S M L

जानिए क्या है 1 अप्रैल से लागू होने वाला ई-वे बिल

जीएसटी लागू होने के बाद 50 हजार रुपए या ज्यादा के माल को एक राज्य से दूसरे राज्य या राज्य के अंदर 10 किलोमीटर या अधिक दूरी तक ले जाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक परमिट की जरूरत होगी

Updated On: Feb 24, 2018 08:04 PM IST

FP Staff

0
जानिए क्या है 1 अप्रैल से लागू होने वाला ई-वे बिल

तकनीकी खामियों की वजह से अटका ई-वे बिल 1 अप्रैल से लागू होगा.जीएसटी व्यवस्था के तहत अहम ई-वे बिल को एक फरवरी से लागू होना था, लेकिन तमाम अड़चनों के कारण इसका क्रियान्वयन टालना पड़ा था. 1 अप्रैल से देश में इंटर-स्टेट ई-वे बिल लागू हो जाएगा. जीएसटी नेटवर्क कमिटी की बैठक में इस पर सहमति बन गई. पहले चरण में इंटर-स्टेट ई-वे बिल लागू होगा.इस व्‍यवस्‍था को लागू करने की सिफारिश की है. इस संबंध में आखिरी मंजूरी GST काउंसिल की ओर से दी जाएगी.

जीएसटी काउंसिल के मंत्रियों के समूह के अध्यक्ष सुशील कुमार मोदी के मुताबिक नेटवर्क से हर हफ्ते 4 से 5 राज्य जुड़ेंगे. 9.5 लाख व्यापारी ई-वे बिल पर रजिस्टर हुए हैं जिन्हें इसका सीधा फायदा मिलेगा. हालांकि, व्यापारियों को जिस खबर का इंतजार था उस पर कोई फैसला नहीं हुआ. जीएसटी रिटर्न आसान करने पर बैठक में कोई सहमति नहीं बन पाई, यानी व्यापारियों को अब भी हर महीने 3 रिटर्न ही भरने होंगे.

क्या है ई वे बिल

जीएसटी लागू होने के बाद 50 हजार रुपए या ज्यादा के माल को एक राज्य से दूसरे राज्य या राज्य के अंदर 10 किलोमीटर या अधिक दूरी तक ले जाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक परमिट की जरूरत होगी. इस इलेक्ट्रॉनिक बिल को ही ई वे बिल कहते हैं, जो जीएसटीएन नेटवर्क के अंतर्गत आता है.

इन राज्यों में शुरू हो चुकी है सेवा

जीएसटीएन ने बयान में कहा कि ई-वे बिल प्रणाली चार राज्यों- कर्नाटक, राजस्थान, उत्तराखंड और केरल में शुरू हो चुकी है. ये राज्य कुल मिला कर प्रतिदिन करीब 1.4 लाख ई-वे बिल उत्पन्न कर रहे हैं. ई-वे बिल प्राप्त करने वाले ट्रांसपोर्टरों को 'ईवेबिल डॉट एनआईसी डॉट इन' पर जाना होगा और जीएसटीइन देकर खुद को पंजीकृत करना होगा. जो ट्रांसपोर्टर जीएसटी के तहत पंजीकृत नहीं है उन्हें बिल उत्पन्न करने के लिए पैन या आधार देकर ई-वे बिल प्रणाली के तहत खुद का नामांकन करना होगा.

आधे घंटे रोकने पर अधिकारी को देनी होगी जानकारी

अभी स्थिति यह थी कि कारोबारी अपने माल की कंसाइनमेंट राज्य के भीतर या राज्य से बाहर भेजता है, तो कई बार केंद्रीय और राज्य सरकारों के सेल्स टैक्स, एक्साइज टैक्स के अफसर और इंसपेक्टर उन्हें रोक लेते थे. इस प्रणाली के लागू होने के बाद यदि अफसर ने माल लदे वाहन को आधे घंटे से ज्यादा रोका तो उसे अपनी कार्रवाई के बारे में जानकारी देनी होगी. अफसर को ऑनलाइन डिटेनशन ऑर्डर देकर बताना होगा कि उसने संबंधी कंसाइनमेंट क्यों रोका, उसके बाद उसने कौन से दस्तावेज चेक किए, कब तक अपनी तफ्तीश जारी रखी, उस तफ्तीश का नतीजा क्या निकला.

एसएमएस बन जाएगा ई-वे बिल

कारोबारियों और ट्रांसपोटर्स को कोई भी टैक्स ऑफिस या चेक पोस्ट पर जाने की जरूर नहीं होगी. ई-वे बिल इलेक्ट्रॉनिकली स्वयं कारोबारी निकाल पाएंगे. कारोबारी ऑफलाइन भी एसएमएस के जरिए ई-वे बिन बनवा सकेंगे. जिन कारोबारियों के पास इंटरनेट की सुविधा नहीं है और उन्हें एक दिन में ज्यादा ई-वे बिल जनरेट नहीं करने हैं, वह एसएमएस सर्विस से ई-वे बिल जनरेट कर सकते हैं. इसके लिए कारोबारियों को अपना मोबाइल नंबर रजिस्टर करना होगा. इसी नबंर से एसएसएस के जरिए ई-वे बिल की रिक्वेस्ट डिटेल देकर जनरेट कर सकते हैं.

4 तरह के हैं ई-वे बिल

ई-वे बिल-1: ई-वे बिल-1 गुड्स के लिए है. यानी डीलर, कारोबारी, एक्सपोर्टर, ट्रेडर जो 50 हजार रुपए का स्टॉक एक राज्य से दूसरे राज्य में भेजेगा वह ई-वे बिल-1 फॉर्म भरेगा. ये ई-वे बिल सबके लिए एक है.

ई-वे बिल-2: ई-वे बिल-2 ट्रासपोटर्स को भरना है. कन्सॉलिडेटेड ई-वे बिल, ई-वे बिल-2 फॉर्म के जरिए भरा जाएगा. एक ही व्हीकल में अलग-अलग डीलर्स का सामान, अलग-अलग प्रोडक्ट कैटेगरी का सामान भेजने पर कन्सॉलिडेटेड ई-वे बिल भरना होगा. ये कन्सॉलिडेटेड ई-वे बिल ज्यादातर ट्रांसपोर्टर्स को भरना होगा. ट्रांसपोर्टर्स अगल-अगल डीलर्स के लिए एक कन्सॉलिडेटेड ई-वे बिल बना सकता है.

ई-वे बिल-3: ई-वे बिल-3 वैरिफिकेशन फॉर्म है जिसे जीएसटी अधिकारी भरेंगे. इस फॉर्म में प्रोडक्ट ले जा रहे है व्हीकल की जानकारी जैसे व्हीकल नंबर, ट्रांसपोर्टर और डीलर का नाम और नंबर भरा जाएगा. ये फॉर्म जीएसटी अधिकारी चेकिंग के समय भरेंगे. इसके अलावा इस फॉर्म में प्रोडक्ट की जानकारी होगी. ये फॉर्म डीलर, ट्रांसपोर्टर और जीएसटी अधिकारी कोई भी चेक कर सकता है.

ई-वे बिल-4: ई-वे बिल-4 डिटेन्शन फॉर्म है. यानी एक जीएसटी अधिकारी ने अगर 50 ट्रक को वैरिफाई किया है और उसमें से अगर 4 में अधिकारी को कुछ गढ़बढ़ लगता है, तो वह उन व्हीकल और प्रोडक्ट को जब्त कर लेगा. अधिकारी जिन भी ट्रक या प्रोडक्ट को जब्त करता है, वह उसकी जानकारी ई-वे बिल-4 में भरेगा. ई-वे बिल-4 में भरी जानकारी ट्रांसपोर्टर, डीलर, कारोबारी, एक्सपोर्टर, ट्रेडर ऑनलाइन स्वयं भी चेक कर सकते हैं कि उनके कौनसे ट्रक जीएसटी अधिकारी ने जब्त कर लिए हैं.

(साभार: न्यूज18 हिंदी)

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
Jab We Sat: ग्राउंड '0' से Rahul Kanwar की रिपोर्ट

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi