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यूनिवर्सल बेसिक इनकम के जरिए 2019 की जंग जीत सकती है मोदी सरकार

तीन प्रमुख हिंदी भाषी राज्यों में मिली हार के बाद बीजेपी यूनिवर्सल बेसिक इनकम (UBI) पर बड़ा ऐलान कर सकती है. अगर यह योजना लागू हो जाती है तो जल्द ही केंद्र सरकार किसानों, बेरोजगार युवक युवतियों को हर महीने एक फिक्स सैलरी देने लगेगी

Updated On: Dec 26, 2018 02:15 PM IST

FP Staff

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यूनिवर्सल बेसिक इनकम के जरिए 2019 की जंग जीत सकती है मोदी सरकार

तीन प्रमुख हिंदी भाषी राज्यों में मिली हार के बाद बीजेपी यूनिवर्सल बेसिक इनकम (UBI) पर बड़ा ऐलान कर सकती है. अगर यह योजना लागू हो जाती है तो जल्द ही केंद्र सरकार किसानों, बेरोजगार युवक युवतियों को हर महीने एक फिक्स सैलरी देने लगेगी. इसका मकसद लोगों के जीवन यापन को आसान करना है. इसके साथ ही बीजेपी की केंद्र सरकार कांग्रेस के किसान कर्ज माफी जैसे चर्चित वादे का तोड़ भी निकाल लेगी.

कहा जा रहा है कि इस प्लान को लागू करने के मामले पर प्रधानमंत्री मोदी के साथ मंत्रिमंडल के अन्य सदस्य बैठक करने वाले हैं. इस बैठक से पहले सभी मंत्रालयों से यूनिवर्सल बेसिक इनकम के बारे में सुझाव मांगे गए हैं. अगर सबकुछ ठीक रहा है तो वित्त मंत्री अरुण जेटली इस साल के अंतरिम बजट में यूबीआई पर कुछ बड़ा ऐलान कर सकते हैं.

कुछ ही महीने बाद होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले इस योजना को लागू करना भी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती होगी क्योंकि सरकार के पास काफी कम समय बचा है. इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक, सरकार चुनाव प्रचार को ध्यान में रखते हुए इस योजना को पूरे देश में नहीं लागू करना चाहती है. तरीके से बनाए गए योजना के मुताबिक, इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर कुछ ही जिलों में लागू करने पर विचार हो रहा है. अगर ऐसा होता है तो पार्टी को इसका सीधा लाभ मिलेगा और वो वोटर्स को अपने तरफ करने में कामयाब होगी.

कुछ जिलों में इस योजना को लागू करने के बाद बीजेपी इस वादे से चुनाव मैदान में जाएगी कि अगर हम दोबारा सत्ता में आते हैं तो पूरे देश में इसे लागू करेंगे.

क्या है यूनिवर्सल बेसिक इनकम (Universal Basic Income)

यूनिवर्सल बेसिक इनकम कोई नया आइडिया नहीं है. 2016-17 के आर्थिक सर्वेक्षण में इस विचार को पेश किया गया था. उस समय इस बारे में कहा गया था कि अगर इसे लागू नहीं किया जा सकता है तो इस पर चर्चा जरूर होनी चाहिए.

- यूबीआई लागू हो जाने के बाद देश के हर नागरिक के बैंक खाते में सीधे एक फिक्स्ड अमाउंट ट्रांसफर किया जाएगा.

- इस योजना के तहत लोगों की सामाजिक और आर्थिक अवस्था मायने नहीं रखती है.

- यूबीआई की सबसे खास बात है कि यह सबके लिए होगा. यह किसी खास वर्ग को टारगेट करके नहीं लागू किया जाएगा.

- यह बिना शर्तों का होगा यानी किसी व्यक्ति को अपनी रोजगार की स्थिति या सामाजिक-आर्थिक स्थिति को साबित करने की जरूरत नहीं होगी.

- यूबीआई के तहत सिर्फ जीरो इनकम वाले लोगों को ही इस सुविधा का पूरा लाभ मिलेगा.

-ऐसे लोग जिनकी बेसिक इनकम के अलावा भी आमदनी का जरिया होगी, उनके इनकम पर टैक्स लगाकर सरकार फायदे को कंट्रोल करेगी.

2016-17 के इकोनॉमिक सर्वे में कहा गया है कि सिर्फ केंद्र सरकार की ही करीब 950 योजनाएं चलती हैं, जिस पर जीडीपी का करीब पांच फीसदी खर्च होता है. इसके अलावा भी सरकार कई योजनाओं को मिलाकर जीडीपी का करीब 3 प्रतिशत खर्च करती है.

आर्थिक सर्वे में यह भी कहा गया था कि इसके माध्यम से हर आंख से आंसू पोछने के महात्मा गांधी का उदेश्य भी पूरा हो जाएगा. इस योजना के तहत पैसे सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में जाएगा और लाल फीताशाही या ब्यूरोक्रेसी से निजात भी मिलेगी.

क्यों यूबीआई (UBI) को लागू करने पर विचार कर रही है सरकार

सामाजिक सुरक्षा के रूप में यूबीआई असमानता को कम करने और गरीबी को दूर करने में मदद करेगा. इस प्रकार यह सभी व्यक्तियों के लिए सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने वाली योजना है. जैसे-जैसे आदमी द्वारा किए जाने वाले कार्यों को टेक्नोलॉजी खत्म कर रही है और इस कारण मजदूरों के आय में कमी हो रही है. उसे कम करने में यूबीआई मददगार हो सकता है.

इसके अलावा सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार इस योजना के माध्यम से राजनीतिक लाभ लेने की भी सोच रही है. कांग्रेस के किसान कर्ज माफी की योजना ने पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी है. बीजेपी देशभर में किसान कर्ज माफी के पक्ष में नहीं है ऐसी स्थिति में पार्टी के लिए यह योजना काफी कारगर साबित हो सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि 2019 लोकसभा चुनाव से पहले सरकार इसे लागू करने में सफल होती है तो यह पार्टी के लिए जीत दिलाने वाली योजना साबित होगी.

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