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Budget 2019: क्या आखिरी ओवर से लोकसभा चुनाव का मैच जीत पाएगी मोदी सरकार?

हाल में कुछ राज्यों के विधानसभा चुनावों में मिली हार के बाद सरकार वोटरों को लुभाने की हरमुमकिन कोशिश में जुटी है.

Updated On: Jan 17, 2019 10:01 PM IST

Abhishek Aneja

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Budget 2019: क्या आखिरी ओवर से लोकसभा चुनाव का मैच जीत पाएगी मोदी सरकार?

1 फरवरी 2019 वह तारीख होगी, जब मोदी सरकार के 5 साल के कार्यकाल का आखिरी बजट पेश किया जाएगा. बहरहाल, चूंकि अगले 3-4 महीने में लोकसभा चुनाव होने हैं, लिहाजा यह बजट पूर्ण बजट का दस्तावेज नहीं होने जा रहा है, जिसे मोदी सरकार के 2014 में सत्ता में आने के बाद उसकी तरफ से लगातार पेश किया है. बजट 2019 'वोट ऑन एकाउंट (लेखानुदान)' होने की संभावना है, जिसमें अंतरिम अवधि के लिए फंडों के आवंटन का मामला शामिल होगा. अंतरिम अवधि का मतलब नई सरकार के शपथ लेने और उसके बाद इस सरकार के जरिए पूरे साल के लिए वित्त विधेयक पेश करने तक की अवधि से है. आम चुनाव के बाद नई सरकार के जरिए बाद में पूर्ण बजट पेश किया जाएगा. ऐसी परिस्थितियों में 'लेखानुदान' टैक्स या विकास के नजरिए से उतना महत्वपूर्ण नहीं हो सकता है. हालांकि, राजनीतिक नजरिए से यह खासा अहम हो सकता है.

चूंकि इनकम टैक्स या जीएसटी कानून में किसी भी तरह के बदलाव के लिए ज्यादा गुंजाइश नहीं है, इसलिए वित्त मंत्री सिर्फ कस्टम ड्यूटी के कुछ प्रावधानों में बदलाव कर सकते हैं या टैक्स नियमों में कुछ छोटे-मोटे बदलाव का प्रस्ताव कर सकते हैं. वह अर्थव्यवस्था में ग्रोथ को बढ़ावा देने के मकसद से विनिर्माण और कृषि क्षेत्र निश्चित पैकेज का ऐलान कर सकते हैं. निर्यातकों के लिए कुछ फायदे या पैकेज की उम्मीद भी की जा सकती है. दरअसल, ज्यादातर निर्यातकों को वैश्विक मंदी की मार झेलनी पड़ी है और उन्हें जीएसटी रिफंड से जुड़े दिक्कतों का भी सामना करना पड़ा है. इस तरह के उपाय से इस तरह का संदेश दिया जा सकता है कि सरकार आर्थिक रिकवरी और रोजगार सृजन को लेकर गंभीर है. इसके अलावा, बजट भाषण में मोदी सरकार के पिछले 5 साल के शासन की उपलब्धियों का सार भी शामिल हो सकता है. साथ ही, इसमें नए वादों और इससे जुड़े बयानों का भी जिक्र हो सकता है,जो भारतीय जनता पार्टी के लिए आगामी लोकसभा चुनावों की खातिर एजेंडा तैयार कर सकते हैं.

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इसके अलावा, कुछ मीडिया रिपोर्ट में इस बात के भी संकेत मिल रहे हैं कि महज 'लेखानुदान' होने के अलावा इस बजट में और कुछ हो सकता है. लिहाजा, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वित्त मंत्री वोटरों खास तौर पर मध्य वर्ग को लुभाने के लिए बजट 2019 में किसी तरह का कदम उठा सकते हैं और विपक्ष पर बढ़त बनाने के लिए आखिरी ओवर में कोई छक्का लगा सकते हैं?

Union Budget 2018-19

इनकम टैक्स से संबंधित कुछ प्रस्ताव इस तरह हैंः

1. टैक्स के लिए न्यूनतम छूट की आय सीमा को मौजूदा 2.5 लाख रुपए से बढ़ाकर 5 लाख रुपए किया जाए. साथ ही निजी करदाताओं के लिए डायरेक्ट टैक्स स्लैब में भी बदलाव किया जाए

नोटंबदी के बाद टैक्स को लेकर बुनियादी छूट की सीमा को बढ़ाकर 5 लाख करने और इसे ध्यान में रखते हुए टैक्स ढांचे को तर्कसंगत बनाने की मांग की जाती रही है, जिसे अब तक वित्त मंत्री के जरिए पूरा नहीं किया गया है.

2. सभी कंपनियों के लिए इनकम टैक्स से जुड़े कॉरपोरटे टैक्स रेट को घटाकर 25 फीसदी तक किया जाए

बीजेपी सरकार ने अधिकतम कॉरपोरेट टैक्स रेट को घटाकर 25 फीसदी तक लाने का वादा किया था, लेकिन अब तक इस दर की पेशकश सिर्फ वैसी कंपनियों के लिए जिनका टर्नओवर सिर्फ 250 करोड़ रुपए तक है. अगर इस प्रस्ताव पर आगामी बजट में अमल किया जाता है तो निश्चित तौर पर इससे शेयर बाजार को काफी बढ़ावा मिलेगा.

3. इनकम टैक्स के सेक्शन 80सी के तहत कटौतियों की सीमा को बढ़ाकर 2.50 लाख रुपए किया जाए

सेक्शन 80सी के तहत कटौती मुख्य तौर पर निजी करदाताओं और हिंदू अविभाजित परिवारों को एलआईसी, म्यूचुअल फंड, होम लोन, बच्चों की ट्यूशन फीस आदि के भुगतान आदि के मामले में मिलती है. 80सी के तहत छूट की अधिकतम सीमा काफी समय से 1.50 लाख रुपए है और इसे बढ़ाकर 2.50 रुपए करने की मांग लंबे समय से चलती आ रही है.

4. एंजेल टैक्स को हटाना

मोदी सरकार भले ही 'मेक इन इंडिया' और 'स्टार्टअप इंडिया' कार्यक्रमों को बढ़ावा दे रही है, लेकिन साथ ही इनकम टैक्स विभाग स्टार्टअप के जरिए निवेशकों से मिले फंड पर टैक्स के लिए इन कंपनियों के पीछे पड़ जाता है, अगर यह शेयरों के उचित बाजार मूल्य से ज्यादा है. इस मुद्दे पर ध्यान आकर्षित कराए जाने के बाद वित्त मंत्रालय ने इनकम टैक्स विभाग को निर्देश दिया कि जब तक इस सिलसिले में नीति को अंतिम रूप नहीं दिया जाता, तब तक स्टार्टअप के खिलाफ जबरन कार्रवाई नहीं की जाए. इसे बजट प्रस्ताव के रूप में माना जा सकता है और यह बाजार के माहौल को बेहतर बनाएगा.

Narendra Modi Taking Oath

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हाल में कुछ राज्यों के विधानसभा चुनावों में मिली हार के बाद सरकार वोटरों को लुभाने की हरमुमकिन कोशिश में जुटी है. 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली के पास अपनी पार्टी के लिए आखिरी ओवर खेलने का यह आखिरी मौका होगा और वोटरों को फिर से हासिल करने और अर्थव्यवस्था के माहौल को बेहतर बनाने में किसी तरह की चूक के कारण बीजेपी के लिए सत्ता में वापसी मुश्किल हो सकती है. मैदान तैयार है और यह देखना दिलचस्पा होगा कि वह शॉट लगा पाते हैं या बॉल चूकते हैं.

(लेखक चार्टर्ड एकाउंटेंट हैं. यहां व्यक्त विचार उनकी निजी राय है)

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