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रियल एस्टेट बजट इंपैक्ट: जानिए क्यों अब आपको देना होगा कम टैक्स?

फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली ने बजट में सर्किल रेट्स से 5 फीसदी कम वैल्यू पर प्रॉपर्टी खरीदने-बेचने की इजाजत दे दी है, जानिए आप पर इसका क्या असर होगा

Updated On: Sep 05, 2019 05:30 PM IST

Pratima Sharma Pratima Sharma
सीनियर न्यूज एडिटर, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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रियल एस्टेट बजट इंपैक्ट: जानिए क्यों अब आपको देना होगा कम टैक्स?

बजट में हुए ऐलान की बारीकियों से समझाने के लिए हम यह सीरीज शुरू कर रहे हैं. इसमें हम बजट में हुए ऐलान और उनका आपकी जिंदगी पर क्या असर होगा, यह आसान शब्दों में बताएंगे.

बजट में ऐलान: फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली ने बजट में सर्किल रेट्स से 5 फीसदी कम वैल्यू पर प्रॉपर्टी खरीदने-बेचने की इजाजत दे दी है.

आप पर असर: पिछले कुछ साल में कई शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतों में गिरावट आई है. लिहाजा सरकार की तरफ से तय सर्किल रेट्स से कम दाम पर प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री हुई.

इस गैप की वजह से टैक्स कैलकुलेट करने में दिक्कत आती थी. लिहाजा सरकार ने सर्किल रेट से 5 फीसदी कम दाम पर प्रॉपर्टी बेचने की इजाजत दे दी है. अभी तक होता यह था कि अाप किसी भी रेट पर प्रॉपर्टी बेचे लेकिन, स्टैंप ड्यूटी और कैपिटल गेन टैक्स का कैलकुलेशन सर्किल रेट के हिसाब से ही होता है.

अब सरकार ने सर्किल रेट से 5 फीसदी कम पर भी प्रॉपर्टी बेचने की इजाजत दे दी है. यानी अब स्टैंप ड्यूटी और कैपिटल गेन का कैलकुलेशन भी इसी हिसाब से होगा. लिहाजा अगर आपकी प्रॉपर्टी की वैल्यू कम है तो उस पर टैक्स भी कम देना होगा.

क्या थी टैक्स की मुश्किल?

मौजूदा नियम के मुताबिक, अगर कोई प्रॉपर्टी सर्किल रेट से कम भाव पर बिकती है तो इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को सेल्स वैल्यू और सर्किल रेट आधारित वैल्यू में फर्क नजर आता है. दोनों की कीमत में जो फर्क होता है, आईटी डिपार्टमेंट उसे  बेहिसाब संपत्ति मानकर खरीदार और विक्रेता दोनों पर टैक्स लगाता है.

क्या है सर्किल रेट? 

टैक्स से बचने के लिए पहले प्रॉपर्टी की कीमत पेपर पर कम बताकर डील की जाती थी. यानी अगर किसी प्रॉपर्टी की वैल्यू 50 लाख रुपए है तो पेपर पर उसकी वैल्यू 20 लख रुपए बताकर डील की जाती थी. इसी भाव के आधार पर स्टैंप ड्यूटी और कैपिटल गेन टैक्स भी तय होता है. इस तरह टैक्स बचाने की कोशिशों पर लगाम लगाने के लिए ही सरकार ने सर्किल रेट तय किया था. प्रॉपर्टी की कीमत या सर्किल रेट, दोनों में से जो सबसे ज्यादा होगा स्टैंप ड्यूटी उस वैल्यू पर देनी होगी. यानी किसी भी सूरत पर सर्किल रेट से कम पर रजिस्ट्री नहीं हो सकती है. लेकिन इस बार अरुण जेटली ने सर्किल रेट से 5 फीसदी कम पर भी रजिस्ट्री कराने की अनुमति देकर राहत दे दी है.

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