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कितनी कारगर होगी BS-VI पेट्रोल-डीजल लाने की सरकार की स्कीम?

पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय ने कहा है कि बीएस सिक्स्थ ग्रेड का ईंधन अगले साल अप्रैल से दिल्ली में उपलब्ध हो जाएगा. समय सीमा अप्रैल 2020 तय की गई थी

Sindhu Bhattacharya Updated On: Nov 17, 2017 11:11 AM IST

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कितनी कारगर होगी BS-VI पेट्रोल-डीजल लाने की सरकार की स्कीम?

क्लीनर फ्यूल यानी स्वच्छ ईंधन का अर्थ है बेहतर वायु गुणवत्ता. उत्सर्जन की कम मात्रा और सबके लिए सुकून. दिल्ली और पड़ोसी राज्यों को हर साल सर्दियों में घेर लेने वाले जानलेवा स्मॉग या प्रदूषण से लड़ने के लिए अब यह आवश्यक हो गया है कि हम अपने वाहनों से उत्सर्जित होने वाले धुएं में सुधार करें.

इस क्रम में, सरकार की तरफ से वर्तमान में उपयोग किए जा रहे बीएस फोर्थ ग्रेड ईंधन की जगह सीधे बीएस सिक्स्थ ग्रेड में ले जाने का प्रयास सराहनीय है. सरकार ने बीएस फिफ्थ ग्रेड और पहले से तय समय सीमा की उपेक्षा करते हुए यह कदम उठाया है.

पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय ने कहा है कि बीएस सिक्स्थ ग्रेड का ईंधन अगले साल अप्रैल से दिल्ली में उपलब्ध हो जाएगा. गौरतलब है कि पहले इसकी समय सीमा अप्रैल 2020 तय की गई थी. लेकिन अब तेल शोधक कंपनियां बीएस सिक्स्थ ग्रेड का स्वच्छ ईंधन दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में अप्रैल 2019 में ही उपलब्ध करा देंगी.

2020 के पहले उपलब्ध नहीं?

हालांकि, उसने पूरे देश में इसकी उपलब्धता पर फिलहाल कुछ नहीं कहा है. यानी दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में भले ही उच्च गुणवत्ता वाला ईंधन 2019 में मिलने लगेगा लेकिन देश के बाकी हिस्सों को उच्च गुणवत्ता वाले ईंधन के लिए 2020 या इसके बाद तक इंतजार करना पड़ेगा. जाहिर है, दिल्ली वालों के लिए यह एक खुशखबरी है लेकिन देश के बाकी नागरिकों को इससे लाभ नहीं होगा.

इसके अलावा, जबकि तेल शोधक कंपनियां दिल्ली में बीएस सिक्स ग्रेड का ईंधन सप्लाई करने के लिए 2020 की निर्धारित समय सीमा से दो साल पहले ही बेहतर उपकरणों से सुसज्जित होंगी, तो ऑटोमोबाइल कंपनियों के उत्पादन की कार्य योजना क्या होगी? चूंकि इसमें बड़े वित्तीय निवेश की जरूरत होगी, तो यह उम्मीद करना मूर्खता होगी कि कार और दोपहिया वाहन बनाने वाली कंपनियां अचानक ही बीएस सिक्स ग्रेड के इंजन बनाने लगेंगी. लगता नहीं कि वाहन निर्माता इतनी जल्दी परिवर्तन कर सकेंगे, इसके बावजूद कि वर्तमान में भी सिक्स ग्रेड वाहनों का निर्माण उनके निर्यात का हिस्सा है.

यहां तक कि दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन में भी इस परिवर्तन के लिए समय लगेगा क्योंकि बसों आदि के अनुबंध लंबे समय के लिए हैं. यह राहत की बात है कि स्वच्छ ईंधन वाले मौजूदा निजी और सार्वजनिक वाहन दिल्ली की सीमा में ही चलेंगे. इसका अर्थ होगा कि सल्फर के उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी.

दिल्ली के बाहर का क्या?

एक समस्या और है. अगली गर्मियों में जब दिल्ली में बीएस सिक्स्थ ग्रेड का ईंधन उपलब्ध हो जाएगा, तो दिल्ली के बाहर इन वाहनों को ईंधन कैसे मिलेगा? यह भी याद रखिए, बीएस सिक्स इंजन अपने से निम्न श्रेणी के बीएस फोर ईंधन पर काम नहीं करेगा. जबकि दिल्ली और बाद में एनसीआर के अलावा यह ईंधन देश में किसी भी सर्विस स्टेशन पर दशक बदलने के बाद भी उपलब्ध नहीं होगा. मजबूरी का यह दूसरा कारण है जिसके चलते वाहन निर्माता कंपनियां कुछ महीनों की छोटी सी अवधि में बीएस फोर वाहनों के निर्माण करने से हिचकिचाएंगी.

Arteon cars by German carmaker Volkswagen are pictured during a media presentation in Hanover, Germany, May 31, 2017. REUTERS/Fabian Bimmer - RTX38EBK

इस छोटे से टुकड़े में टोयटा किर्लोस्कर मोटर के एक शीर्ष अधिकारी कह रहे हैं कि बीएस सिक्स ईंधन के उपयोग से मौजूदा वाहनों में ईंधन वाले प्रदूषण कणों में ‘मामूली सुधार’ होगा. जैसा कि उच्च गुणवत्ता के ईंधन में किसी कम उत्सर्जन नियंत्रक उपकरण से होता है. 'एक बीएस सिक्स इंजन केवल बीएस सिक्स ईंधन पर ही काम कर सकता है, जबकि बीएस फोर इंजन को इससे नुकसान होगा.' टोयोटा किर्लोस्कर के वाइस चेयरमैन शेखर विश्वनाथन कहते हैं, 'अगर आप बीएस सिक्स ईंधन से बीएस फोर इंजन चलाएंगे, तो प्रदूषण में कमी का लाभ अधिकांश रूप में नष्ट हो जाएगा.' तो, जब तक कि बीएस फोर वाहनों में बीएस सिक्स ईंधन उपयोग होगा, बेहतर ईंधन के लिए निर्धारित समय सीमा की तरफ मामूली प्रगति ही मिलेगी.

ऑटोमाबाइल इंडस्ट्री लॉबी ग्रुप सिआम (SIAM) ने यह कहते हुए बीएस सिक्स पर सरकार के कदम का स्वागत किया है कि 'यह काम सही दिशा में एक कदम है, जैसा कि विकसित देशों में यह पहले ही हो चुका है, जहां वाहनों के लिए उच्च उत्सर्जन के नियम, उच्च गुणवत्ता वाले ईंधन की उपलब्धता से आमतौर पर दो वर्ष पहले ही सुनिश्चित कर दिए जाते हैं. बीएस सिक्स ईंधन ऑटो इंडस्ट्री में विश्वास जगाएगा कि देश भर में यह 1 अप्रैल 2020 से उपलब्ध हो जाएगा. तब तक ऑटो इंडस्ट्री राष्ट्रीय स्तर पर पूरी तरह बीएस सिक्स वाले वाहनों का निर्माण शुरू कर देगी.'

जैसेकि बयान से पुष्टि होती है, यह उद्योग अब भी यह मानता है कि बीएस सिक्स वाहन 2020 में ही उपलब्ध होंगे, उससे पहले नहीं.

क्या हैं रुकावट?

बहरहाल, अप्रैल 2018 से दिल्ली में बीएस फोर ईंधन की उपलब्धता इस क्षेत्र में वाहन निर्माताओं के लिए 2020 की डेडलाइन तक बीएस सिक्स वाहनों के लिए पूरी तैयारी कर लेने का एक अवसर है. सिआम ने यह भी कहा कि बीएस सिक्स ईंधन का उपयोग सल्फर की मात्रा कम करके राष्ट्रीय राजधानी में किसी सीमा तक वाहनों से कणों के उत्सर्जन में सुधार करेगा. 'इसके अलावा, अगर सरकार एनसीआर में प्रभावी तरीके से बीएस टू और उससे पहले के विंटेज वाहनों को पूरी तरह खत्म करने का आदेश लागू करती है, तो क्षेत्र में वाहनों से होने वाले प्रदूषण में बड़ी कमी आएगी.'

People walk amidst rows of parked cars in New Delhi

सेंटर फॉर साइंस ऐंड एनवायरनमेंट (CSE) संस्था, जिसने पर्यावरण संबंधी मुद्दों पर खासा काम किया है, ने दिल्ली में सरकार के कदम का स्वागत किया है लेकिन इस तरफ भी इशारा किया है कि संबंधित मंत्रालय ने वायु प्रदूषण कम करने के लिए अब तक जो कदम उठाए हैं, वह बीएस सिक्स ईंधन को पहले लाने के प्रयासों के अनुकूल नहीं है.

एक बयान में, सीएसई ने कहा है 'पर्यावरण और वन मंत्रालय ने पर्यावरणीय प्रदूषण अधिकरण (सावधानी और नियंत्रण) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में स्वच्छ हवा के लिए व्यापक कार्य योजना का बार-बार शपथपत्र दिया है कि उद्योग और विक्रेता, दोनों 1 अप्रैल 2020 से बीएस सिक्स आदर्श वाला उत्पाद बनाएं. मंत्रालय ने अपने शपथपत्र में यह भी कहा कि बीएस फोर से सीधे बीएस सिक्स में छलांग से जटिलताएं और चुनौतियां बढ़ेंगी. अगर रजिस्ट्रेशन की तिथि बदली जाती है तो वाहन निर्माताओं को मात्र दो साल मिलेंगे, जबकि 1 अप्रैल 2020 तक देश भर में बीएस सिक्स ईंधन भी उपलब्ध नहीं होगा.'

इस तरह सरकार की अपने ही भीतर आगे पीछे होने की दुविधा दो साल में बीएस सिक्स तक प्रगति की समय सीमा तय करेगी.

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