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डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन डिक्लाइन होने पर भी पैसे काट रहे बैंक, कैसे होगा इंडिया डिजिटल

एक तरफ सरकार और बैंक जहां डिजिटल पेमेंट की बात कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ जब हम यह करने के लिए जाते हैं हमारे जेब को भी काटा जाता है

FP Staff Updated On: Mar 22, 2018 05:47 PM IST

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डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन डिक्लाइन होने पर भी पैसे काट रहे बैंक, कैसे होगा इंडिया डिजिटल

सरकार कैशलेस ट्रांजैक्शन के लिए तमाम प्रयास कर रही है लेकिन बैंक किसी न किसी तरह से अपने ग्राहकों से शुल्क वसूलने की कोशिश में लगे हुए हैं. बैंक न्यूनतम राशि के आभाव में पैसे नहीं निकलने जैसे वाकयों से ग्राहकों से बेवजह के शुल्क वसूल रहे हैं.

बैंक अकाउंट में पर्याप्त राशि नहीं रहने पर ग्राहक जितनी बार कार्ड से पेमेंट करने या पैसे निकालने की कोशिश करता है उतनी बार बैंक की तरफ से 17 से 25 रुपए तक शुल्क वसूल लिए जाते हैं. इन शुल्क पर जो जीएसटी बनता है उसे भी बैंक जोड़ कर लेता है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, देश का सबसे बड़ा सार्वजनिक बैंक एसबीआई एटीएम या प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) पर डेबिट कार्ड स्वाइप करने के बाद ट्रांजैक्शन डिक्लाइन होने पर 17 रुपए वसूलता है. इसी के एवज में एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक 25 रुपए का शुल्क अपने ग्राहकों से वसूलते हैं.

बैंकों के तरह-तरह के शुल्क वसूलने पर कई रिसर्च रिपोर्ट लिखने वाले आईआईटी बॉम्बे के गणित के प्रोफेसर आशीष दास कहते हैं कि नॉन कैश मर्चेंट ट्रांजैक्शन के लिए डेबिट कार्ड के इस्तेमाल पर बैंकों का इतने बड़े पैमाने पर शुल्क वसूलने का कोई मतलब नहीं बनता. उन्होंने इसके साथ यह भी कहा कि इससे सरकार के कार्ड या डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने वाली मुहिम को भी नुकसान ही हो रहा है.

सरकार ने मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को भी तय कर रखा है उसके बाद भी बैंक ट्रांजैक्शन डिक्लाइन नहीं होने पर भी शुल्क वसूल रहे हैं. एमडीआर वह फी है जो बैंक भुगतान स्वीकार करने वाले मर्चेंट से वसूलते हैं. वहीं दूसरी तरफ, बैंक ग्राहकों को शाखा या एटीएम से पैसे निकालने की जगह डेबिट कार्ड का इस्तेमाल करने की बात भी कहते हैं.

दास ने कहा कि वर्तमान सिस्टम पूरी तरह से एंटी-डिजिटल हैं और पैसे बचाने के मामले में जोखिम भरा भी है. खासकर उन लोगों के लिए जो हर महीने कमा कर भी कुछ पैसे नहीं बचा पाते हैं. ऐसे शुल्क डिजिटल पेमेंट के लिए नकारात्मक ही हैं.

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