है. इसकी जमीनी सचाई क्या है, इस पर शोध होना बाकी है. कुल मिलाकर सर्वेक्षण का भाव यह है कि उद्योग को बड़े या छोटे किसी को संसाधनों की समस्या नहीं है.

आसमान में स्टॉक बाजार

स्टॉक बाजार लगातार ऊपर जा रहे हैं. आर्थिक  सर्वेक्षण के पहले खंड के बॉक्स 9 में भारतीय और अमेरिकी स्टॉक बाजारों की चढ़ाई की तुलना की गई है. सर्वेक्षण बताता है कि दिसंबर 2015 के मुकाबले अमेरिका का सूचकांक स्टैंडर्ड एंड पुअर सूचकांक 45 प्रतिशत ऊपर जा चुका है. इधर भारतीय सेंसेक्स भी 46 प्रतिशत ऊपर जा चुका है.

आर्थिक सर्वेक्षण बताता है कि इस अवधि में अमेरिका की अर्थव्यवस्था की विकास दर ऊपर गई और भारत की विकास दर घटी. भारत में कंपनियों की कमाई का अनुपात सकल घरेलू उत्पाद के मुकाबले लगातार घटा है. अभी यह सिर्फ 3.5 प्रतिशत है. अमेरिका में यह 9 प्रतिशत है.

Stock market bullion

अमेरिका में ब्याज की दरें भारत में ब्याज की दरों के मुकाबले कम हैं. सर्वेक्षण का आशय यह है कि इस जबरदस्त तेजी पर सतर्क रहने की जरूरत है. सेंसेक्स कुछ हफ्तों में ही हजार बिंदु पार कर ले रहा है, लिहाजा उस पर नजर बनाए रखने की जरूरत है.

हालांकि भारत और अमेरिका की तुलना संभव नहीं है. पर स्टाक बाजार पर एक तरह की चेतावनी के तौर पर सर्वेक्षण के आकलन को लिया जा सकता है. यह अलग बात है कि सर्वेक्षण आने के कुछ वक्त बाद ही बाजार और उछलकर बंद हुआ. फिर भी स्टॉक बाजार के निवेशक सतर्क रहें, ऐसा सुन लेने में कोई बुराई नहीं है.

चिंताएं खेती की बरकरार 

खेती की हालत तो चिंताजनक है. इस बात को समझने के लिए आर्थिक सर्वेक्षण के ज्ञान की जरूरत नहीं है. आए दिन धरने जुलूस किसानों की आत्महत्याओं से साफ होता है कि खेती गहरी समस्याओं से जूझ रहा है. 2017-18 में कृषि क्षेत्र करीब दो प्रतिशत की दर से विकास करेगा. लगातार यह बात साफ हुई है कि कृषि की तमाम समस्याओं में एक बड़ी समस्या उसकी मार्केटिंग की है. किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य ना मिल पाना बहुत बड़ा मुद्दा है. इस बार आर्थिक सर्वेक्षण कृषि को लेकर कुछ फिल्मी और साहित्यिक हो गया है.

आर्थिक सर्वेक्षण में कृषि चैप्टर की शुरुआत मनोज कुमार की हिट फिल्म ‘उपकार’ के हिट गीत से होती है- ‘मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती.’ इसी चैप्टर में आगे तुलसीदास की उक्ति दर्ज है-का बरखा जब कृषि सुखानी यानी जब कृषि खत्म ही हो गई तो बारिश का क्या मतलब. सर्वेक्षण बताता है कि सरकार ने बाजार सुधार से संबंधित कई कदम उठाए हैं ताकि किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य मिल सके.

इस सिलसिले में अप्रैल, 2016 में कृषि के केंद्रीकृत इलेक्ट्रॉनिक बाजार को प्रोत्साहित करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट-ई-नाम की शुरुआत हुई थी. इस बात को कुछ समय बाद पूरे दो साल हो जाएंगे. शुरुआत अभी भी शुरुआत की ही स्टेज में है. सर्वेक्षण फिर इस शुरुआत को रेखांकित करके आगे बढ़ जाता है, पर यह बाजार अभी आगे नहीं बढ़ पाया है. आगामी बजट इस बाजार को ठोस तरीके से बढ़ाने के लिए क्या कुछ करता है, यह 1 फरवरी को बजट आने के बाद ही पता चलेगा.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
SACRED GAMES: Anurag Kashyap और Nawazuddin Siddiqui से खास बातचीत

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi