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देसी ब्रांड नेम को प्रचारित करने का जरिया बना ‘कॉमिक कॉन’

एक दौर था जब लोग अपने किसी उत्पाद के लिए अंग्रेजी के बेहतरीन शब्दों को ब्रांड नेम के तौर पर चुना करते थे, लेकिन नया कारोबार करने वाले अधिकतर युवा अब देसी ब्रांड नेम को तरजीह देते नजर आते हैं

Updated On: Dec 17, 2017 04:34 PM IST

Bhasha

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देसी ब्रांड नेम को प्रचारित करने का जरिया बना ‘कॉमिक कॉन’

एक दौर था जब लोग अपने किसी उत्पाद के लिए अंग्रेजी के बेहतरीन शब्दों को ब्रांड नेम के तौर पर चुना करते थे, लेकिन नया कारोबार करने वाले अधिकतर युवा अब देसी ब्रांड नेम को तरजीह देते नजर आते हैं. दिल्ली के ओखला में चल रहा कॉमिक कॉन ऐसे ही ब्रांड नामों को प्रचारित करने का एक बेहतरीन जरिया बना है.

कॉमिक कॉन में मौजूद ‘फलाना ढिमकाना’ ब्रांड नेम के तहत लुधियाना की कंवल नरुला ‘डोर किल्ली’ (स्ट्रिंग आर्ट) कला के उत्पाद बेचती हैं. कीलों पर विभिन्न रंग के धागों को बांध कर चित्रकारी करने वाली कंवल ने अपने ब्रांड का यह नाम रखने की वजह बताई.

उन्होंने कहा कि पंजाब से हूं. हमारे यहां बहुत सारी बातों को एक साथ कह देने के लिए फलाना-ढिमकाना का उपयोग होता है. तो जैसे कि मेरे खुद के उत्पादों में यह और वह यानी सब कुछ है. तो इस तरह के देसी नाम के साथ स्थानीय लोगों से जुड़ने में बहुत आसानी होती है.

कॉमिक कॉन में अधिकतर युवा अपने स्टार्टअप को लेकर आए हैं

कॉमिक कॉन में अधिकतर युवा उद्यमी गिफ्ट आइटम से जुड़े उत्पादों के स्टार्टअप को लेकर आए हैं. इनमें से अधिकतर एक या डेढ़ साल पुराने स्टार्टअप हैं. लेकिन इन्हीं के बीच एक ‘अग्ली स्वेटर’ ब्रांड नेम की कॉमिक भी है. इसको रचने वाले ब्राइस खुद तो फ्रांस के हैं लेकिन रहते सिंगापुर में है. उनकी कॉमिक्स भारत और आस-पास की देसी संस्कृति पर केंद्रित हैं जिसे लोग पाकिस्तान और अमेरिका में भी पसंद करते हैं.

इस अनोखे से ब्रांड नेम के बारे में ब्राइस ने कहा कि अमेरिका में क्रिसमस से ठीक एक दिन पहले सबसे गंदा स्वेटर (अग्ली) पहनते हैं. यह वहां लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय नाम है. वहां तो लोग इससे जुड़ जाते हैं जबकि भारत एवं अन्य क्षेत्रों के लिए यह बहुत अनोखा सा नाम है जो ग्राहकों को आकर्षित करता है. इसलिए इस तरह का नाम यहां की देसी और भारतीय संस्कृति से एक अलग तरह का जुड़ाव रखता है.

इसी तरह यहां मौजूद तीन साल पुराना एक स्टार्टअप ‘कीप काम देसी’ ब्रांड नेम से अपने उत्पादों को बेचता है. इसके बारे में इसके सह-संस्थापक सार्थक सहगल ने कहा कि हमने यह काम ‘कीप काम टीशर्ट’ नाम से शुरु किया था. लेकिन फिर हम देसी उत्पादों की ओर मुड़ गए और अब हम इसी नाम के साथ आगे बढ़ रहे हैं.

देसी ब्रांड नेम से लोगों से जुड़ना आसान

सहगल ने कहा कि उन्होंने अंग्रेजी नाम के साथ हिंदी को इसलिए मिलाया क्योंकि एक तो यह हमारे उत्पादों की पहचान को सुनिश्चित करता है. दूसरा लोगों को नाम याद रहता है. अंग्रेजी का नाम क्लासी तो होता है लेकिन उसकी ब्रांडिंग में बहुत मेहनत लगती है जबकि देसी नाम होने से लोगों से जुड़ना आसान हो जाता है.

कॉमिक कॉन में ही युवा कारोबारी केतन सिंह अपने ‘क्रेजी बेटा’ नाम के स्टार्टअप के साथ मौजूद हैं. तो मुंबई के साहिल हुसैन और अंशिका गोयल ने ‘आसहोल आइडियाज’ ब्रांड नेम से अपने उत्पाद पेश किए हैं. ग्वालियर के रजनीश गुप्ता यहां विभिन्न तरह के पोस्टर को ‘अप्रैल फूल’ ब्रांड नेम के तहत बेच रहे हैं.

इस तरह के ब्रांड नेम को कॉमिक कॉन में लेकर आने के बारे में ‘आसहोल आइडियाज’ के साहिल हुसैन ने बताया कि इस तरह के उत्पादों का अधिकतर ग्राहक युवा या कॉलेज जाने वाला होता है. कॉमिक कॉन में ऐसे ही लोग ज्यादा आते हैं तो अपने ब्रांड को पहुंचाने के लिए यह एक बेहतरीन जरिया है.

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