विधानसभा चुनाव | गुजरात | हिमाचल प्रदेश
S M L

GST से भी ज्यादा गड़बड़ करने वाला फैसला होगा चेक बैन करना

नोटबंदी और जीएसटी के बाद सरकार डिजिटल भुगतान को एक मानक की तरह बरतना चाहती है. लेकिन क्या हम इसके लिए तैयार हैं?

S Murlidharan Updated On: Nov 23, 2017 11:23 AM IST

0
GST से भी ज्यादा गड़बड़ करने वाला फैसला होगा चेक बैन करना

एक अफवाह फैली है कि रुपए-पैसे के लेन-देन के लिए चेक के इस्तेमाल पर रोक का एक प्रस्ताव तैयार किया गया है. जाहिर है, इससे बहुत से लोग चिंता में होंगे क्योंकि व्यापारी समुदाय रुपए-पैसे के लेन देन के लिए चेक जैसी सुविधाओं के इस्तेमाल पर निर्भर है. मीडिया में आ रही खबरों में कहा गया है कि सरकार डिजिटल लेन-देन को आगे और बढ़ावा देना चाहती है सो बहुत संभव है कि ऐसा प्रस्ताव लाने का फैसला लिया जाए.

अगर ऐसे प्रस्ताव के बारे में छपी खबरें सच हैं तो फिर पक्का समझिए कि यह जीएसटी से कहीं ज्यादा हड़बड़ी में लिया गया फैसला साबित होगा. सेवा और वस्तु कर (गुडस् एंड सर्विसेज टैक्स- जीएसटी) पर अमल बड़े तड़क-भड़क के साथ 1 जुलाई 2017 से शुरू हुआ. उस वक्त कुछ हलकों में चिन्ता जताई जा रही थी कि बिना जमीनी परीक्षण के ही फैसला ले लिया गया. यह भी कहा गया कि इंटरनेट कनेक्टिविटी हर जगह एक जैसी तेज गति से हासिल नहीं होती सो इंटरनेट पर एक्सेस में आने वाली रुकावट एक बाधा की तरह काम करेगी. नतीजा हमारे सामने है- इंटरनेट पर एक्सेस की छोटी-मोटी दिक्कतें जीएसटी को कारगर बनाने की राह में बड़ी बाधा बनकर सामने आई हैं.

डिजिटल ट्रांजेक्शन अभी भी रामभरोसे

नोटबंदी और जीएसटी के बाद सरकार डिजिटल भुगतान को एक मानक की तरह बरतना चाहती है. ब्रिटेन और स्वीडन की तरह बनने में कोई बुराई नहीं है. लेकिन क्या हम इसके लिए तैयार हैं? अगर हम जीएसटी के लिए तैयार नहीं थे तो फिर यह कहना ज्यादा संगत होगा कि पूरे देश में डिजिटाइजेशन के एतबार से हमारी हालत एकदम ही ‘रामभरोसे’ वाली है. जो थोड़ा-बहुत डिजिटल भुगतान होते हमने देखा है वह ज्यादातर शहरी इलाके तक सिमटा है और माबाइल वॉलेट्स से भुगतान करने का तरीका हद से हद खाने-पीने की चीजों के लिए इस्तेमाल में लाया जा रहा है.

online-shopping

बैकिंग के दायरे में लाए गए ग्रामीण लोग अब भी नकदी का ही इस्तेमाल कर रहे हैं. दूसरे शब्दों में कहें तो, सामान मुहैया कर रहे लोगों और दुकानदारों को बैंकों और एटीएम से रुपये निकालकर चुकाना अब भी देश में लेन-देन का सबसे पसंदीदा तरीका है.

ये भी पढ़ें: नोटबंदी के बाद चेकबंदी की तैयारी में मोदी सरकार

एक तरह से देखें तो हमलोग ग्रामीण इलाकों में चेक के चलन को उसके शुरुआती दौर में ही खत्म कर रहे होंगे जबकि देश की आबादी का ज्यादातर हिस्सा अब भी गांवों में ही बसता है.

पहले शहरों से हो शुरुआत

अच्छा होगा कि ‘सिर्फ डिजिटल माध्यम से भुगतान’ का तरीका हमलोग महानगरीय शाखाओं में पायलट के रुप में अपनाए. इसके जरिए ग्रामीण लोगों को यह संदेश भी दिया जा सकेगा कि पूरी दुनिया में डिजिटाइजेशन की तेज लहर चली है और उन लोगों (ग्रामीणों) को भी इसका स्वागत करना चाहिए.

ब्रिटेन में लोगों को खबरदार करने का तरीका अपनाया गया है. ज्यादा ऊंचे मोल के नोट वहां मात्र महज चार घंटे की नोटिस पर चलन से बाहर कर दिए गए. मकसद ये था कि अगर किसी ने ज्यादा नकदी रखी है तो उसे रंगे हाथों पकड़ा जा सके. तो, एक तरह से कह सकते हैं कि ब्रिटेन में ऊंचे मोल के नोटों को अचानक बंद करने के फैसले को जायज ठहराने की एक वजह थी लेकिन वहां अभी यह तय होना बाकी है कि क्या सचमुच इस फैसले का कोई फायदा हुआ.

उम्मीद यही की जाए कि चेक के चलन को हड़बड़ी दिखाते हुए एक झटके में खत्म नहीं किया जाएगा. अच्छा यही कहलाएगा कि किसी मोटे-ताजे पकड़े को एक झटके में मार डालने वाला अंदाज अपनाने से पहले चेक के चलन को देश भर में जड़ जमाने दिया जाए.

digital2

ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की हालत सुधरी है, लेकिन हड़बड़ी की जरूरत नहीं

यह उम्मीद बांधी जा सकती है कि देश अब ऑनलाइन भुगतान के भय से उबर चुका है. सोचा जा सकता है कि क्यों ना भारत को भी स्वीडन की तरह बनाया जाए जहां इंटरनेट और वाई-फाई की जुगलबंदी के सहारे सारे वित्तीय लेन-देन बड़ी आसानी से होते हैं.

ये भी पढ़ें: अब फ्यूचर ग्रुप बेचेगा व्हाट्सऐप पर किराने का सामान

जीएसटी के उलट इस बार हमारे सामने हड़बड़ी दिखाने की कोई वजह नहीं है. अप्रत्यक्ष कर चुकाने का जो पिछला तरीका चला आ रहा था उसमें बड़ी गैर-बराबरी और जटिलताएं थीं. उन्हें देखते हुए जीएसटी को जल्दी से जल्दी लागू करना एक जरुरत थी. लेकिन सार्विक डिजिटल भुगतान (यूनिवर्सल डिजिटल पेमेंट) को पूरे इत्मीनान के साथ समय लेकर लागू किया जा सकता है. इसके लिए देखा जाना चाहिए कि हर कोई तैयार है या नहीं और साथ ही सबको विश्वास में लेना जरुरी है. जायदाद (जिसमें फ्लैट भी शामिल है) के खरीदारों को चेक जारी करने और बैंक के बने ड्राफ्ट पाने की छूट होनी चाहिए.

सरकार इस बात के लिए बधाई की हकदार है कि वह खुद ही सबसे आगे बढ़कर मिसाल पेश कर रही है और पूरा जोर लगा रही है कि सरकारी विभागों और सरकारी कंपनियों में भुगतान के लिए सिर्फ डिजिटल तरीका अपनाया जाए. इसका निजी क्षेत्र की बड़ी कंपनियों पर सकारात्मक असर हुआ है.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi