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तीन बैंकों के विलय के बाद बैंक ऑफ बड़ौदा से क्यों नाराज हैं निवेशक?

सोमवार शाम 6 बजे के बाद फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली ने मजबूत बैलेंस शीट वाले बैंक ऑफ बड़ौदा में देना और विजया बैंक का विलय कराने का फैसला किया है

Updated On: Sep 18, 2018 07:55 PM IST

Pratima Sharma Pratima Sharma
सीनियर न्यूज एडिटर, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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तीन बैंकों के विलय के बाद बैंक ऑफ बड़ौदा से क्यों नाराज हैं निवेशक?

फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली ने बैंक ऑफ बड़ौदा में देना बैंक और विजया बैंक के विलय का फैसला यह सोचकर लिया कि बैंकिंग सेक्टर मजबूत होगा. जेटली के इस फैसले से जहां बैंक ऑफ बड़ौदा के इनवेस्टर्स को नुकसान हुआ है. वहीं दूसरी तरफ देना बैंक के निवेशकों की चांदी हो गई है.

सोमवार शाम 6 बजे के बाद अरुण जेटली ने बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ देना बैंक और विजया बैंक के विलय का ऐलान किया था. इस फैसले के बाद मंगलवार सुबह जब बाजार खुला तो बैंक ऑफ बड़ौदा के शेयरों में बड़ी बिकवाली हुई. मंगलवार को शेयर बाजार का दिन भर का कारोबार खत्म होने के बाद बैंक ऑफ बड़ौदा के शेयर 17.04 फीसदी गिर चुके थे. सुबह इसके शेयर 120 रुपए पर खुले और दिन के अंत तक 112.20 रुपए पर बंद हुआ.

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एक बात ध्यान देने की है कि बैंक ऑफ बड़ौदा की बैलेंस शीट देना बैंक के मुकाबले बेहतर है. दूसरी तरफ कमजोर बैलेंस शीट वाले देना बैंक के शेयरों को निवेशक हाथोंहाथ ले रहे हैं. मंगलवार को दिन भर के कारोबार के दौरान देना बैंक के शेयरों में 20 फीसदी की तेजी के साथ सर्किट लगा. हालांकि दिन भर के कारोबार के अंत में देना बैंक का शेयर 19.81 फीसदी चढ़कर 19.05 रुपए पर बंद हुआ. एक दिन पहले सोमवार को इसके शेयर 16 रुपए पर बंद हुए थे.

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क्या है विलय का मकसद?

बैंकिंग इंडस्ट्री लगातार बढ़ रहे एनपीए से परेशान है. लिहाजा इस सेक्टर को कंसॉलिडेट करने के लिए अरुण जेटली ने इन तीनों बैंकों के विलय का फैसला लिया है. मिंट के मुताबिक, फ्लिपकैपिटल ने अपने इनवेस्टर्स को भेजे एक नोट में लिखा है, 'अरुण जेटली ने दो मजूबत बैंक विजया और BOB में कमजोर बैलेंसशीट वाले देना बैंक को मिलाना चाहते हैं. इसमें बैंक ऑफ बड़ौदा के छोटे निवेशकों की अनदेखी की गई है.'

फिस्कल ईयर 2018 में बैंक ऑफ बड़ौदा को 2432 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था. इससे एक साल पहले उसे 1383 करोड़ रुपए का प्रॉफिट हुआ था. बैंक का ग्रॉस एनपीए 2018 में 12.3 फीसदी रहा. यह एक साल पहले 10.5 फीसदी था. देना बैंक को 2018 में 1923.20 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था. इससे एक साल पहले भी देना बैंक को 1383 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था. इसका ग्रॉस एनपीए 2018 में 22 फीसदी रहा जो एक साल पहले 16.3 फीसदी था.

जहां तक विजया बैंक की बात है तो 2018 में उसे 727 करोड़ रुपए का प्रॉफिट हुआ था. इससे एक साल पहले इसे 750.50 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ था. इसका ग्रॉस एनपीए 2018 में 6.3 फीसदी रहा जो एक साल पहले 6.6 फीसदी था.

क्या होगा नए बैंक का हाल?

तीनों बैंकों के विलय के बाद जो नया बैंक बनेगा उसमें तीनों बैंकों के कर्मचारी शामिल रहेंगे. अभी बैंक ऑफ बड़ौदा में 56,361, विजया बैंक में 15,874 और देना बैंक में 13,400 कर्मचारी काम कर रहे हैं. ये सब मिलाकर नए बैंक में कुल 85,675 कर्मचारी शामिल होंगे.

एनपीए के लिहाज से देखें तो नए बैंक का नेट एनपीए 5.7 फीसदी रहेगा. बैंक ऑफ बड़ौदा का नेट एनपीए फिलहाल 5.4 फीसदी, विजया बैंक का 4.1 फीसदी और देना बैंक का 11.4 फीसदी है. इन सबको एडजस्ट करने के बाद नए बैंक का टोटल नेट एनपीए कुल लोन का 5.7 फीसदी रहेगा.

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