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जानिए क्या है 'ब्लैक फ्राइडे' का इतिहास और इस दिन क्यों दिए जा रहे हैं शॉपिंग के ऑफर्स

1952 में फ़िलाडैल्फ़िया की पुलिस ने इस दिन को पहली बार ब्लैक फ्राइडे का नाम दिया था

Updated On: Nov 23, 2018 02:03 PM IST

FP Staff

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जानिए क्या है 'ब्लैक फ्राइडे' का इतिहास और इस दिन क्यों दिए जा रहे हैं शॉपिंग के ऑफर्स

आज ब्लैक फ्राइडे है. ब्लैक फ्राइडे के मौके पर अमेरिका में ऑनलाइन शॉपिंग के ऑफर्स दिए गए हैं. अमेरिका में लोग इसे खरीदारी के मौके के तौर पर देख रहे हैं. यहां तक कि भारत में भी ब्लैक फ्राइडे के दिन एमेजॉन और पेटीएम जैसी कंपनियां ऑफर्स दे रही हैं. हालांकि ब्लैक फ्राइडे दुनिया में एक काले दिन के बतौर दर्ज है.

'ब्लैक फ्राइडे' का नाम सबसे पहले 24 सितम्बर, 1869 में सुना गया था. उस समय यह दिन खरीदारी का नहीं बल्कि आर्थिक मंदी को दर्शाता था. ऐसा तब हुआ जब दो फाइनेंसर्स, जय गोल्ड और जिम फिस्क ने मिलकर उतना सोना खरीद लिया जितना उनके हद में था. उनका मानना था की ऐसा करने से सोने का भाव बहुत ऊपर चला जाएगा और ऐसा होने पर वो सारा सोना महंगे दामों में बेच कर अच्छी कमाई कर लेंगे. 1869 के सितम्बर के उस शुक्रवार के दिन स्टॉक मार्केट ठप्प हो गया, और कई लोगों का दिवाला निकल गया. तब से वो दिन काले अक्षरों में लिख दिया गया और नाम पड़ा 'ब्लैक फ्राइडे'.

हिस्ट्री के मुताबिक इस ब्लैक फ्राइडे के पीछे की कहानी कुछ और है. दरअसल यूनाइटेड स्टेट्स में नवंबर का आखिरी गुरुवार, थैंक्स गिविंग की तरह मनाया जाता है. इस दिन सभी लोग अपने रिश्तेदारों और करीबी दोस्तों से मिलते हैं और अच्छा समय बिताते हैं. इस दिन के अगले दिन यानी शुक्रवार के दिन लोग क्रिसमस के लिए खरीदारी करना शुरू कर देते हैं. पहले कभी इस दिन को कोई नाम नहीं दिया गया था.

1952 में फिलेडैल्फिया की पुलिस ने इस दिन को पहली बार ब्लैक फ्राइडे का नाम दिया. ऐसा वहां की पुलिस ने इसलिए किया क्योंकि उस साल की सेल में हद से ज्यादा लोग सड़कों पर उतर आए. इसके बाद पूरे शहर में इतनी भीड़ हो गई जो पुलिस के संभालने में नहीं आ रही थी.

1961 तक आते-आते, 'ब्लैक फ्राइडे' नाम फिलेडैल्फिया के लोगों की जुबान पर चढ़ गया. हालांकि, वहां के व्यापारी इस नाम से बिलकुल खुश नहीं थे, क्योंकि यह नाम सुनने में इतिहास के एक खराब दिन जैसा लगता है. उस समय व्यापारी इस दिन का नाम 'ब्लैक फ्राइडे' से बदल कर 'बिग फ्राइडे' करना चाहते थे. उन सभी व्यापारियों की कई कोशिशों के बाद भी इस दिन का नाम बदल नहीं पाया और लोग इसे ब्लैक फ्राइडे ही कहते रहे.

लेकिन ऐसा पूरे देश में नहीं था. इस दिन को पूरे देश में ब्लैक फ्राइडे नाम मिलने में और 20 साल लग गए. 1985 तक आते-आते यह नाम पूरे देश में फैल गया. अब तक व्यापारी समझ चुके थे की इस दिन का नाम बदल पाना लगभग नामुमकिन हो गया है. इसके बाद सभी व्यापारियों ने फैसला किया की इस नाम को वो सभी पॉजिटिव बना देंगे.

इस नाम को पॉजिटिव बनाने का व्यापारियों ने यह उपाय निकाला कि, उनको होने वाले नुकसान को वो सभी लाल रंग से दर्शाएंगे और फायदे या प्रॉफिट का रंग होगा 'ब्लैक'. तब से लगभग सभी व्यापारियों ने इस दिन पर तमाम प्रोडक्ट्स पर भारी छूट देना शुरू कर दिया. हालाँकि इस दिन पर मिलने वाली छूट के कारण जो भीड़ होती है, उसकी वजह में कई हिंसात्मक घटनाए भी सामने आती रही हैं. 2010 से इन घटनाओं में 5 लोग अपनी जान गवा चुके हैं और 100 लोगों से ज्यादा घायल हो चुके हैं.

जल्द ही ये नेगिटिव नाम पॉजिटिव नाम में बदल गया और लोग धीरे-धीरे इस नाम को मिलने वाली फिलेडैल्फिया की वजह को भूल गए. समय के चलते यह दिन दुनिया भर में प्रसिद्ध हो गया और यूनाइटेड स्टेट्स के अलावा कुछ और देशों में भी इसी तरह की सेल लगने लगी. भारत में भी ये सेल लगी है. भारत में होने वाली सेल के बारे में जानने के लिए यहाँ क्लिक करें.

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