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देशभर में 10 लाख बैंक कर्मी हड़ताल पर, बंदी से आम लोग परेशान

संगठनों के मुताबिक बैंकों के निजीकरण से कृषि और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में लोन नहीं मिल पाएगा

Updated On: Aug 22, 2017 04:32 PM IST

IANS

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देशभर में 10 लाख बैंक कर्मी हड़ताल पर, बंदी से आम लोग परेशान

सरकार की नीतियों के खिलाफ देशभर के बैंककर्मियों की एक दिन की हड़ताल के कारण मंगलवार को दिल्ली एनसीआर में बैंक सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं.

हड़ताल बुलाने वाले नौ बैंक संघों के संगठन यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (यूएफबीयू) के एक अधिकारी ने कहा कि देश की 1,30,000 शाखाओं में कार्यरत 10 लाख से भी ज्यादा बैंक कर्मचारी हड़ताल में शामिल हैं, जिसके कारण चेक क्लीयरिंग का कामकाज प्रभावित हुआ है.

यूएफबीयू बैंकिंग क्षेत्र में सुधारों और अन्य मुद्दों के खिलाफ विरोध कर रही है.

अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संगठन (एआईबीईए) के महासचिव सी.एच. वेंकटचलम ने कहा, 'हड़ताल पूरी तरह सफल है. बैंक अधिकारियों ने बैंकों के विलय और प्राइवेटाइजेशन की ओर सरकार के कदम के विरोध में पिछली शाम को शाखाओं के बाहर प्रदर्शन किए.'

यह हड़ताल यूएफबीयू और भारतीय बैंक संघ, चीफ लेबर कमिश्नर और वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) के बीच शुक्रवार को बातचीत असफल होने के बाद हुई है.

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने कहा, 'ऑल इंडिया स्टेट बैंक ऑफिसर्स फेडरेशन और ऑल इंडिया स्टेट बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ फेडरेशन यूएफबीयू का हिस्सा होने के नाते हड़ताल में शामिल रहेंगे. हड़ताल के कारण हमारे बैंक के प्रभावित होने की भी संभावना है.'

एआईबीईए ने मंगलवार को जारी एक बयान में कहा कि 17 सूत्री मांगों में प्रमुख मांग सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों को पर्याप्त पूंजी देने से इनकार किए जाने से जुड़ा है, जिससे निजीकरण के हालात हैं.

'प्राइवेटाइजेशन के कारण लोगों को नहीं मिल पाएगा लोन'

एआईबीईए ने कहा, 'बैंकों के निजीकरण का मतलब है कि हमारे बैंकों में मौजूद आम जनता के 80 लाख करोड़ रुपए का निजीकरण हो जाएगा.'

संगठन ने कहा, 'यह देश और जनता के लिए जोखिम भरा है. बैंकों के निजीकरण से कृषि, ग्रामीण विकास, शिक्षा जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को ऋण नहीं मिल पाएगा.'

बयान के मुताबिक, 'आज बैंकों की प्रमुख समस्या 'बैड लोन' का गंभीर स्तर पर बढ़ना है. यह इस समय करीब 15 लाख करोड़ रुपए है, जो कुल ऋण का करीब 20 प्रतिशत है. 'बैड लोन' का काफी बड़ा हिस्सा बड़े औद्योगिक घरानों और कोरपोरेट हाउसों का है.'

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