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जीएसटी से पहले का सामान बेचने की डेडलाइन 31 दिसंबर तक बढ़ी

कई कंपनियों मसलन विप्रो, एचपीएल और अन्य गैर-खाद्य कंपनियों ने इसकी समयसीमा बढ़ाने की मांग की थी

Updated On: Sep 29, 2017 10:22 PM IST

Bhasha

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जीएसटी से पहले का सामान बेचने की डेडलाइन 31 दिसंबर तक बढ़ी

सरकार ने बदले हुए कीमत वाले स्टिकरों के साथ (जीएसटी) लागू होने से पहले के सामान को बेचने की समयसीमा बढ़ाकर 31 दिसंबर कर दी है. उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने शुक्रवार को यह जानकारी दी.

कई कंपनियों और व्यापारियों के प्रमुख संगठन कनफेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने कहा था कि उनके पास जीएसटी से पहले का काफी भंडार पड़ा है और उन्हें इसे निकालने के लिए और समय की जरूरत है.

जीएसटी को एक जुलाई से लागू किया गया है. सरकार ने पैकेटबंद उत्पादों पर अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) के साथ बदले हुए कीमत छापकर इसे बेचने के लिए तीन महीने का 30 सितंबर तक का समय दिया था. इस बिना बिके सामान पर एमआरपी होगा जिसमें जीएसटी पूर्व से दौर के सभी कर शामिल हों. जीएसटी लागू होने के बाद इनमें से काफी उत्पादों के अंतिम खुदरा मूल्य में बदलाव हुआ है क्योंकि जहां कुछ उत्पादों पर कर प्रभाव घटा है तो कुछ पर बढ़ा है.

डेडलाइन नहीं बढ़ता तो होता 6 लाख करोड़ का नुकसान

उपभोक्ता मामले के मंत्री रामविलास पासवान ने ट्वीट किया, ‘पैकेटबंद जिंसों पर उद्योग जीएसटी की वजह से स्टिकर, स्टाम्पिंग, आनलाइन प्रिटिंग के जरिए संशोधित मूल्य दिखा सकता है. अब यह सीमा बढ़ाकर 31 दिसंबर की जा रही है.

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कई कंपनियों मसलन विप्रो, एचपीएल और अन्य गैर खाद्य कंपनियों ने इसकी समयसीमा बढ़ाने की मांग की थी जिसकी वजह से यह कदम उठाया गया है.

व्यापारियों के संगठन कैट ने कहा था कि यदि एमआरपी लेबल वाले पुराने स्टॉक को निकालने की समयसीमा नहीं बढ़ाई जाती है तो इससे करीब छह लाख करोड़ रुपये का सामान बेकार हो जाएगा.

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