S M L

बैंकों को ज्यादा पूंजी देने से सरकार पर 9 हजार करोड़ रुपए का बोझ बढ़ेगा

पूंजी डालने के साथ-साथ बैंकिंग क्षेत्र में सुधारों को भी आगे बढ़ाया जाएगा ताकि ये बैंक वित्तीय प्रणाली में अहम भूमिका निभा सकें

Updated On: Oct 25, 2017 06:00 PM IST

Bhasha

0
बैंकों को ज्यादा पूंजी देने से सरकार पर 9 हजार करोड़ रुपए का बोझ बढ़ेगा

मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन ने कहा कि बॉन्ड के जरिए बैंकों को अतिरिक्त पूंजी उपलब्ध कराने में सरकार को ब्याज के रूप में 9,000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ वहन करना पड़ सकता है.

उन्होंने कहा कि सरकार पर पड़ने वाली इस अतिरिक्त लागत का मुद्रास्फीति पर कोई प्रभाव नहीं होगा. सुब्रमण्यन ने एसजीटीबी खालसा कॉलेज में एक व्याख्यान में कहा कि बॉन्ड पर दी जाने वाली ब्याज की इस लागत को आर्थिक गतिविधियां बढ़ाकर, ऋण आपूर्ति का विस्तार कर और प्राइवेट इंवेस्टमेंट में वृद्धि लाकर पूरा किया जा सकता है.

उन्होंने कहा, '1.35 लाख करोड़ रुपए के पूंजीकरण बॉन्ड जारी करने की वास्तविक वित्तीय लागत करीब 8,000 से 9,000 करोड़ रुपए होगी. लेकिन इस लागत को आर्थिक गतिविधियों में आने वाली अड़चनों को दूर करके अर्थव्यवस्था में विश्वास बढ़ाकर पूरा किया जा सकता है. ऋण की आपूर्ति बढ़े, निजी क्षेत्र के निवेश में वृद्धि हो और कुल मिलाकर आर्थिक वृद्धि की गति तेज हो.'

सुब्रमण्यन ने इस बारे में और विस्तार से समझाते हुए कहा कि IMF और अंतरराष्ट्रीय मानक लेखा के तहत बैंकों को अतिरिक्त पूंजी उपलब्ध कराने के लिए जारी किए जाने वाले बॉन्ड राजकोषीय घाटे को नहीं बढ़ाते हैं. इन्हें इससे अलग वित्तपोषण के तौर पर माना जाता है. हालांकि, भारत के मामले में इस तरह के बॉन्ड उसके राजकोषीय घाटे में जुड़ सकते हैं.

उल्लेखनीय है कि वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को एनपीए के बोझ तले दबे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को पूंजी के आधार पर मजबूत बनाने के लिए 2 साल में 2.11 लाख करोड़ रुपए की पूंजी उपलब्ध कराने की अप्रत्याशित कार्ययोजना की घोषणा की. यह पूंजी बॉन्ड जारी करके, बजट समर्थन के जरिये और इक्विटी बिक्री से जुटाई जाएगी.

1990 में भी जारी किए थे बॉन्ड

सरकार ने इससे पहले 1990 के दशक में इस प्रकार के सार्वजिनक क्षेत्र के बैंकों के लिए पुनर्पूंजीकरण बॉन्ड जारी किए थे. पूंजी डालने के साथ-साथ बैंकिंग क्षेत्र में सुधारों को भी आगे बढ़ाया जाएगा ताकि ये बैंक वित्तीय प्रणाली में अहम भूमिका निभा सकें.

बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि देश की आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए बैंकों को पूंजी उपलब्ध कराना काफी महत्वपूर्ण है. इससे बैंकों से कर्ज प्रवाह बढ़ेगा और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी. रिपोर्ट में कहा गया है, 'बैंकों में नईपूंजी डालने से ब्याज दरें नीचे आएंगी, मांग बढ़ेगी, बंद पड़े कारखानों में काम शुरू होगा और दो-तीन साल में निवेश तेजी से बढ़ेगा.'

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
#MeToo पर Neha Dhupia

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi