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नोटबंदी से नुकसान हुआ लेकिन आधिकारिक आंकड़ों में नहीं आ पाया: गीता गोपीनाथ का रिसर्च पेपर

ऑथर्स ने अपने पेपर में साफ किया है कि इनफॉरमल सेक्टर में नोटबंदी का असर कैसा रहा है, जीडीपी डाटा में इसकी जानकारी बहुत कम है

Updated On: Dec 18, 2018 10:38 PM IST

FP Staff

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नोटबंदी से नुकसान हुआ लेकिन आधिकारिक आंकड़ों में नहीं आ पाया: गीता गोपीनाथ का रिसर्च पेपर

नोटबंदी से देश को फायदा हुआ है या नुकसान? यह बहस 2016 से ही चली आ रही है. अब इस मामले में चार अर्थशास्त्रियों ने जवाब दिया है. हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की गीता गोपीनाथ और गैबरिएल शोडरॉ रीक, गोल्डमैन सैक्स की प्राची मिश्रा और RBI के अभिनव नारायणन ने यूएस नेशनल ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक्स रिसर्च (NBER)में एक रिसर्च पेपर जमा किया है.

इन अर्थशास्त्रियों ने अपने पेपर में लिखा है कि नोटबंदी की वजह से नवंबर और दिसंबर 2016 में आर्थिक गतिविधियों और रोजगार में 3 फीसदी की कमी आई है. इसकी वजह से देश की अर्थव्यवस्था की तिमाही ग्रोथ में 2 फीसदी की कमी आई है.

ऑथर्स ने अपने पेपर में साफ किया है कि इनफॉरमल सेक्टर में नोटबंदी का असर कैसा रहा है, जीडीपी डाटा में इसकी जानकारी बहुत कम है. जिले स्तर पर रोजगार पर नोटबंदी का असर कैसा रहा है, यह जानने के लिए इन्होंने एक नए तरह के हाउसहोल्ड सर्वे का इस्तेमाल किया.

इन अर्थशास्त्रियों का कहना है कि नतीजों से यह साफ पता चला है कि 2016 के अंत में इकोनॉमिक एक्टिविटीज में गिरावट आई है. स्टडी में यह भी साफ हो गया कि नोटबंदी होने और नए नोट आने के दौरान अर्थव्यवस्था पर ज्यादा असर हुआ. नोटबंदी से सबसे कम और सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों या वो इलाके जहां कैश की आपूर्ति हुई और जहां नहीं हुई, उनमें काफी फर्क है.

कैश की किल्लत से निपटने के लिए लोगों ने क्या किया? लोगों ने पेमेंट के दूसरे तरीके निकाले. इस पर स्टडी पेपर ने कहा है, 'नोटबंदी के बाद पेटीएम और POS (प्वाइंट ऑफ सेल्स) के जरिए पेमेंट होने से कैश में बड़ी कमी आई.'

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