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मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए खुशखबरी: इनकम टैक्स छूट की सीमा बढ़कर 3 लाख हो सकती है

2019 के लोकसभा चुनाव से पहले सरकार इस बड़े फैसले से मध्यमवर्गीय परिवारों का दिल जीतना चाहती है

Updated On: Jan 10, 2018 11:37 AM IST

FP Staff

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मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए खुशखबरी: इनकम टैक्स छूट की सीमा बढ़कर 3 लाख हो सकती है

इस साल के बजट में मध्यमवर्गीय परिवारों को बड़ी राहत मिल सकती है. वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक मंत्रालय इनकम टैक्स में छूट का दायरा बढ़ाने पर विचार कर रहा है. उम्मीद की जा रही है कि इनकम टैक्स छूट की सीमा 2.5 लाख से बढ़ाकर 3 लाख की जा सकती है. यानी 3 लाख की आय तक इनकम टैक्स देने की जरूरत नहीं रह जाएगी.

बिजनेस टुडे की खबर के मुताबिक आयकर सीमा में छूट के साथ ही टैक्स स्लैब में बदलाव की कोशिशें भी चल रही है ताकि टैक्स पेयर्स पर दबाव कम हो सके. कहा जा रहा है कि सरकार जानती है कि टैक्स पेयर्स महंगाई से जूझ रही है. इसलिए कोशिश की जा रही है कि टैक्स में बदलाव करके जनता के बीच अच्छा संदेश दिया जा सके.

2019 के लोकसभा चुनाव से पहले सरकार इस बड़े फैसले से मध्यमवर्गीय परिवारों का दिल जीतना चाहती है. जीडीपी और आर्थिक प्रगति के आंकड़ों में उलझी जनता को टैक्स छूट का लाभ देकर एक अच्छा संदेश देने की कोशिश की जाएगी.

पिछले साल के बजट में वित्तमंत्री अरुण जेटली ने थोड़ी राहत दी थी. 2.5 लाख से 5 लाख तक की सालाना आय वाले टैक्सपेयर्स के लिए 10 फीसदी इनकम टैक्स से घटाकर 5 फीसदी किया गया था.

सूत्रों के मुताबिक इस बार वित्त मंत्री एक फरवरी को पेश होने वाले बजट में टैक्स स्लैब में बड़ा बदलाव कर सकते हैं. पांच से दस लाख रुपये की सालाना आय को दस प्रतिशत टैक्स दायरे में लाया जा सकता है. साथ ही 10 से 20 लाख रुपये की आय पर 20 प्रतिशत और 20 लाख रुपये से अधिक की सालाना आय पर 30 प्रतिशत की दर से इनकम टैक्स लगाया जा सकता है.

उद्योग मंडल सीआईआई ने अपने बजट से पहले दिए ज्ञापन में कहा है कि मुद्रास्फीति की वजह से आम जिंदगी बिताने की लागत में बढ़ोतरी हुई है. जिसके चलते कम आय वालों लोगों को टैक्स में छूट मिलनी चाहिए. टैक्स छूट की सीमा बढ़ाई जानी चाहिए और स्लैब में भी बदलाव किया जाना चाहिए.

उद्योग जगत ने कंपनियों के लिए कंपनी टैक्स में कमी किए जाने की मांग रखी है. इसे 25 प्रतिशत किए जाने की मांग उठ रही है. लेकिन सरकार के सामने ऑप्शन सीमित हैं. जीएसटी लागू होने के बाद सरकार की अप्रत्यक्ष कर वसूली पर दबाव बढ़ा है.

इस साल के बजट में राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 3.2 फीसदी पर रखने का लक्ष्य है.

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